मुंबई। देश के दूसरे सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक ICICI Bank ने करीब एक दशक बाद विदेशी बॉन्ड बाजार में उतरने की तैयारी की है। बैंक की योजना लगभग 500 मिलियन डॉलर जुटाने की है। यह फंडिंग अमेरिकी डॉलर में बॉन्ड जारी कर की जा सकती है और इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रियायती स्वैप सुविधा का लाभ उठाए जाने की संभावना है।
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, ICICI Bank अपने ग्लोबल मीडियम-टर्म नोट (GMTN) प्रोग्राम के तहत विदेशी बाजार से पूंजी जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन प्रस्तावित बॉन्ड इश्यू का आकार करीब 500 मिलियन डॉलर रहने की संभावना है।
2017 के बाद पहला बड़ा डॉलर बॉन्ड इश्यू
यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो वर्ष 2017 के बाद ICICI Bank का यह पहला बेंचमार्क आकार का अमेरिकी डॉलर बॉन्ड इश्यू होगा। वर्ष 2017 में भी बैंक ने करीब 500 मिलियन डॉलर जुटाए थे।
सूत्रों के मुताबिक बैंक संभावित बॉन्ड पेशकश के लिए अरेंजर्स के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि इश्यू का अंतिम समय अभी तय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि बैंक के अप्रैल-जून तिमाही नतीजे घोषित होने के बाद प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो सकती है।
बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया अगले 30 से 35 दिनों में आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
RBI की रियायती स्वैप विंडो का मिलेगा फायदा
ICICI Bank इस बॉन्ड इश्यू के लिए RBI की रियायती स्वैप विंडो का लाभ उठा सकता है। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में विदेशी मुद्रा में उधारी पर हेजिंग लागत कम करने के उद्देश्य से यह सुविधा शुरू की थी।
इस सुविधा के तहत पात्र विदेशी मुद्रा उधारी के लिए RBI 1.5 प्रतिशत सालाना की निश्चित दर पर स्वैप उपलब्ध कराता है। यह दर अर्धवार्षिक आधार पर कंपाउंड होती है और इसके लिए विदेशी उधारी की न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन वर्ष होनी चाहिए।
ICICI Bank इस सुविधा का लाभ लेने वाला चौथा प्रमुख वाणिज्यिक बैंक बन सकता है। इससे पहले HDFC Bank, Axis Bank और State Bank of India (SBI) विदेशी बॉन्ड इश्यू के लिए इस व्यवस्था का उपयोग कर चुके हैं।
HDFC Bank ने जुटाए 750 मिलियन डॉलर
भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank ने RBI की इस सुविधा का लाभ उठाते हुए पांच वर्षीय डॉलर बॉन्ड के जरिए 750 मिलियन डॉलर जुटाए थे।
HDFC Bank ने यह राशि संबंधित अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से 90 बेसिस पॉइंट अधिक स्प्रेड पर जुटाई।
इसके बाद अन्य भारतीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने भी विदेशी बाजार का रुख किया।
Axis Bank और SBI भी जुटा चुके हैं फंड
Power Finance Corporation (PFC) ने 300 मिलियन डॉलर का बॉन्ड इश्यू पांच वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से 105 बेसिस पॉइंट अधिक स्प्रेड पर किया।
वहीं Axis Bank ने 300 मिलियन डॉलर की राशि 110 बेसिस पॉइंट के स्प्रेड पर जुटाई।
देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने भी तीन वर्षीय सीनियर अनसिक्योर्ड फ्लोटिंग-रेट नोट्स के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए। यह इश्यू Regulation S के तहत किया गया और इसकी कूपन दर SOFR प्लस 100 बेसिस पॉइंट रखी गई।
निवेशक मांग रहे ज्यादा प्रीमियम
विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों की संभावित बॉन्ड आपूर्ति बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों ने अधिक रिटर्न की मांग शुरू कर दी है।
बाजार को उम्मीद है कि RBI की रियायती स्वैप विंडो का लाभ उठाने के लिए कई भारतीय बैंक विदेशी बाजार से धन जुटा सकते हैं। संभावित रूप से बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने के कारण निवेशक अब भारतीय उधारकर्ताओं से अधिक स्प्रेड मांग रहे हैं।
इसी वजह से हाल के डॉलर बॉन्ड इश्यू में भारतीय संस्थानों के लिए स्प्रेड धीरे-धीरे बढ़ता दिखाई दिया है।
RBI का मकसद विदेशी पूंजी आकर्षित करना
RBI की इस पहल का उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाना, रुपये को समर्थन देना और बैंकों की फंडिंग लागत कम करना है।
वर्तमान समय में बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वृद्धि कई मामलों में जमा वृद्धि से तेज बनी हुई है। ऐसे में विदेशी बाजार से अपेक्षाकृत कम लागत पर डॉलर फंडिंग हासिल करने से बैंकों पर फंडिंग दबाव कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की रियायती स्वैप सुविधा बैंकों को विदेशी मुद्रा में पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है और इससे क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर कम करने में भी मदद मिल सकती है।




