मुंबई, 26 अक्टूबर। भारत में ऑफिस ग्रॉस लीजिंग 2026 के पहले नौ महीनों में 61.06 मिलियन वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जुलाई-सितंबर (Q3) में गतिविधियों में तेजी के चलते तिमाही लीजिंग 23.17 मिलियन वर्ग फुट रही। यह जानकारी जेएलएल इंडिया (JLL India) के आंकड़ों में सामने आई है।
जनवरी से सितंबर के बीच यह अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन है, जिसमें डील क्लोजर में तेजी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) द्वारा बड़े पैमाने पर लीजिंग देखी गई। इस अवधि के लिए नेट एब्जॉर्प्शन भी लगभग 42.0 मिलियन वर्ग फुट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, जो साल-दर-साल 5.3 प्रतिशत की वृद्धि है।
बेंगलुरु में सबसे अधिक लीजिंग
बेंगलुरु ने ऑफिस डिमांड में अपनी बढ़त बरकरार रखी, जहां Q3 2026 की ग्रॉस लीजिंग में 33.4 प्रतिशत और नौ महीनों में 28.0 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही। हैदराबाद ने Q3 में 19.6 प्रतिशत के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, इसके बाद दिल्ली एनसीआर 18.1 प्रतिशत और मुंबई 12.4 प्रतिशत पर रहे। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और पुणे—इन चारों शहरों में ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे प्रमुख बाजारों में गतिविधि अधिक व्यापक हुई है।
फ्लेक्स ऑपरेटर्स ने शीर्ष सात शहरों में पहली नौ महीनों में रिकॉर्ड 13.83 मिलियन वर्ग फुट लीज किया, जो किसी भी समान अवधि में अब तक का सबसे अधिक है। Q3 2026 में बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली एनसीआर और मुंबई में क्रमशः 7.74 मिलियन, 4.55 मिलियन, 4.19 मिलियन और 2.87 मिलियन वर्ग फुट की ग्रॉस लीजिंग दर्ज की गई।
GCCs और सेक्टोरल ट्रेंड्स का असर
GCCs ने सितंबर 2026 तक नौ महीनों में 26.2 मिलियन वर्ग फुट लीज किया, जो साल-दर-साल 30.6 प्रतिशत की वृद्धि है और कुल लीजिंग गतिविधि का 42.9 प्रतिशत है। यह आंकड़ा 2025 के पूरे साल की GCC लीजिंग का 84 प्रतिशत है, जबकि 2025 भी रिकॉर्ड वर्ष था। Q3 में विदेशी ऑक्यूपायर्स की हिस्सेदारी 62.0 प्रतिशत रही, जो सात तिमाहियों में सबसे अधिक है। बेंगलुरु ने Q3 में सभी विदेशी ऑक्यूपायर लीजिंग का 41.6 प्रतिशत हिस्सा लिया।
Q3 2026 में टेक्नोलॉजी सेक्टर ने 25.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ लीजिंग का नेतृत्व किया, जबकि BFSI सेक्टर 25.3 प्रतिशत के साथ करीब रहा—यह BFSI का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही वॉल्यूम है। मैन्युफैक्चरिंग/इंडस्ट्रियल ऑक्यूपायर्स की हिस्सेदारी 16.1 प्रतिशत और फ्लेक्स ऑपरेटर्स की 15.5 प्रतिशत रही।
नेट एब्जॉर्प्शन और वेकेंसी ट्रेंड्स
पहले नौ महीनों में नेट एब्जॉर्प्शन 41.96 मिलियन वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर पर रही। इसमें बेंगलुरु का योगदान 13.12 मिलियन वर्ग फुट (31.3 प्रतिशत), हैदराबाद का 8.97 मिलियन वर्ग फुट (21.4 प्रतिशत), दिल्ली एनसीआर का 6.07 मिलियन वर्ग फुट (14.5 प्रतिशत) और पुणे का 5.83 मिलियन वर्ग फुट (13.9 प्रतिशत) रहा। Q3 में नेट एब्जॉर्प्शन तिमाही आधार पर 14.1 प्रतिशत बढ़कर 15.08 मिलियन वर्ग फुट पहुंच गई, जो वर्ष की सबसे ऊंची है।
रिकॉर्ड एब्जॉर्प्शन के बावजूद, देशभर के शीर्ष सात शहरों में वेकेंसी दर तिमाही आधार पर 30 बेसिस पॉइंट बढ़कर 14.8 प्रतिशत हो गई, हालांकि यह सालाना आधार पर 90 बेसिस पॉइंट कम रही। इस दौरान 43.7 मिलियन वर्ग फुट की नई सप्लाई आई, जो महामारी के बाद किसी भी समान अवधि में सबसे अधिक है। मुंबई और दिल्ली एनसीआर में वेकेंसी दर क्रमशः 16 और 15 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ गई, जबकि हैदराबाद में मजबूत सप्लाई के बावजूद वेकेंसी स्थिर रही।
2026 और आगे का आउटलुक
जेएलएल इंडिया का अनुमान है कि 2026 में ऑफिस लीजिंग 2025 के ऐतिहासिक स्तर के बराबर रहेगी, और अगले दो से तीन वर्षों में ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम 100 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकता है। देश की प्रतिभा और एआई विकास केंद्र के रूप में स्थिति वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रही है, खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी आरएंडडी, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एयरोस्पेस क्षेत्रों में।
राधा धीर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारत, जेएलएल ने कहा, “Q3 ने दिखाया कि जब भारत के ऑफिस बाजार में विश्वास लौटता है तो क्या होता है। Q2 में जो डील्स रुकी थीं, वे साइन हुईं और ऑक्यूपायर्स ने अपने विकास योजनाओं के साथ मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई। भारत वैश्विक GCC इकोसिस्टम का केंद्र बना हुआ है और आंकड़े इसका प्रमाण हैं।”
जेएलएल इंडिया एक रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म है, जिसकी रिसर्च डिवीजन रियल एस्टेट इंटेलिजेंस सर्विस (REIS) बाजार डेटा और विश्लेषण प्रदान करती है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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