मुंबई, 23 अक्टूबर। ब्रिकवर्क रेटिंग्स (Brickwork Ratings) का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में फंडिंग बढ़ेगी। यह बढ़ोतरी चल रहे प्रोजेक्ट्स के समय पर क्रियान्वयन और भुगतान के चलते संभव होगी। एजेंसी का यह भी कहना है कि सर्विस सेक्टर में कमर्शियल रियल एस्टेट फंडिंग फ्लो को बढ़ावा देगा, जबकि गोल्ड लोन और प्रॉपर्टी के खिलाफ लोन एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) की लेंडिंग को मजबूती देंगे। हालांकि, जिन छोटी एनबीएफसी का माइक्रोफाइनेंस में ज्यादा जोखिम है, वे दबाव में रह सकती हैं।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत की कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल ने मजबूती दिखाई, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर मानसून और वैश्विक मौद्रिक सख्ती जैसी चुनौतियां सामने थीं। प्रमुख भारतीय रेटिंग एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हर डाउनग्रेड पर 2.7 अपग्रेड हुए, जो एक साल पहले 2.4 थे। डाउनग्रेड्स में 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अपग्रेड्स की संख्या स्थिर रही।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा अपग्रेड
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के चीफ रेटिंग्स ऑफिसर के. एच. पटनायक ने बताया कि अपग्रेड्स की अगुवाई इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर, कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स और सेकेंडरी स्टील सेक्टर ने की, जिसे सार्वजनिक खर्च और घरेलू मांग ने समर्थन दिया। इसके विपरीत, टेक्सटाइल, सेरामिक्स, डायमंड और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे सेक्टर कमजोर निर्यात और सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा के कारण दबाव में रहे।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स द्वारा रेटेड कंपनियों में हर डाउनग्रेड पर 3.3 अपग्रेड हुए, और कुल रेटिंग रिव्यू में 35 प्रतिशत अपग्रेड्स रहे। कंपनियों का कर्ज-इक्विटी अनुपात FY20 के 1.1 गुना से घटकर FY25 में लगभग 0.7 गुना हो गया, जिससे उनकी उधारी क्षमता बढ़ी है। “कंपनियों के लिए सबक साफ है: मजबूत क्रेडिट रेटिंग अब फंडिंग एसेट है,” पटनायक ने कहा, और सख्त फाइनेंसिंग माहौल में क्रेडिटवर्थनेस के महत्व को रेखांकित किया।
कमर्शियल रियल एस्टेट से सर्विसेज क्रेडिट ग्रोथ
अगस्त 2026 में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले यह 10.2 प्रतिशत था। वहीं, अप्रैल से जून के दौरान कॉरपोरेट बॉन्ड फंडरेजिंग में 34 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी अवधि में सर्विसेज क्रेडिट में 24.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें कमर्शियल रियल एस्टेट प्रमुख चालक रहा। खासकर हैदराबाद में ऑफिस लीजिंग के लिहाज से अब तक का सबसे मजबूत पहला छमाही दर्ज किया गया।
निर्यातकों को अमेरिका के नए टैरिफ जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण और विवेकाधीन मांग कमजोर हो सकती है, विशेष रूप से दक्षिण भारत में, जहां वर्षा सामान्य से 24 प्रतिशत कम रही। पटनायक ने चेतावनी दी, “H1FY27 ने दिखाया कि भारत की कंपनियों में ताकत है। H2FY27 में यह देखना होगा कि वे इसका कितना अच्छा इस्तेमाल करती हैं,” उन्होंने कहा, और बढ़ती फाइनेंसिंग लागत के बीच मजबूत बैलेंस शीट की जरूरत पर जोर दिया।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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