हैदराबाद, 21 अक्टूबर। रोटरी क्लब ऑफ वन हैदराबाद (Rotary Club of One Hyderabad) ने ‘Sanitation: A Super Vaccine’ विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन द लीला, बंजारा हिल्स में किया, जिसमें सैनिटेशन को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने के लिए निवेश, नवाचार और व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
क्लब के चार्टर प्रजेंटेशन समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भारत में सैनिटेशन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, किफायती तकनीकों और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग की आवश्यकता बताई।
जिम्मेदारी और स्पष्टता की जरूरत
डॉ. टी. के. श्रीदेवी, आईएएस, सचिव, नगर प्रशासन विभाग एवं आयुक्त और निदेशक, नगर प्रशासन (CDMA), तेलंगाना सरकार ने कहा कि स्वच्छता को महत्व तो दिया जाता है, लेकिन जिम्मेदारी की अस्पष्टता के कारण सैनिटेशन के प्रयास पीछे रह जाते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सैनिटेशन पर दिए गए जोर का उल्लेख किया और कहा कि स्वतंत्रता के बाद से आर्थिक विकास को सैनिटेशन पर प्राथमिकता दी गई है। डॉ. श्रीदेवी ने ‘फ्लश एंड फॉरगेट’ मानसिकता से बाहर निकलने, निवेश बढ़ाने और सतत व्यवहार परिवर्तन की जरूरत बताई। साथ ही रोटरी की जागरूकता बढ़ाने में भूमिका को रेखांकित किया।
रोकथाम के उपाय के रूप में सैनिटेशन
डॉ. जेलालेम बिरहानु तफेसे, चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस, यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) ने सैनिटेशन को ‘सुपर वैक्सीन’ बताया, जो बीमारियों से बचाव और समुदायों की सुरक्षा में वैक्सीन जैसी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पोलियो के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में रोटरी के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार में रोटरी ने 7,000 से अधिक स्वयंसेवकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में लगाया।
नवाचार और विकेंद्रीकृत समाधान
विवेक पांडे, वॉश प्रोफेशनल और गेट्स फाउंडेशन (Gates Foundation) के सलाहकार ने बताया कि पिछले 160 वर्षों में सैनिटेशन तकनीकों में ठहराव रहा है। उन्होंने विकेंद्रीकृत वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट की वकालत की और लुंबिनी पार्क, हैदराबाद में स्थापित ReFlow Model टॉयलेट का उदाहरण दिया, जहां ऑन-साइट वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और पुनः उपयोग किया जाता है, जिससे पारंपरिक सीवरेज सिस्टम पर निर्भरता कम होती है और ताजे पानी की बचत होती है।
विकास लक्ष्यों पर सैनिटेशन का प्रभाव
रोहित चंद्रगिरि, फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO), ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन ने बताया कि सैनिटेशन संयुक्त राष्ट्र के 169 सतत विकास लक्ष्यों में से 130 लक्ष्यों को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि सैनिटेशन का सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छ जल, लैंगिक समानता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मानव गरिमा पर गहरा असर है।
आवासीय समुदायों में सतत प्रथाएं
गिरीश मल्लपानी, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, एमपीएम ग्रुप (MPM Group) ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से आवासीय परियोजनाओं में प्रभावी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स और वेस्टवॉटर प्रबंधन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने घर खरीदने वालों को सलाह दी कि वे बिल्डरों से सुविधाओं के साथ-साथ वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट योजनाओं की भी जानकारी लें। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार वेस्टवॉटर प्रबंधन सतत विकास का अभिन्न हिस्सा है।
कर्नल एम. चंदन कुमार, प्रमुख इंजीनियरिंग, टी-वर्क्स (T-Works) ने किफायती और स्केलेबल सैनिटेशन तकनीकों की जरूरत बताई और नवाचार तथा व्यापक क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने का आह्वान किया।
जिला गवर्नर उदय पिलानी, रोटरी जिला 3150 ने सैनिटेशन के लिए सामूहिक प्रयासों को जुटाने में रोटरी की प्रतिबद्धता दोहराई और सार्वजनिक जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन तथा सरकार, उद्योग, नागरिक समाज और समुदायों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि सतत प्रगति के लिए अवसंरचना, तकनीक, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, व्यवहार परिवर्तन और संस्थागत सहयोग का समग्र दृष्टिकोण जरूरी है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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