नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। अशोका यूनिवर्सिटी की आयरन पिलर इनिशिएटिव इन ग्लोबल लर्निंग (IGL) ने वेंचर कैपिटल फर्म आयरन पिलर (Iron Pillar) के साथ मिलकर “इंडिया-जापान इकोनॉमिक कॉरिडोर: टेक्नोलॉजी, फाइनेंस एंड द फ्यूचर ऑफ द इंडो-पैसिफिक” शीर्षक से नई रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट टोक्यो के इंटरनेशनल हाउस ऑफ जापान में लॉन्च की गई, जिसमें भारत और जापान के लगभग 60 नीति-निर्माता, निवेशक, राजनयिक, शिक्षाविद और उद्यमी शामिल हुए।
रिपोर्ट का विमोचन जुलाई 2026 में हुए 16वें इंडिया-जापान एनुअल समिट के बाद हुआ है, जिसमें दोनों देशों ने 2035 तक भारत में जापानी प्राइवेट सेक्टर निवेश का लक्ष्य ¥10 ट्रिलियन तय किया था। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में जापान अपनी कुल आयात का 1 प्रतिशत से भी कम भारत से करता है और जापान के कुल आउटबाउंड निवेश में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है, जो रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के बीच अंतर को दर्शाता है।
प्रमुख योगदानकर्ता और कार्यक्रम की मुख्य बातें
कार्यक्रम की शुरुआत आयरन पिलर के मैनेजिंग पार्टनर आनंद प्रसन्ना और वाइस प्रेसिडेंट अर्चिष मित्तल के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने रिपोर्ट के विजन को साझा किया कि कैसे दोनों देशों के संबंध रणनीतिक से आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग की ओर बढ़ सकते हैं। नॉर्वेजियन दार्शनिक और स्कैंडेनेविया जापान ससाकावा फाउंडेशन के वाइस चेयर डॉ. हेनरिक साइस ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सीमा-पार संवाद की अहमियत पर बल दिया गया।
रिपोर्ट में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, निवेशकों, उद्यमियों और उद्योग नेताओं के 27 स्वतंत्र विचार शामिल हैं, जिनमें आनंद प्रसन्ना, अर्चिष मित्तल, अशोक धवन (फाउंडिंग चेयरपर्सन, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, अशोका यूनिवर्सिटी), प्रो. के. विजय राघवन (चेयर, साइंस एडवाइजरी काउंसिल, अशोका यूनिवर्सिटी एवं भारत सरकार के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार), डॉ. प्राची मिश्रा (डीन, अशोका स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एवं डायरेक्टर, अशोका आइजैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी) और डॉ. हेनरिक साइस शामिल हैं। रिपोर्ट की भूमिका नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन एमेरिटस माइकल ए. स्पेंस ने लिखी है।
टेक्नोलॉजी, टैलेंट और सप्लाई चेन पर फोकस
रिपोर्ट में भारत और जापान के बीच फाइनेंस, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, इनोवेशन और टैलेंट के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं रेखांकित की गई हैं। इसमें प्राइवेट कैपिटल, सेमीकंडक्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक, स्पेस और वर्कफोर्स मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जापान की पूंजी, तकनीक और औद्योगिक विशेषज्ञता तथा भारत की युवा कार्यशक्ति, विकास की संभावना और पूंजी की मांग दोनों देशों के लिए पूरक हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल पूंजी पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत मध्यस्थ, बेहतर टैलेंट मोबिलिटी, स्पष्ट डिलीवरी मैकेनिज्म और संस्थागत स्थिरता जरूरी है। साथ ही, वैश्विक आर्थिक बदलावों के मद्देनजर मजबूत सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।
संस्थागत साझेदारी और भविष्य की योजनाएं
इवेंट में एशियन डेवलपमेंट बैंक इंस्टीट्यूट (ADBI) और अशोका यूनिवर्सिटी के बीच साझेदारी की घोषणा भी की गई, जिसका उद्देश्य भारत और जापान के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है। आयरन पिलर इनिशिएटिव इन ग्लोबल लर्निंग, जो 28 सितंबर 2026 को स्थापित हुई, का मकसद शिक्षाविदों, संस्थाओं, प्रैक्टिशनर्स और छात्रों के बीच स्थायी संबंध बनाना, रिसर्च, इंटर्नशिप और अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज को बढ़ावा देना है।
अर्चिष मित्तल, वाइस प्रेसिडेंट, आयरन पिलर और को-चेयर, आयरन पिलर इनिशिएटिव इन ग्लोबल लर्निंग, अशोका यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत और जापान के बीच इरादे से लेकर स्थायी सहयोग तक के रास्ते पर विभिन्न दृष्टिकोणों को जोड़ती है। प्रो. के. विजय राघवन, चेयर, साइंस एडवाइजरी काउंसिल, अशोका यूनिवर्सिटी और को-चेयर, इनिशिएटिव ने दोनों देशों के शोधकर्ताओं, व्यवसायों, निवेशकों और युवा टैलेंट के लिए मजबूत रास्ते बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
‘मिसिंग मिडिल’ और टैलेंट मोबिलिटी पर जोर
रिपोर्ट में सरकार-प्रेरित ढांचों और बड़े कॉरपोरेट्स के बीच मौजूद ‘मिसिंग मिडिल’ को संबोधित करने की जरूरत बताई गई है। इसमें फंड मैनेजर, मध्यस्थ, स्टार्टअप, मिड-साइज सप्लायर्स और संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है, ताकि द्विपक्षीय इरादों को वाणिज्यिक, निवेश और शोध साझेदारी में बदला जा सके। साथ ही, रिपोर्ट में दोनों देशों के छात्रों, शोधकर्ताओं, कुशल पेशेवरों और उद्यमियों की आवाजाही बढ़ाने और शिक्षा, शोध एवं वर्कफोर्स लिंक को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
इंडिया-जापान इकोनॉमिक कॉरिडोर रिपोर्ट आयरन पिलर इनिशिएटिव इन ग्लोबल लर्निंग की पहली उपलब्धियों में से एक है, और आगे रिसर्च सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की योजना है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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