मुंबई, 13 अक्टूबर। पीएल कैपिटल (PL Capital) ने भारतीय शेयर बाजारों पर बढ़ते मैक्रोइकॉनॉमिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के मद्देनजर निफ्टी (NIFTY) का 12 महीने का नया लक्ष्य 27,589 तय किया है, जो पहले के 27,133 के अनुमान से अधिक है। यह आकलन कंपनी की नवीनतम इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट “द परफेक्ट स्टॉर्म: राइजिंग मैक्रो एंड जियोपॉलिटिकल रिस्क्स” में जारी किया गया।
ब्रोकरेज के अनुसार, निफ्टी में पिछले छह सप्ताह में 8.2 प्रतिशत और वर्ष की शुरुआत से अब तक 6 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे भारत प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल हो गया है। पीएल कैपिटल ने इस गिरावट का कारण लगातार एफआईआई (FII) बिकवाली, 13 प्रतिशत मानसून घाटा, कमोडिटी कीमतों में वृद्धि, उच्च बॉन्ड यील्ड और ईरान-अमेरिका संघर्ष से पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र पर पड़ रहे असर को बताया।
मुद्रास्फीति और मानसून घाटे की चिंता
रिपोर्ट में बताया गया कि मानसून सीजन 13 प्रतिशत वर्षा घाटे के साथ समाप्त हुआ, जिससे 36 में से 17 मौसम विज्ञान उपखंड और भारत के 42 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र प्रभावित हुए। जलाशयों में पानी पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत कम है, जिससे मिट्टी की नमी और आगामी रबी फसल सीजन को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीएल कैपिटल ने चेतावनी दी कि यदि मजबूत एल नीनो प्रभाव जारी रहा तो वैश्विक कृषि उत्पादन में और बाधा आ सकती है, जिससे सोयाबीन, कॉफी, कोको और पाम ऑयल जैसी प्रमुख कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत की मुद्रास्फीति टोकरी में खाद्य पदार्थों का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत है, ऐसे में कंपनी ने मुद्रास्फीति दबाव बने रहने की संभावना जताई।
पीएल कैपिटल ने मौद्रिक नीति समर्थन में कमी की ओर भी इशारा किया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर 5.50 प्रतिशत कर दिया है, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि है, साथ ही ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख अपनाया गया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 5.2 प्रतिशत किया है, जिसमें तीसरी तिमाही में 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत की संभावना जताई गई है। ब्रोकरेज ने आगाह किया कि यदि कच्चे तेल और कृषि जिंसों की कीमतें ऊंची रहीं और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा बनी रही तो आगे और दर बढ़ोतरी संभव है।
बाजार दृष्टिकोण और सेक्टर वरीयता
पीएल कैपिटल ने तेल एवं गैस को छोड़कर दूसरी तिमाही वित्त वर्ष 2027 के लिए 16.2 प्रतिशत बिक्री वृद्धि और 14.7 प्रतिशत ईबिट्डा (EBITDA) वृद्धि का अनुमान जताया है। अपनी कवरेज यूनिवर्स में कंपनी ने 24.1 प्रतिशत बिक्री वृद्धि, 10.4 प्रतिशत ईबिट्डा वृद्धि और 8.6 प्रतिशत प्रॉफिट बिफोर टैक्स वृद्धि का अनुमान दिया है। हालांकि, 27 में से 16 इंडस्ट्री सेगमेंट्स में ऊंची लागत पर खरीदे गए इन्वेंट्री के कारण ईबिट्डा मार्जिन में गिरावट देखी जा रही है।
ब्रोकरेज ने कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर, बैंकिंग, मेटल्स, डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल्स, टेलीकॉम और पोर्ट्स सेक्टर पर ओवरवेट रुख बरकरार रखा है, जबकि ऑटोमोबाइल, आईटी सर्विसेज, कंज्यूमर और ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अंडरवेट रुख रखा है। पीएल कैपिटल ने कहा कि घरेलू निवेश और क्रेडिट ग्रोथ से जुड़े सेक्टरों में अवसर मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा बाजार सुधार के बीच चयनात्मक स्टॉक चुनना जरूरी है।
मूल्यांकन और विदेशी निवेशक प्रवाह
पीएल कैपिटल का 12 महीने का निफ्टी लक्ष्य 27,589 सितंबर 2028 की आय अनुमानों और 19.2x के 15-वर्षीय औसत प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल पर 12 प्रतिशत छूट के आधार पर है। निफ्टी फिलहाल एक साल आगे की आय पर 15.5x के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो 15-वर्षीय औसत से 19.3 प्रतिशत कम है। बियर केस में कंपनी ने निफ्टी का लक्ष्य 22,044 बताया है, जिससे आगे और गिरावट की संभावना बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर समायोजित रिटर्न कम होने से भारतीय शेयर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो गए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स पर 5.3 प्रतिशत यील्ड मिल रही है, जबकि निफ्टी 100 इंडेक्स ने पिछले पांच वर्षों में औसतन 1.2 प्रतिशत रिटर्न दिया है। सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों में सीमित भागीदारी से विदेशी पूंजी प्रवाह और सीमित हो सकता है।
विशेषज्ञ की राय
पीएल कैपिटल के को-हेड – इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज, अमनिश अग्रवाल ने कहा, “भारतीय शेयर बाजार बढ़ती मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के चुनौतीपूर्ण मेल का सामना कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “घरेलू आर्थिक गतिविधि और कॉरपोरेट डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन कमजोर मानसून, मजबूत एल नीनो और ऊंची कमोडिटी कीमतों का असर आगामी तिमाहियों में खपत और आय पर पड़ सकता है।” अग्रवाल ने यह भी आगाह किया कि आकर्षक मूल्यांकन के बावजूद बाजार में त्वरित रिकवरी की संभावना कम है और कंसोलिडेशन से पहले और कमजोरी आ सकती है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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