मुंबई, 22 अक्टूबर। नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) और आईआरईएक्स (IREX) के संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार, 61 प्रतिशत भारतीय उत्तरदाता ओवरसीज प्रॉपर्टी खरीदने का उद्देश्य किराया आय और पूंजी मूल्यवृद्धि मानते हैं। गुरुवार को जारी इस अध्ययन में बताया गया कि निवेश से मिलने वाला रिटर्न अंतरराष्ट्रीय आवासीय संपत्ति खरीदने के फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
“कीज बियॉन्ड बॉर्डर्स” नामक इस सर्वेक्षण में सामने आया कि ओवरसीज रियल एस्टेट अब उत्तरदाताओं के धन पोर्टफोलियो का 13 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है, जबकि एक दशक पहले यह आंकड़ा लगभग 5 प्रतिशत था। कुल संपत्ति आवंटन में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है, जिसमें 32 प्रतिशत घरेलू संपत्ति में है। 84 प्रतिशत उत्तरदाताओं के पास पहले से ही ओवरसीज प्रॉपर्टी है, जबकि 16 प्रतिशत पहली बार खरीदारी करने वाले हैं।
पसंदीदा देश और निवेश के कारण
भारतीय खरीदारों की पसंद मध्य पूर्व, यूरोप, एशिया-पैसिफिक और उत्तरी अमेरिका तक फैली है। यूएई, ग्रीस, थाईलैंड, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, बाली (इंडोनेशिया), कनाडा और मलेशिया शीर्ष विकल्पों में हैं। जॉर्जिया, साइप्रस, माल्टा और लातविया जैसे अन्य बाजार भी रुचि आकर्षित कर रहे हैं, जहां निवास कार्यक्रम, निवेश संभावना और जीवनशैली जैसे कारण प्रभावी हैं।
निवास और गोल्डन वीजा के अवसर ओवरसीज प्रॉपर्टी खरीदने का सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं। इसके बाद पोर्टफोलियो विविधीकरण, मुद्रा हेजिंग, व्यवसाय विस्तार, कर लाभ, बच्चों की शिक्षा और जीवनशैली सुधार जैसे कारक आते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, ओवरसीज संपत्ति खरीद को अब केवल वित्तीय लाभ ही नहीं, बल्कि व्यापक संपत्ति और निवेश रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
खरीदार प्रोफाइल और संपत्ति की पसंद
व्यवसायी, व्यापारी और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोग 53 प्रतिशत उत्तरदाताओं में शामिल हैं, जबकि कॉरपोरेट एक्जीक्यूटिव और कामकाजी पेशेवरों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है, जो एक दशक पहले 7 प्रतिशत थी। प्रथम पीढ़ी के उद्यमी 11 प्रतिशत हैं। 76 प्रतिशत उत्तरदाता 35 से 50 वर्ष की आयु के हैं, जो संपत्ति निर्माण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना की प्रासंगिकता को दर्शाता है।
संपत्ति प्रकार की बात करें तो 69 प्रतिशत उत्तरदाता अपार्टमेंट और कंडोमिनियम को प्राथमिकता देते हैं, इसके बाद विला और टाउनहाउस 26 प्रतिशत, पेंटहाउस 4 प्रतिशत और ब्रांडेड रेजिडेंस 1 प्रतिशत है। अधिकांश खरीदार (85 प्रतिशत) 2,50,000 से 10,00,000 अमेरिकी डॉलर के बीच निवेश करने की योजना बना रहे हैं। संपत्ति का आकार भी महत्वपूर्ण है—76 प्रतिशत खरीदार 1,500 से 2,500 वर्ग फुट के घर चाहते हैं, जिसमें 49 प्रतिशत की पसंद 2,000–2,500 वर्ग फुट और 27 प्रतिशत की 1,500–2,000 वर्ग फुट है।
रेमिटेंस ट्रेंड और नियामकीय स्थिति
भारतीय निवासियों द्वारा ओवरसीज संपत्ति खरीद के लिए भेजी गई रेमिटेंस वित्त वर्ष 2025–26 में 64 प्रतिशत बढ़कर 528.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2024–25 में यह 322.82 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। यह वृद्धि तब हुई जब भारतीय रिजर्व बैंक की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कुल आउटफ्लो इसी अवधि में लगभग 2 प्रतिशत घट गया। संपत्ति संबंधी रेमिटेंस कुल एलआरएस आउटफ्लो का लगभग 1.8 प्रतिशत है।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष खरीदारों की घोषित खरीद मंशा पर आधारित हैं और इसमें ट्रॉफी या अल्ट्रा-प्राइम संपत्तियां शामिल नहीं हैं। सभी फंडिंग एलआरएस, फेमा और भारत व गंतव्य देशों के लागू कर नियमों के अनुरूप मानी गई है। उत्तरदाताओं में खरीदार और इंटरमीडियरी दोनों शामिल हैं, लेकिन यह सैंपल सभी निवासी भारतीय खरीदारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
उद्योग जगत की राय
शिशिर बैजल, अंतरराष्ट्रीय पार्टनर, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, नाइट फ्रैंक इंडिया ने कहा, “यह रिपोर्ट उन देशों को प्रस्तुत करती है जिन्हें खरीदार एलआरएस फ्रेमवर्क के तहत विचार कर सकते हैं और यह दिखाती है कि हर बाजार को व्यक्तिगत निवेश लक्ष्य, बजट और नियामकीय पहलुओं के अनुसार आंकना चाहिए।”
आईआरईएक्स की इवेंट डायरेक्टर लावण्या आनंद ने कहा, “भारतीय खरीदारों में ओवरसीज रियल एस्टेट को लेकर बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि अब वैश्विक संपत्ति स्वामित्व के प्रति अधिक सोच-समझकर कदम उठाए जा रहे हैं, जहां निवेश की संभावना, निवास के विकल्प और जीवनशैली की आकांक्षाएं एक साथ आती हैं।” आनंद ने यह भी जोड़ा कि नाइट फ्रैंक इंडिया के साथ यह साझेदारी पूर्व के शोध पर आधारित है और 2017 के बाद से निवेश प्राथमिकताओं और रुझानों में आए बदलावों का अध्ययन करती है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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