नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। बिनक्वल टैलेंट इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत में 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पेशेवरों की मांग लगभग 14 लाख तक पहुंचने की संभावना है, जबकि उपलब्ध टैलेंट पूल केवल 4 लाख के आसपास है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच 3.5 गुना से अधिक का अंतर पैदा हो रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह बढ़ती टैलेंट गैप कंपनियों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि व्यापार क्षेत्रों में एआई अपनाने की गति तेज हो रही है।
यह रिपोर्ट बिनक्वल (BinQle) द्वारा जारी की गई है, जो एक वैश्विक टैलेंट इंटेलिजेंस और वर्कफोर्स सॉल्यूशंस कंपनी है। इसमें भर्ती से जुड़ी चुनौतियों, भर्ती में एआई के उपयोग, जॉब रोल्स में बदलाव और विभिन्न उद्योगों पर एआई के व्यापक प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्ष भारत भर के टैलेंट मार्केट इनसाइट्स और वरिष्ठ मानव संसाधन व टैलेंट एक्विजिशन नेताओं के विचारों पर आधारित हैं।
वेतन वृद्धि और कौशल की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, एआई और मशीन लर्निंग, क्लाउड आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा, डेटा इंजीनियरिंग, डेवऑप्स और फुल-स्टैक डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की उपलब्धता की तुलना में मांग काफी अधिक है। जॉब-रेडी पेशेवरों की कमी के कारण इन तकनीकी भूमिकाओं में वेतन 30–35 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वर्तमान में आधे से भी कम उम्मीदवार इंडस्ट्री की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं, जबकि कंपनियां ऐसे पेशेवरों की तलाश में हैं जो शुरुआत से ही प्रभावी योगदान दे सकें।
“भारत के लिए एआई का अवसर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां कितनी तेजी से सही कौशल की पहचान, विकास और तैनाती कर पाती हैं। कंपनियों को प्रतिक्रियात्मक भर्ती से आगे बढ़कर भविष्य उन्मुख टैलेंट रणनीति बनानी होगी ताकि व्यापार निरंतरता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा बनी रहे,” सुशांत आचार्य, सह-संस्थापक और मुख्य व्यवसाय अधिकारी, बिनक्वल ने कहा।
एआई से बदलते जॉब रोल्स
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई मौजूदा भूमिकाओं को बदल रहा है, न कि केवल उन्हें प्रतिस्थापित कर रहा है। ऐसे में एआई की समझ, डेटा साक्षरता, अनुकूलनशीलता और क्रॉस-फंक्शनल संवाद जैसी क्षमताएं उच्च मांग वाले क्षेत्रों में जरूरी हो गई हैं। अनुमान है कि 2030 तक मौजूदा कौशल का 39 प्रतिशत हिस्सा अप्रचलित हो जाएगा, जिससे लगातार री-स्किलिंग और ऐसे पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ेगी जो तकनीकी विशेषज्ञता के साथ मानवीय निर्णय और व्यापार समझ भी रखते हों।
संगठनों के लिए सिफारिशें
इन चुनौतियों से निपटने के लिए बिनक्वल टैलेंट इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026 ने संगठनों के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं सुझाई हैं: 12–18 महीने पहले कौशल अंतर की पहचान, री-स्किलिंग कार्यक्रमों को मापनीय व्यापार परिणामों से जोड़ना, विशेषज्ञ और स्थानीय टैलेंट के लिए समानांतर पाइपलाइन बनाना, मजबूत एम्प्लॉयर ब्रांडिंग के लिए स्पष्ट एआई अपनाने की कहानी प्रस्तुत करना, और स्थायी टैलेंट पाइपलाइन विकसित होने तक लचीली वर्कफोर्स रणनीति का विस्तार करना।
भारत मुख्यालय वाली बिनक्वल कंपनियों और जीसीसी को भारत, अमेरिका, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में एआई-असिस्टेड सोर्सिंग, ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग, विशेषज्ञों द्वारा साक्षात्कार और प्रिडिक्टिव टैलेंट एनालिटिक्स के जरिए सहयोग देती है। कंपनी आईटी, टेलीकॉम, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में तकनीकी और विशेष भूमिकाओं के लिए कार्य करती है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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