आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बदली छात्रों की सोच, विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र अब AI, डेटा साइंस और बिजनेस एनालिटिक्स जैसे कोर्स को दे रहे प्राथमिकता
कारोबार समाचार | विशेष फीचर
नई दिल्ली। कुछ साल पहले तक विदेश में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले अधिकांश भारतीय छात्रों की पहली पसंद MBA होती थी। माना जाता था कि एक प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल से MBA करने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों में आकर्षक वेतन वाली नौकरी लगभग तय है। लेकिन अब दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने न केवल उद्योगों और नौकरियों का स्वरूप बदलना शुरू किया है, बल्कि यह भी तय करना शुरू कर दिया है कि आने वाली पीढ़ी क्या पढ़ना चाहती है।
आज के छात्र केवल यह नहीं सोच रहे कि “कौन-सा कोर्स अच्छी नौकरी दिलाएगा?” बल्कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि “10 या 15 साल बाद कौन-सी स्किल्स की सबसे ज्यादा जरूरत होगी?” यही सोच उच्च शिक्षा की दिशा बदल रही है।
विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के रुझानों से पता चलता है कि Artificial Intelligence, Data Science, Machine Learning, Business Analytics, Cyber Security और Sustainability जैसे विषय पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो गए हैं। वहीं, पारंपरिक MBA अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेले MBA की जगह अब तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन कौशल का संयोजन अधिक मूल्यवान माना जा रहा है।
AI सिर्फ नौकरियां नहीं बदल रहा, पढ़ाई का भविष्य भी बदल रहा
पिछले तीन वर्षों में दुनिया ने AI की रफ्तार को बेहद करीब से देखा है। ChatGPT, Gemini, Claude, Copilot जैसे AI टूल्स ने यह साबित कर दिया कि मशीनें अब केवल दोहराए जाने वाले कार्य ही नहीं, बल्कि लेखन, विश्लेषण, प्रोग्रामिंग, डिजाइन और ग्राहक सेवा जैसे बौद्धिक कार्य भी तेज़ी से कर सकती हैं।
इस बदलाव का सीधा असर रोजगार बाजार पर पड़ रहा है। कई कंपनियां कर्मचारियों से AI टूल्स का उपयोग करने की अपेक्षा कर रही हैं, जबकि नई भर्ती में भी AI और डेटा से जुड़ी क्षमताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
यही कारण है कि आज का छात्र यह सोचने लगा है कि यदि भविष्य की नौकरी AI के साथ काम करने वालों को मिलेगी, तो पढ़ाई भी उसी दिशा में करनी होगी।
भारतीय छात्रों की पसंद तेजी से बदल रही
भारत लंबे समय से दुनिया में सबसे अधिक छात्रों को विदेश भेजने वाले देशों में शामिल है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और आयरलैंड जैसे देशों में हर वर्ष लाखों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं।
हाल के वर्षों में विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों द्वारा चुने जा रहे विषयों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
जहां पहले MBA, Finance और General Management सबसे लोकप्रिय विकल्प हुआ करते थे, वहीं अब छात्र बड़ी संख्या में इन विषयों की ओर बढ़ रहे हैं—
- Artificial Intelligence
- Data Science
- Computer Science
- Business Analytics
- Machine Learning
- Robotics
- Cyber Security
- Cloud Computing
- Health Informatics
- Environmental Science
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक है। आने वाले वर्षों में तकनीकी और विश्लेषणात्मक कौशल लगभग हर पेशे का अनिवार्य हिस्सा बन सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय आंकड़े क्या कहते हैं?
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा से जुड़े नवीनतम रुझानों के अनुसार अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) विषयों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
विशेष रूप से गणित और कंप्यूटर साइंस अब सबसे लोकप्रिय अध्ययन क्षेत्रों में शामिल हैं। इंजीनियरिंग भी शीर्ष पसंद बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI, ऑटोमेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण STEM विषयों की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।
भारतीय छात्रों का झुकाव भी इसी दिशा में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
आखिर क्यों बदल रही है छात्रों की सोच?
इस प्रश्न का उत्तर केवल AI नहीं है।
कई बड़े बदलाव एक साथ हो रहे हैं—
1. AI का तेजी से बढ़ता उपयोग
बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, मीडिया, विनिर्माण, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं तक AI का उपयोग बढ़ रहा है।
2. कंपनियों की बदलती जरूरत
अब कंपनियां केवल डिग्री नहीं, बल्कि समस्या समाधान, डेटा विश्लेषण और AI टूल्स का उपयोग करने वाले कर्मचारियों की तलाश में हैं।
3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
अब भारतीय छात्र केवल भारत के छात्रों से नहीं, बल्कि दुनिया भर के प्रतिभाशाली युवाओं से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
4. तेजी से बदलती तकनीक
आज सीखी गई तकनीक कुछ वर्षों में बदल सकती है। इसलिए छात्र ऐसे विषय चुनना चाहते हैं जिनमें लगातार सीखने और आगे बढ़ने के अवसर हों।
MBA की चमक कम हुई या बदला उसका स्वरूप?
यह कहना गलत होगा कि MBA की उपयोगिता समाप्त हो गई है।
असल बदलाव यह है कि अब कंपनियां ऐसे प्रबंधकों को अधिक महत्व दे रही हैं जिन्हें तकनीक की समझ भी हो।
आज कई छात्र पहले AI, Data Science या Computer Science में मास्टर्स कर रहे हैं और उसके बाद MBA करके तकनीकी ज्ञान के साथ नेतृत्व क्षमता विकसित कर रहे हैं।
दूसरी ओर, कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय अब ऐसे MBA कार्यक्रम भी चला रहे हैं जिनमें AI, Business Analytics, Digital Transformation और Data Strategy जैसे विषय शामिल हैं।
अर्थात भविष्य का सफल मैनेजर वही होगा जो तकनीक और व्यवसाय—दोनों की भाषा समझता हो।
नई पीढ़ी क्यों सोच रही है अलग?
आज विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाली पीढ़ी ने बचपन से कई बड़े बदलाव देखे हैं।
- कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई।
- डिजिटल भुगतान का विस्फोट।
- घर बैठे किराना और दवाइयों की डिलीवरी।
- AI चैटबॉट्स का बढ़ता उपयोग।
- रिमोट वर्क और हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति।
इन अनुभवों ने युवाओं को यह सिखाया है कि दुनिया बहुत तेजी से बदलती है। इसलिए वे ऐसी शिक्षा चाहते हैं जो केवल आज नहीं बल्कि अगले 15–20 वर्षों तक उपयोगी रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों की प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव देखा गया है। पहले जहां अधिकांश छात्र केवल MBA को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मानते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में छात्र AI, डेटा साइंस और बिजनेस एनालिटिक्स जैसे तकनीकी कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई छात्र तो प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा का संयोजन चुन रहे हैं ताकि भविष्य के रोजगार बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सके।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता, विश्लेषण क्षमता और निरंतर सीखने की योग्यता किसी भी पेशेवर की सबसे बड़ी ताकत होगी।
आगे पढ़ें (Part 2 में)
- AI के दौर में सबसे ज्यादा डिमांड वाले 10 कोर्स
- भारत और विदेश में संभावित करियर विकल्प
- किन क्षेत्रों में मिल सकती है सबसे ज्यादा सैलरी?
- 12वीं के बाद कौन-सा कोर्स चुनें?
- ग्रेजुएशन के बाद कौन-सी पढ़ाई रहेगी फायदेमंद?
- क्या AI डॉक्टर, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की नौकरी भी बदल देगा?




