मुंबई, 9 अक्टूबर। सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹35,861 करोड़ की शुद्ध निकासी की है। यह जानकारी पीएल कैपिटल (PL Capital, प्रभुदास लीलाधर) की ताजा सेक्टर-वार एफपीआई/एफआईआई फ्लो स्टडी में सामने आई है। अगस्त में जहां ₹29,628 करोड़ का शुद्ध निवेश हुआ था, वहीं सितंबर में यह ट्रेंड पलट गया और दो महीने की सकारात्मक निवेश की लहर थम गई।
सितंबर में बिकवाली लगभग सभी क्षेत्रों में देखी गई। सबसे अधिक निकासी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में ₹13,147 करोड़ रही, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,494 करोड़ का निवेश आया था। यह आंकड़ा सेक्टर के दीर्घकालिक औसत मासिक बहिर्प्रवाह ₹2,237 करोड़ से लगभग छह गुना अधिक है। ऑयल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स सेक्टर से ₹6,854 करोड़ की निकासी हुई, जो इसके औसत से तीन गुना ज्यादा है। ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स में अगस्त के ₹3,106 करोड़ के निवेश के बाद सितंबर में ₹6,212 करोड़ की बिकवाली हुई।
सेक्टरवार एफपीआई फ्लो और रुझान
अन्य प्रमुख क्षेत्रों में टेलीकम्युनिकेशन (₹3,414 करोड़), मेटल्स एंड माइनिंग (₹3,003 करोड़) और एफएमसीजी (₹3,001 करोड़) में भी उल्लेखनीय निकासी दर्ज की गई। टेलीकम्युनिकेशन और एफएमसीजी दोनों में 2026 में हर महीने एफपीआई की बिकवाली देखी गई है। पावर (₹2,223 करोड़), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (₹1,905 करोड़), कैपिटल गुड्स (₹1,461 करोड़) और कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स (₹1,205 करोड़) में भी शुद्ध बिकवाली रही। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर में अपेक्षाकृत कम ₹998 करोड़ की निकासी हुई, जो इसके दीर्घकालिक औसत ₹2,752 करोड़ से काफी कम है।
इसके विपरीत, कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में सितंबर में सबसे अधिक ₹2,333 करोड़ का निवेश आया, जो लगातार चौथे महीने सकारात्मक रहा। सर्विसेज (₹2,302 करोड़), हेल्थकेयर (₹2,117 करोड़) और कंस्ट्रक्शन (₹1,311 करोड़) में भी विदेशी निवेश हुआ। टेक्सटाइल्स सेक्टर में ₹646 करोड़ का निवेश आया, जो इसके लगभग स्थिर दीर्घकालिक औसत से अधिक है। इन चारों क्षेत्रों में औसत से ज्यादा निवेश दर्ज हुआ, जिसमें हेल्थकेयर का निवेश औसत से करीब छह गुना रहा।
वर्षभर और तिमाही एफपीआई पैटर्न
जनवरी से सितंबर 2026 तक कुल सेक्टोरल एफपीआई निकासी लगभग ₹2.60 लाख करोड़ रही। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा फाइनेंशियल सर्विसेज का था, जिसमें ₹1,14,800 करोड़ की निकासी हुई। इसके बाद ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स (₹38,560 करोड़), ऑयल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स (₹37,520 करोड़), एफएमसीजी (₹32,720 करोड़) और टेलीकम्युनिकेशन (₹31,550 करोड़) रहे। वहीं, जिन क्षेत्रों में विदेशी निवेश आया उनमें मेटल्स एंड माइनिंग (₹16,560 करोड़), कैपिटल गुड्स (₹14,020 करोड़) और सर्विसेज (₹12,580 करोड़) शामिल हैं।
पीएल कैपिटल के तिमाही विश्लेषण के अनुसार, एफआईआई सेक्टर वेटेज में धीरे-धीरे बदलाव देखा गया है। बैंकों का हिस्सा Q1FY27 में घटकर 26.19 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 30.21 प्रतिशत था। आईटी का हिस्सा घटकर 16.04 प्रतिशत (पूर्व में 19.35 प्रतिशत) रहा। वहीं, इलेक्ट्रिकल्स का हिस्सा बढ़कर 17.15 प्रतिशत (पूर्व में 13.28 प्रतिशत) और नॉन-फेरस मेटल्स का हिस्सा बढ़कर 16.09 प्रतिशत (पूर्व में 13.39 प्रतिशत) हो गया।
विश्लेषकों की राय: सेक्टर रोटेशन पर नजर
पीएल कैपिटल की रिसर्च एनालिस्ट – क्वांट, मन्नत गांधी ने कहा कि सितंबर में विदेशी निवेशकों की धारणा में स्पष्ट बदलाव दिखा, जिसमें फाइनेंशियल्स, एनर्जी और ऑटोमोबाइल्स में बिकवाली केंद्रित रही, जबकि कंज्यूमर सर्विसेज, सर्विसेज और हेल्थकेयर में औसत से कहीं अधिक निवेश आया। गांधी ने यह भी कहा कि तिमाही आंकड़ों में बैंकों और आईटी से इलेक्ट्रिकल्स और नॉन-फेरस मेटल्स की ओर एफआईआई आवंटन में बदलाव दिखता है और मासिक फ्लो को कमाई और वैल्यूएशन के साथ देखना चाहिए।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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