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45 साल बाद बदला सांची का लुक, अब नए पैकेज में मिलेगा दूध-दही और पनीर; 8 अगस्त से भोपाल में बिक्री शुरू

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गोंड कला से सजी नई पैकेजिंग, 42 गुणवत्ता परीक्षणों के बाद ही उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा सांची दूध

भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे भरोसेमंद डेयरी ब्रांड सांची ने 45 वर्षों में पहली बार अपनी ब्रांड पहचान और पैकेजिंग को पूरी तरह नया स्वरूप दिया है। अब सांची के दूध, दही, पनीर, छाछ, मठ्ठा और अन्य डेयरी उत्पाद आधुनिक डिजाइन और आकर्षक पैकेजिंग में नजर आएंगे। नए स्वरूप वाले उत्पाद 8 अगस्त 2026 से भोपाल के बाजार में उपलब्ध होंगे।

मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) ने शुक्रवार को भोपाल में आयोजित समारोह में नई ब्रांड पहचान का अनावरण किया। इस अवसर पर नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह, एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी, भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीतेश जोशी, वरिष्ठ अधिकारी, वितरक और बड़ी संख्या में खुदरा विक्रेता मौजूद रहे।

किसानों की समृद्धि से जुड़ा है सांची का विकास

एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि सांची केवल डेयरी ब्रांड नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों की मेहनत और सहकारिता की पहचान है। उन्होंने कहा कि नई ब्रांड पहचान गुणवत्ता, आधुनिकता और किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।

बदला केवल पैकेट नहीं, सोच भी

एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी ने कहा कि पिछले 45 वर्षों से सांची भोपाल के लाखों परिवारों के भरोसे का हिस्सा रही है। नई पैकेजिंग केवल रंग और डिजाइन का बदलाव नहीं, बल्कि समय के साथ आगे बढ़ने की सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नया स्वरूप उसी शुद्धता और विश्वास को आधुनिक अंदाज में उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगा।

बाजार में आसानी से होगी पहचान

भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीतेश जोशी ने बताया कि सांची दूध उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले कड़े गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरता है। नई पैकेजिंग न केवल गुणवत्ता का संदेश देगी, बल्कि उपभोक्ताओं को दुकानों पर सांची उत्पादों की पहचान करने में भी आसानी होगी।

गोंड कला से जुड़ी मध्यप्रदेश की पहचान

नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की पारंपरिक गोंड कला को प्रमुखता दी गई है। इसमें गाय, महिला दुग्ध उत्पादक, ग्रामीण परिवेश और दूध के कैन जैसे चित्रों को कलात्मक रूप से शामिल किया गया है। एमपीसीडीएफ का मानना है कि यह डिजाइन सांची को आधुनिक पहचान देने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ता है।

सभी प्रमुख उत्पादों में मिलेगा नया लुक

नई पैकेजिंग स्मार्ट, गोल्ड, ताज़ा और शक्ति दूध के अलावा सादा दही, पनीर, मठ्ठा (बटरमिल्क), छाछ और चाय दूध (चाह) सहित सांची के पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो में लागू की गई है। इन सभी उत्पादों की बिक्री 8 अगस्त से भोपाल में शुरू होगी।

42 गुणवत्ता परीक्षणों के बाद ही बाजार तक पहुंचता है दूध

भोपाल दुग्ध संघ के आधुनिक एफएसएसएआई मानकों वाले संयंत्र में सांची दूध का पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग की जाती है। यह दूध प्रदेश की सहकारी दुग्ध समितियों से प्राप्त होता है और उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले 42 गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरता है। प्रत्येक पैक को विटामिन ए और विटामिन डी से फोर्टिफाइड भी किया जाता है।

नई ब्रांड पहचान के साथ सांची ने एक बार फिर अपना पुराना वादा दोहराया है—

“स्वाद, सेहत, सांची।”

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