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पीएल वेल्थ ने कच्चे तेल और एल नीनो जोखिमों को किया चिन्हित

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मुंबई, 22 अक्टूबर। पीएल वेल्थ (PL Wealth) की ताजा मार्केट आउटलुक रिपोर्ट में भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती, एफपीआई निवेश की वापसी और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में मजबूत शुरुआत की ओर ध्यान दिलाया गया है। हालांकि, कंपनी ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, एल नीनो के असर और वैश्विक ब्याज दरों की अनिश्चितता को निकट भविष्य में अस्थिरता के कारक बताया है और निवेशकों को चुनिंदा इक्विटी तथा फिक्स्ड इनकम रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में क्रमशः 9.2 प्रतिशत और 10.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं जुलाई 2026 तक नॉन-फूड बैंक क्रेडिट में सालाना 19.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

मुद्रास्फीति और नीति दर का परिदृश्य

जुलाई 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 4.45 प्रतिशत और खाद्य मुद्रास्फीति 5.52 प्रतिशत रही। पीएल वेल्थ ने बताया कि 26 अगस्त 2026 तक मानसून में 13 प्रतिशत की कमी और खरीफ फसल की बुवाई सामान्य से 2 प्रतिशत कम होने के कारण मुद्रास्फीति अनुमान से अधिक रह सकती है। अगस्त में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें औसतन 90-93 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहीं। कंपनी ने कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की स्थिति के आधार पर वित्त वर्ष 27 की तीसरी या चौथी तिमाही में 25-50 बेसिस प्वाइंट की नीति दर वृद्धि की संभावना जताई है।

इंदरबीर जॉली, सीईओ, पीएल वेल्थ ने कहा, “भारत की विकास गति और विदेशी निवेशकों की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक है, लेकिन ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, मानसून जोखिम और वैश्विक ब्याज दरों की अनिश्चितता के चलते निवेशकों को सतर्कता बरतनी चाहिए। निवेशकों को चयनात्मक रहना चाहिए, गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए और निवेश को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न अवधियों में तैनात करना चाहिए।”

इक्विटी बाजार और सेक्टर प्रदर्शन

अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में मिश्रित रुख रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने मजबूती दिखाई, जबकि निफ्टी 50 पर दबाव रहा, जो 26 अगस्त को 24,208 पर बंद हुआ। 31 अगस्त 2026 तक निफ्टी मिडकैप 150 में सालाना 13.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि निफ्टी 50 में इसी अवधि में 1.4 प्रतिशत की गिरावट रही।

पीएल रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में (तेल और गैस को छोड़कर) कंपनियों के मुनाफे में सालाना 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो चौथी तिमाही वित्त वर्ष 24 के बाद सबसे अधिक है और अनुमान से 2.6 प्रतिशत अधिक है। बैंकिंग, धातु, टेलीकॉम और हेल्थकेयर सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, हालांकि उच्च इनपुट लागत से आगे मार्जिन पर दबाव रह सकता है। निफ्टी 24,208 पर एक साल आगे की कमाई के आधार पर 17.3 गुना पी/ई पर ट्रेड कर रहा है, जो 15 साल के औसत 19.6 के मुकाबले 11.7 प्रतिशत कम है। पीएल रिसर्च ने अगले 12 महीनों के लिए निफ्टी का बेस केस लक्ष्य 27,123 रखा है।

पीएल वेल्थ ने निकट भविष्य में लार्ज और मिडकैप रणनीतियों में चरणबद्ध निवेश की सिफारिश की है और मध्यम अवधि में बड़े निजी बैंक, कैपिटल गुड्स, ड्यूरेबल कंजम्पशन, चुनिंदा क्वालिटी स्मॉलकैप, फ्लेक्सीकैप और मल्टीकैप रणनीतियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। दीर्घकालिक सकारात्मक दृष्टिकोण घरेलू पूंजी निवेश, जनसांख्यिकी, वित्तीय गहराई, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और विकास क्षमता पर आधारित है।

फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी आउटलुक

फिक्स्ड इनकम को लेकर पीएल वेल्थ ने मुद्रास्फीति और नीति दर की अनिश्चितता के चलते सतर्क रुख अपनाया है। अगस्त में आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा। एफसीएनआर डिपॉजिट चैनल, जिससे 100 अरब डॉलर आये, बंद होने के बाद तरलता बढ़ी है और यील्ड कर्व के शॉर्ट एंड को स्थिरता मिली है। कंपनी ने 3 महीने से 3 साल तक की अल्पकालिक साधनों को प्राथमिकता दी है, जहां सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट पर 7.0-7.5 प्रतिशत और कमर्शियल पेपर पर 7.3-7.8 प्रतिशत यील्ड मिल रही है। अगस्त के बाद 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड लगभग 6.72 प्रतिशत रही, जबकि फेयर वैल्यू का अनुमान 6.75-6.90 प्रतिशत है। पीएल वेल्थ 6.95 प्रतिशत से ऊपर के स्तर को ड्यूरेशन बढ़ाने का अवसर मानती है, लेकिन वित्त वर्ष 27 की दूसरी छमाही में संभावित दर वृद्धि से पहले मजबूत ड्यूरेशन मूव को जल्दबाजी मानती है।

सोना जुलाई में उछला और 4,100 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से ऊपर बंद हुआ। पीएल वेल्थ ने निकट भविष्य में सोने की कीमत 3,900-4,400 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहने का अनुमान जताया है, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीद से समर्थन मिल रहा है। चांदी 58-59 डॉलर प्रति औंस के दायरे में सीमित रही, जहां भौतिक बाजार में घाटा और ग्रीन टेक्नोलॉजी की मांग से समर्थन मिल रहा है, हालांकि स्थायी तेजी के लिए ईटीएफ में प्रवाह बढ़ना जरूरी है।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक

पीएल वेल्थ की सितंबर आउटलुक में चयनात्मक इक्विटी भागीदारी, चरणबद्ध पूंजी आवंटन और फिक्स्ड इनकम पर ध्यान देने की बात कही गई है। कच्चा तेल, मानसून और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरें अल्पकालिक जोखिम हैं, लेकिन कंपनी ने भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती और विकास की बुनियाद पर दीर्घकालिक सकारात्मक निवेश दृष्टिकोण बरकरार रखा है।

— कारोबार समाचार ब्यूरो


अस्वीकरण: यह समाचार संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है और इसे एआई टूल्स की सहायता से संपादित किया गया है। कारोबार समाचार विज्ञप्ति में किए गए दावों, आंकड़ों या बयानों की पुष्टि, समर्थन या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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