मुंबई, 15 अक्टूबर। ब्रिकवर्क रेटिंग्स (Brickwork Ratings) का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2FY27) में इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और समय पर भुगतान के चलते निवेश आकर्षित होगा। एजेंसी का यह भी कहना है कि सर्विस सेक्टर में कमर्शियल रियल एस्टेट फंडिंग फ्लो में अग्रणी रहेगा, जबकि गोल्ड लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) की लेंडिंग को मजबूती देंगे। हालांकि, माइक्रोफाइनेंस में अधिक हिस्सेदारी रखने वाली छोटी एनबीएफसी अभी भी दबाव में हैं।
भारत की कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ऊंचे कच्चे तेल के दाम, कमजोर मानसून और सख्त वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियों जैसी चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखाई। प्रमुख भारतीय रेटिंग एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हर डाउनग्रेड पर 2.7 अपग्रेड हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह अनुपात 2.4 था। डाउनग्रेड्स में 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अपग्रेड्स स्थिर रहीं।
सेक्टरवार क्रेडिट ट्रेंड
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के मुख्य रेटिंग अधिकारी के. एच. पटनायक के अनुसार, अपग्रेड्स का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर, कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स और सेकेंडरी स्टील सेक्टर ने किया, जिसे सार्वजनिक खर्च और घरेलू मांग ने समर्थन दिया। इसके विपरीत, टेक्सटाइल्स, सेरामिक्स, डायमंड्स और स्पेशलिटी केमिकल्स को कमजोर निर्यात और सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा का दबाव झेलना पड़ा।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स द्वारा रेटेड कंपनियों में हर डाउनग्रेड पर 3.3 अपग्रेड दर्ज हुए, और रेटिंग रिव्यू में अपग्रेड्स की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत रही। कॉरपोरेट डेट-इक्विटी अनुपात FY20 के 1.1 गुना से घटकर FY25 में लगभग 0.7 गुना रह गया, जिससे कंपनियों की उधारी क्षमता बढ़ी है।
कमर्शियल रियल एस्टेट और एनबीएफसी लेंडिंग
अगस्त 2026 में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले यह 10.2 प्रतिशत था। वहीं, अप्रैल से जून के दौरान कॉरपोरेट बॉन्ड फंडरेजिंग में 34 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी अवधि में सर्विसेज क्रेडिट 24.3 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें कमर्शियल रियल एस्टेट मुख्य चालक रहा। हैदराबाद में ऑफिस लीजिंग के लिहाज से अब तक का सबसे मजबूत पहला हाफ दर्ज किया गया।
गोल्ड लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी एनबीएफसी लेंडिंग के लिए सहायक साबित हुए, लेकिन माइक्रोफाइनेंस में भारी हिस्सेदारी वाली छोटी एनबीएफसी के लिए परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
जोखिम और आउटलुक
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने आगाह किया कि निर्यातकों को अमेरिका के नए टैरिफ का जोखिम है, जबकि ग्रामीण और विवेकाधीन मांग कमजोर हो सकती है, खासकर दक्षिण भारत में, जहां वर्षा सामान्य से 24 प्रतिशत कम रही। “H1FY27 में भारत की कंपनियों ने मजबूती दिखाई है। H2FY27 में यह देखना होगा कि वे इसका कितना बेहतर उपयोग कर पाती हैं,” के. एच. पटनायक ने कहा। उन्होंने बढ़ती फाइनेंसिंग लागत के बीच मजबूत बैलेंस शीट्स की अहमियत पर जोर दिया।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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