— कारोबार समाचार ब्यूरो
राजेश वर्मा भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। सैलरी है ₹45,000 महीना। घर की EMI ₹12,000, गाड़ी की EMI ₹8,500, क्रेडिट कार्ड का बकाया ₹6,000, और पिछले साल दुबई ट्रिप के लिए लिए पर्सनल लोन की किस्त ₹4,200। कुल मिलाकर हर महीने ₹30,700 — यानी उनकी आय का करीब 68% — निकल जाता है सिर्फ EMI में। महीने के आखिर में बचता क्या है? बस गुजारे लायक।
राजेश अकेले नहीं हैं। देश के करोड़ों मध्यवर्गीय परिवार इसी चक्र में हैं। और बैंकों के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि यह चक्र अब टूटने की कगार पर है।
आंकड़े जो आपको जानने चाहिए
सरकार कहती है भारत का बैंकिंग सेक्टर 40 साल में सबसे मजबूत है। Gross NPA (यानी जो कर्ज डूब चुके हैं) सितंबर 2025 तक 2.15% पर आ गया — जो सच भी है।
लेकिन RBI की Financial Stability Report के अंदर एक और सच छुपा है जो सुर्खियों में नहीं आया:
- 51.9% — रिटेल लोन में जितने नए NPA बने, उनमें से आधे से ज्यादा पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित कर्जों से आए।
- 1.82% — मार्च 2025 तक पर्सनल/असुरक्षित लोन का NPA, जो एक साल पहले 1.56% था।
- 5.3% — GDP के अनुपात में घरेलू वित्तीय बचत, जो 2020-21 में 11% थी। यानी बचत आधी हो गई।
- ₹4.8 लाख — प्रति व्यक्ति औसत कर्ज, जो 2023 के ₹3.9 लाख से बढ़ गया।
सरल भाषा में: कॉर्पोरेट कर्ज का संकट तो सुलझा लिया गया, लेकिन उसकी जगह एक नया संकट खड़ा हो गया — आपका और हमारा, यानी मध्यवर्ग का कर्ज।
यह जाल बना कैसे?
पहले कॉर्पोरेट डूबे, फिर बैंकों ने आपको खोजा
2015-18 में नीरव मोदी, विजय माल्या, अनिल अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के डिफॉल्ट करने से बैंकों की हालत खराब हो गई। सरकार ने सुधार किए। लेकिन अब बैंकों के पास पैसा था और देने के लिए कोई भरोसेमंद बड़ा ग्राहक नहीं। तो उन्होंने नया टारगेट खोजा — आप।
पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, BNPL (Buy Now Pay Later) — इन सबका प्रचार शुरू हुआ। बैंकों के लिए यह फायदेमंद था क्योंकि इन पर ब्याज दर 14% से 24% तक मिलती है।
फिर आए चीनी ऐप्स
2019-21 के बीच चीनी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स ने भारत में बाढ़ ला दी — “5 मिनट में ₹10,000″। सरकार ने इन्हें बंद किया, लेकिन तब तक “इंस्टेंट कर्ज” की मानसिकता लोगों में घर कर चुकी थी। उस जगह को भारतीय फिनटेक कंपनियों ने भर लिया।
फिर आई महंगाई और EMI का बोझ
ब्याज दरें बढ़ीं, महंगाई बढ़ी, सैलरी उतनी नहीं बढ़ी। और लोग गैप भरने के लिए और कर्ज लेते गए। यह चक्र अब बहुत बड़ा हो चुका है।
अपना ‘EMI Health Check’ खुद करें
यह सबसे जरूरी हिस्सा है। नीचे दिए गए तीन सवाल खुद से पूछें:
सवाल 1: आपका EMI Ratio क्या है?
अपनी सभी EMIs जोड़ें ÷ मासिक Take-Home सैलरी × 100
| अनुपात | स्थिति |
|---|---|
| 30% तक | ✅ सुरक्षित |
| 30–40% | ⚠️ सतर्क रहें |
| 40–50% | 🔴 खतरे की जोन |
| 50% से ज्यादा | 🚨 तुरंत कदम उठाएं |
सवाल 2: आपके कितने ‘असुरक्षित’ कर्ज हैं?
असुरक्षित कर्ज वो होते हैं जिनके पीछे कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी — जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, BNPL। इनकी ब्याज दर सबसे ज्यादा होती है और ये सबसे पहले बोझ बनते हैं।
सवाल 3: क्या आपके पास 3-6 महीने का Emergency Fund है?
यदि नहीं, तो किसी भी EMI लेने से पहले यह fund बनाएं। नौकरी जाने या बीमारी की स्थिति में यही आपको डिफॉल्ट से बचाएगा।
किन कर्जों से दूर रहें — एक स्पष्ट गाइड
🔴 बिल्कुल न लें
- विदेश यात्रा के लिए पर्सनल लोन: दुबई, थाईलैंड घूमना अच्छा है, लेकिन इसके लिए 18-22% ब्याज पर लोन लेना? यह रकम वापस नहीं आएगी, न आपके पास न बैंक के पास।
- महंगे गैजेट के लिए क्रेडिट कार्ड पर खर्च जो आप पूरा नहीं चुका सकते: क्रेडिट कार्ड पर 36-42% सालाना ब्याज लगता है।
- एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन: यह debt trap का सबसे खतरनाक रूप है।
⚠️ सोच-समझकर लें
- होम लोन: लंबे समय में संपत्ति बनती है — यह ‘अच्छा कर्ज’ है। लेकिन EMI आय के 30% से कम रखें।
- वाहन लोन: जरूरत हो तो ठीक है, लेकिन सेकंड-हैंड कार कैश में खरीदना सबसे बेहतर।
- शिक्षा लोन: भविष्य में आय बढ़ाने का साधन — समझदारी से लें।
✅ इनसे ठीक है
- Medical emergency के लिए (बशर्ते insurance न हो)
- घर की जरूरी मरम्मत के लिए
- छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए (यदि plan solid हो)
क्रेडिट कार्ड: दोस्त या दुश्मन?
क्रेडिट कार्ड खुद में बुरा नहीं है। बुरा है उसका गलत उपयोग।
सुरक्षित उपयोग:
- हर महीने पूरा बकाया चुकाएं — एक रुपया भी न छोड़ें
- Minimum Due का भ्रम: ₹10,000 के बकाया पर ₹500 “Minimum Due” देने का मतलब है बाकी ₹9,500 पर 36-42% सालाना ब्याज देना
- Reward Points के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च न करें
खतरे की निशानी:
- यदि आप लगातार Minimum Due ही भर रहे हैं
- यदि एक कार्ड के बिल के लिए दूसरे कार्ड से cash advance ले रहे हैं
- यदि कार्ड की limit बढ़वाने के लिए उत्साहित हैं
CIBIL Score: अपनी वित्तीय छवि जानें
CIBIL Score (300-900) आपकी वित्तीय साख का आईना है। इसे साल में कम से कम एक बार जरूर चेक करें।
कैसे चेक करें — मुफ्त में:
- CIBIL की आधिकारिक वेबसाइट (mycibil.com) पर जाएं
- PAN कार्ड से रजिस्टर करें
- साल में एक बार free report मिलती है
| Score | मतलब |
|---|---|
| 750-900 | उत्कृष्ट — अच्छी ब्याज दर पर लोन मिलेगा |
| 700-749 | अच्छा |
| 650-699 | औसत — ब्याज दर ज्यादा लग सकती है |
| 600 से कम | कमजोर — लोन मिलना मुश्किल |
Score बेहतर करने के तरीके:
- हर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं
- क्रेडिट कार्ड की limit का 30% से कम उपयोग करें
- एक साथ कई लोन के लिए apply न करें
अगर आप पहले से कर्ज के जाल में हैं तो क्या करें?
Step 1: सब कुछ कागज पर लिखें
सभी कर्जों की सूची बनाएं — किसका, कितना बकाया, कितनी ब्याज दर।
Step 2: सबसे महंगा कर्ज पहले चुकाएं
क्रेडिट कार्ड (36-42%) > पर्सनल लोन (18-24%) > वाहन लोन (9-12%) > होम लोन (8-9%)। इसे Avalanche Method कहते हैं — ब्याज बचाने का सबसे अच्छा तरीका।
Step 3: बैंक से बात करें, छुपें नहीं
यदि EMI भरने में दिक्कत हो रही है तो बैंक से संपर्क करें और Loan Restructuring या EMI Moratorium माँगें। बैंक के पास OTS (One Time Settlement) जैसे विकल्प भी होते हैं।
Step 4: Debt Consolidation पर विचार करें
यदि कई छोटे-छोटे महंगे कर्ज हैं, तो कभी-कभी एक बड़ा लोन लेकर सब चुकाना और कम ब्याज देना फायदेमंद होता है। लेकिन यह सावधानी से करें।
रिकवरी एजेंट आए तो घबराएं नहीं — ये हैं आपके अधिकार
RBI के नए नियम (जुलाई 2026 से लागू) आपकी रक्षा करते हैं:
- समय की सीमा: रिकवरी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच संपर्क कर सकता है।
- पूर्व सूचना अनिवार्य: पहली बार घर आने से पहले 30 दिन का लिखित नोटिस देना जरूरी है।
- ID दिखाना जरूरी: एजेंट को बैंक का authorization letter और अपनी ID दिखानी होगी।
- धमकी गैरकानूनी है: गाली देना, धमकाना, परिवार या पड़ोसियों को बताना — ये सब दंडनीय अपराध हैं।
- संपत्ति नहीं जब्त होगी: बिना कोर्ट के आदेश के असुरक्षित लोन में कोई संपत्ति नहीं छीन सकता।
यदि उत्पीड़न हो तो: RBI Ombudsman में ऑनलाइन शिकायत करें — cms.rbi.org.in पर जाएं। यह मुफ्त है।
एक आखिरी बात — समझदारी का मंत्र
पिछली एक पीढ़ी तक मध्यवर्गीय भारतीय परिवार की पहचान थी — पहले बचाओ, फिर खरीदो। अब यह उलट गया है — पहले खरीदो, फिर भरते रहो।
यह बदलाव न सिर्फ आपके घर के बजट को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की नींव को भी कमजोर करता है। क्योंकि जब मध्यवर्ग कर्ज में डूबा होगा, तो वह न खर्च कर पाएगा, न बचत कर पाएगा — और तब “विकसित भारत” का सपना कागज पर ही रह जाएगा।
याद रखें: बैंक आपका दोस्त है जब आप उसकी शर्तों पर नहीं, अपनी समझ पर कर्ज लेते हैं।
यह लेख RBI Financial Stability Reports, Economic Survey 2024-25, Fitch Ratings विश्लेषण और Morgan Stanley की घरेलू ऋण रिपोर्ट पर आधारित है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो




