पुणे, 14 अक्टूबर। मणिपाल हॉस्पिटल्स मॉमस्टोरी (Manipal Hospitals Momstory), पुणे में सड़क दुर्घटना में गंभीर मस्तिष्क और पेट की चोटें झेलने वाले छह और पांच वर्षीय दो भाइयों को बहु-विषयक चिकित्सा देखभाल के बाद नया जीवन मिला है। अस्पताल अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
दोनों भाई अपने दादा के साथ दोपहिया वाहन पर सवार थे, जब दुर्घटना हुई। मौके पर ही दादा की मृत्यु हो गई, जबकि बच्चों को तुरंत अस्पताल लाया गया, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सहायता समय पर मिल सकी।
चोटों का विवरण और प्रारंभिक इलाज
छह वर्ष और दो महीने के बड़े भाई को गंभीर मस्तिष्क आघात, बाएं फ्रंटोपैराइटल क्षेत्र में डिप्रेस्ड फ्रैक्चर, ब्रेन कंट्यूजन और डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी थी। उनका ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) स्कोर 7 था, जो न्यूरोलॉजिकल स्थिति की गंभीरता दर्शाता है। उन्हें पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में न्यूरोक्रिटिकल केयर और मॉनिटरिंग की आवश्यकता पड़ी।
डॉ. गणेश बाडगे, पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट और PICU प्रभारी, मणिपाल हॉस्पिटल्स मॉमस्टोरी ने बताया कि प्राथमिक फोकस मस्तिष्क को आगे की क्षति से बचाने, ऑक्सीजन, रक्तचाप, वेंटिलेटरी सपोर्ट, दौरे की रोकथाम और फ्लूइड-इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने पर था। पहले दो हफ्तों में न्यूरोलॉजिकल रिकवरी धीमी रही और बच्चे को सेरेब्रल सॉल्ट वेस्टिंग की समस्या हुई, जिसके लिए लगातार निगरानी और उपचार में बदलाव किए गए। गहन न्यूरो-फिजियोथेरेपी और पोषण संबंधी सहायता भी दी गई।
रिकवरी और पुनर्वास प्रक्रिया
तीसरे सप्ताह तक बड़े भाई ने उद्देश्यपूर्ण गतिविधियां दिखाना शुरू किया, परिवार के सदस्यों को पहचाना और बोलचाल में सुधार आया। लगभग चार सप्ताह के अस्पताल प्रवास के बाद उन्हें छुट्टी दी गई, जिसमें निरंतर न्यूरोक्रिटिकल केयर और पुनर्वास का बड़ा योगदान रहा।
पांच वर्षीय छोटे भाई को पेट में गंभीर चोटें आईं, जिनमें ग्रेड III लिवर इंजरी, ग्रेड IV स्प्लीन इंजरी, किडनी प्रभावित होना और हेमोपेरिटोनियम शामिल था। वे शॉक की स्थिति में पहुंचे और काफी रक्तस्राव था। उन्हें तुरंत इंट्रावेनस फ्लूइड्स, रक्त उत्पाद और सर्कुलेटरी सपोर्ट देकर पुनर्जीवित किया गया। पीडियाट्रिक सर्जरी टीम के प्रमुख डॉ. जयेश देसाले के नेतृत्व में उनकी स्थिति स्थिर होने के बाद कंजर्वेटिव मैनेजमेंट अपनाया गया और आपातकालीन सर्जरी से बचा गया।
रूढ़िवादी उपचार और परिणाम
छोटे भाई की स्थिति लगातार PICU निगरानी में सुधरती रही। लगभग एक सप्ताह बाद उन्हें स्थिर हालत में छुट्टी दी गई। अस्पताल प्रवास के दौरान रक्तस्राव या स्थिति बिगड़ने की पुनरावृत्ति नहीं हुई।
डॉ. जयेश देसाले, पीडियाट्रिक सर्जन, मणिपाल हॉस्पिटल्स मॉमस्टोरी ने कहा, “चयनित बच्चों में ठोस अंगों की चोटों के मामलों में गैर-सर्जिकल उपचार से अंगों को बिना अतिरिक्त सर्जरी जोखिम के ठीक होने का मौका मिलता है। इस मामले में सतत निगरानी और समय पर हस्तक्षेप से बिना ऑपरेशन के सुरक्षित इलाज संभव हुआ।”
मेडिकल टीम और व्यापक संदेश
इन मामलों का प्रबंधन डॉ. गणेश बाडगे, डॉ. संदीप पाटिल (पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट), डॉ. विशाल रोकड़े (न्यूरोसर्जन), डॉ. जयेश देसाले के साथ डॉ. मीनाक्षी, डॉ. हर्षाली, डॉ. स्वप्निल, डॉ. फुरकान और डॉ. निखिल तथा नर्सिंग, पुनर्वास और PICU टीम ने किया।
अस्पताल ने कहा कि ये मामले बच्चों में सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर और विविध परिणामों को रेखांकित करते हैं, साथ ही सकारात्मक परिणामों के लिए शीघ्र मूल्यांकन, त्वरित स्थिरीकरण और निरंतर पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर की आवश्यकता को भी उजागर करते हैं।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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