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क्या चश्मा सच में उतर सकता है? वायरल 16 घरेलू नुस्खों का सच

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भोपाल। सोशल मीडिया पर इन दिनों आंखों की रोशनी बढ़ाने और यहां तक कि किसी भी नंबर का चश्मा उतारने का दावा करने वाला एक लंबा संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसमें विटामिन-ए की कमी, मोबाइल-कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल और आंखों की देखभाल न करने को कमजोर नजर का कारण बताया गया है। साथ ही जलनेति, घी की मालिश, बादाम-सौंफ, गुलाबजल, आंवला, तांबे का पानी, आंखों की एक्सरसाइज और यहां तक कि आंखों में अपनी लार लगाने जैसे कई उपाय सुझाए गए हैं।

लेकिन क्या वाकई इन घरेलू नुस्खों से चश्मे का नंबर कम या खत्म किया जा सकता है? मेडिकल विज्ञान के उपलब्ध प्रमाण इस दावे का समर्थन नहीं करते।

Myth 1: विटामिन-A की कमी ही चश्मा लगने की मुख्य वजह है

तथ्य: विटामिन-A आंखों के स्वास्थ्य के लिए निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। इसकी गंभीर कमी से xerophthalmia और रात में कम दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं तथा गंभीर मामलों में दृष्टि को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन हर व्यक्ति को चश्मा लगने का कारण विटामिन-A की कमी नहीं है।

चश्मे का नंबर अक्सर refractive error यानी आंख की लंबाई या कॉर्निया और लेंस के आकार/फोकस से जुड़ी समस्या के कारण होता है। मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया, एस्टिग्मेटिज्म और उम्र के साथ होने वाला प्रेसबायोपिया इसके प्रमुख प्रकार हैं।

Myth 2: मोबाइल या कंप्यूटर देखने से चश्मा जरूर लग जाता है

तथ्य: लंबे समय तक स्क्रीन या अन्य नजदीकी काम करने से आंखों में थकान, सूखापन और असहजता हो सकती है। खासकर बच्चों में बहुत अधिक near-work और बाहर कम समय बिताना मायोपिया के विकास और बढ़ने से जुड़ा हुआ है। लेकिन यह कहना कि मोबाइल देखने से हर व्यक्ति को चश्मा लग जाएगा, सही नहीं है।

बच्चों के लिए दिन में पर्याप्त समय प्राकृतिक रोशनी में बाहर बिताना और लगातार नजदीकी काम के बीच नियमित ब्रेक लेना आंखों के लिए उपयोगी आदतें हैं। WHO बच्चों में लगभग 90 मिनट प्रतिदिन दिन के उजाले में बाहर रहने और near-work के दौरान नियमित ब्रेक की सलाह देता है।

Myth 3: आंखों की एक्सरसाइज से चश्मे का नंबर उतर जाएगा

तथ्य: आंखों को कुछ समय के लिए आराम देने वाली गतिविधियां आंखों की थकान या असहजता कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इससे मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया या एस्टिग्मेटिज्म का चश्मे का नंबर खत्म हो जाने का प्रमाण नहीं है।

चश्मे का नंबर आंख के optical system से जुड़ी समस्या है। इसलिए केवल आंखों को गोल-गोल घुमाने, हथेलियां आंखों पर रखने या किसी अन्य exercise से refractive error के खत्म होने की उम्मीद करना उचित नहीं है।

Myth 4: बादाम, सौंफ, मिश्री, आंवला या अंगूर खाने से चश्मा उतर सकता है

तथ्य: संतुलित और पौष्टिक भोजन आंखों सहित पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। बादाम, फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन किसी विशेष खाद्य पदार्थ को खाने से आंख की लंबाई या कॉर्निया का आकार बदलकर चश्मे का नंबर समाप्त हो जाएगा—ऐसा प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए “7 बादाम खाइए और चश्मा उतारिए” जैसे दावों को वैज्ञानिक उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Myth 5: गुलाबजल, नींबू, धनिया या आंवले का पानी आंखों में डालना सुरक्षित है

तथ्य: यह दावा विशेष रूप से सावधानी की मांग करता है।

सोशल मीडिया संदेश में गुलाबजल, नींबू-गुलाबजल, धनिया-चीनी के मिश्रण और अन्य घरेलू तैयारियों को आई ड्रॉप की तरह आंखों में डालने की सलाह दी गई है। ऐसा बिना नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।

आंखों में डालने वाली दवाओं और ड्रॉप्स का sterile होना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंखों में सीधे जाने वाले उत्पाद शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को bypass करते हैं और दूषित होने पर गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा कर सकते हैं। FDA ने contaminated/non-sterile eye drops के कारण संक्रमण और कुछ मामलों में दृष्टि को गंभीर नुकसान के जोखिम की चेतावनी दी है।

इसलिए घर में बनाया हुआ कोई भी मिश्रण, नींबू, गुलाबजल, धनिया, शहद या अन्य पदार्थ आंखों में डालना आंखों की रोशनी बढ़ाने का प्रमाणित तरीका नहीं है।

Myth 6: सुबह की लार आंखों में लगाने से छह महीने में चश्मा उतर जाता है

तथ्य: इस दावे का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक आधार नहीं है। उलटे आंखों में गैर-sterile पदार्थ डालने से संक्रमण का जोखिम पैदा हो सकता है। आंखों में कुछ भी डालने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह नेत्र-उपयोग के लिए सुरक्षित और sterile हो।

Myth 7: पैरों के तलवों या कनपटी पर घी/अखरोट का तेल लगाने से चश्मा उतर सकता है

तथ्य: पैरों के तलवों या आंखों के आसपास तेल लगाने से refractive error ठीक होने या चश्मे का नंबर समाप्त होने का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे चश्मे का विकल्प मानना उचित नहीं होगा।

फिर आंखों की सही देखभाल कैसे करें?

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल और प्रमाण-आधारित आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • बच्चों को नियमित रूप से दिन के उजाले में बाहर खेलने/समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या पढ़ाई के दौरान नियमित ब्रेक लें।
  • स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय आंखों में थकान या सूखापन महसूस हो तो विराम लें।
  • बच्चों और वयस्कों की आवश्यकता के अनुसार नियमित नेत्र जांच कराएं।
  • डॉक्टर द्वारा बताए गए नंबर का चश्मा नियमित रूप से पहनें। चश्मा पहनने से आंखें कमजोर नहीं होतीं।
  • संतुलित आहार लें और पोषण संबंधी कमी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
  • आंखों में किसी भी घरेलू पदार्थ या गैर-प्रमाणित ड्रॉप को डालने से बचें।

चश्मा हटाने का दावा क्यों भ्रामक हो सकता है?

मायोपिया जैसी refractive errors में आंख का आकार इस तरह बदल जाता है कि प्रकाश रेटिना पर सही जगह फोकस नहीं कर पाता। चश्मा इस optical error को ठीक करके दृष्टि को स्पष्ट करता है। उपलब्ध चिकित्सा जानकारी के अनुसार refractive errors को चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस या कुछ मामलों में सर्जरी से correct किया जा सकता है।

इसलिए “चाहे चश्मा कितने भी नंबर का हो, यह घरेलू नुस्खा अपनाकर चश्मा उतर जाएगा” जैसा दावा वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तेजी से फैलती है, लेकिन हर वायरल संदेश चिकित्सा सलाह नहीं होता। आंखों के मामले में विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत घरेलू प्रयोग से लाभ के बजाय नुकसान भी हो सकता है।

अगर नजर धुंधली हो रही है, चश्मे का नंबर तेजी से बदल रहा है, आंखों में दर्द/लालिमा है या अचानक दृष्टि में कमी आई है, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है।

Karobarsamachar.com की अपील: स्वास्थ्य संबंधी किसी भी वायरल दावे को आगे भेजने से पहले उसके स्रोत और वैज्ञानिक प्रमाण की जांच जरूर करें। आंखें अनमोल हैं—उन पर बिना प्रमाण के प्रयोग न करें।

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