नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। जॉन क्रेन (John Crane) ने जर्मनी के बवेरिया स्थित एक प्रमुख रिफाइनरी में दो महत्वपूर्ण टाइप 28XP ड्राई गैस सील की मरम्मत केवल छह हफ्तों में पूरी कर रिफाइनरी को तय समय पर पुनः शुरू करने में मदद की है। आमतौर पर यह प्रक्रिया 16 से 18 हफ्ते लेती है। कंपनी के अनुसार, इस तेज़ प्रोजेक्ट से रिफाइनरी को हर सप्ताह की देरी पर होने वाले कम से कम €1 मिलियन (लगभग ₹9 करोड़) के उत्पादन नुकसान से बचाया गया।
यह सील रिफाइनरी यूनिट के संचालन के लिए जरूरी कंप्रेसर का अभिन्न हिस्सा हैं। जॉन क्रेन का कहना है कि €1 मिलियन प्रति सप्ताह के उत्पादन जोखिम का अनुमान सतर्कता से लगाया गया है। मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) के शोध के अनुसार, एक मझोली रिफाइनरी में विश्वसनीयता संबंधी लाभ का अवसर हर साल US$20 मिलियन से US$50 मिलियन तक होता है।
वैश्विक समन्वय से तेज़ी आई
शटडाउन की पुष्टि कम समय में होने के कारण, रिफाइनरी को दोनों टैंडम टाइप 28XP नॉन-कॉन्टैक्टिंग ड्राई गैस सील की जांच, मरम्मत, डायनामिक टेस्टिंग और छह हफ्ते में वापसी की आवश्यकता थी। जॉन क्रेन ने अपनी वैश्विक सेवा और सप्लाई नेटवर्क को सक्रिय किया। जापान के ड्राई गैस सील सर्विस सेंटर ने प्राथमिकता के साथ काम किया, चेक गणराज्य में मेटल कंपोनेंट्स तैयार हुए और विशेषज्ञ सप्लायर्स ने सील फेस की डिलीवरी तेज़ की।
जर्मनी और जापान की टीमों ने रिफाइनरी के साथ साप्ताहिक प्रगति समीक्षा की, हर चरण पर नजर रखी और समयबद्धता के जोखिमों का समाधान किया। दोनों सील शटडाउन अवधि में ही वापस कर दी गईं, जिससे रिफाइनरी ने तय समय पर उत्पादन शुरू कर दिया।
लीड टाइम में बड़ी कमी
इस तेज़ प्रतिक्रिया से मरम्मत का सामान्य लीड टाइम 10 से 12 हफ्ते घट गया। जॉन क्रेन के यूरोप के उपाध्यक्ष क्रिश्चियन नाल्डिनी (Christian Naldini) ने कहा, “हर सप्ताह की देरी पर कम से कम €1 मिलियन का उत्पादन जोखिम था, इसलिए मरम्मत में देरी की कोई गुंजाइश नहीं थी। जर्मनी, जापान और चेक गणराज्य में अपनी टीमों और सप्लाई नेटवर्क को सक्रिय कर हमने छह हफ्ते में वह काम पूरा किया, जो आमतौर पर 16 से 18 हफ्ते लेता।”
यह प्रोजेक्ट जॉन क्रेन परफॉर्मेंस प्लस (John Crane Performance Plus) सर्विस सॉल्यूशंस के तहत पूरा हुआ, जिसका उद्देश्य घूर्णन उपकरणों की विश्वसनीयता बढ़ाना और महत्वपूर्ण रखरखाव आवश्यकताओं को पूरा करना है।
उद्योग पर असर और संदर्भ
यह उदाहरण ऐसे समय में आया है जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) का अनुमान है कि 2024 से 2030 के बीच भारत की तेल मांग प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल बढ़ेगी, जो किसी भी देश के लिए सबसे अधिक अनुमानित वृद्धि है। जॉन क्रेन ने इस मामले को उदाहरण के तौर पर पेश किया कि किस तरह कुशल शटडाउन योजना और रखरखाव से रिफाइनरियां डाउनटाइम कम कर सकती हैं और उत्पादन सुरक्षित रख सकती हैं।
जॉन क्रेन फ्लो कंट्रोल टेक्नोलॉजीज का वैश्विक प्रदाता है और स्मिथ्स ग्रुप पीएलसी (Smiths Group plc) का हिस्सा है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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