मुंबई, 24 अक्टूबर। प्रसिद्ध कवि गुलजार ने गोडरेज लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट 2026 के 17वें संस्करण में “एक शायर इस शहर में: ए पोएट्स लव लेटर टू हिज़ सिटी” सत्र में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने मुंबई से अपने रिश्ते पर चर्चा की और अपनी नई किताब आमची मुंबई: माय सिटी इन स्टोरीज एंड पोएम्स से रचनाएं पढ़ीं।
त्योहार के दूसरे दिन हुए इस सत्र में गुलजार के साथ विद्वान और अनुवादक रक्षंदा जलील तथा पटकथा लेखक-गीतकार कौसर मुनीर मौजूद थीं। कौसर मुनीर ने चर्चा का संचालन किया। बातचीत में मुंबई की बदलती पहचान, यहां के लोग, मौसम और प्रवासी अनुभव जैसे विषय शामिल रहे। गुलजार ने अपनी उर्दू रचनाओं का पाठ किया, जिनका अंग्रेजी अनुवाद डॉ. जलील ने किया है।
आमची मुंबई से झलकती संवेदनाएं
गुलजार ने अपनी किताब का शीर्षक “आमची मुंबई” रखने के पीछे का कारण बताया। उन्होंने कहा कि “मुंबई कोणाची? मुंबई आमची” नारा महाराष्ट्र की राजधानी को लेकर हुई बहसों में उभरा था। गुलजार ने मुंबई से अपने निजी जुड़ाव को साझा करते हुए कहा, “मैंने मुंबई से सीखा और बदला हूं। हमने मुंबई को भी बदला है। मैंने मुंबई की हवा में नमक का स्वाद चखा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में रहने का अनुभव उनकी लेखनी को आकार देता है। शहर के प्रति उनकी नजर कविताओं और कहानियों में मानवीय रूप ले लेती है।
गुलजार की आवाज़ का अनुवाद
रक्षंदा जलील, जिन्होंने आमची मुंबई का अंग्रेजी में अनुवाद किया है, ने गुलजार की विशिष्ट कल्पनाशीलता और आवाज को अनुवाद में उतारने की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि गुलजार की रचनाओं में बालसुलभता और कल्पनाशीलता झलकती है, और अनुवाद की प्रक्रिया “काफी चुनौतीपूर्ण” रही।
मुंबई की यथार्थवादी प्रस्तुति
कौसर मुनीर ने गुलजार की लेखनी में यथार्थवाद और राजनीतिक चेतना की चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह नया संग्रह मुंबई की वास्तविकता को दर्शाता है, न कि केवल उसकी रोमांटिक छवि को। उन्होंने बताया कि समाजवाद, पर्यावरण और यथार्थ जैसे विषय गुलजार की रचनाओं में स्पष्ट हैं।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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