हैदराबाद, 24 अक्टूबर। कलाकार ललिता कपिलावै ने अपनी चित्रकला प्रदर्शनी ‘कलाप्रयाणम् – कला, परंपराएं और आत्म-खोज की यात्रा’ का उद्घाटन शनिवार को हैदराबाद स्थित स्टेट आर्ट गैलरी में किया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में पहाड़ी, पिछवाई, मैसूर और तंजावुर चित्रकला परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती कृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर्नाटिक संगीतज्ञ डॉ. कोसुरु सेशु लता, जैगल के संस्थापक डॉ. राज एन. फणी और कैलिग्राफी कलाकार श्री परमेश्वर राजू की उपस्थिति में हुआ।
डॉ. विजय शर्मा द्वारा क्यूरेट
पद्मश्री सम्मानित और हिमाचल प्रदेश के चंबा के पहाड़ी मिनिएचर चित्रकार डॉ. विजय शर्मा ने इस प्रदर्शनी को क्यूरेट किया है। ललिता कपिलावै ने डॉ. शर्मा के मार्गदर्शन में पहाड़ी चित्रकला की तकनीकें और सूक्ष्म बारीकियां सीखी हैं।
भारतीय पारंपरिक कला रूपों का संगम
प्रदर्शनी में बसोहली शैली के बाद विकसित गूलर और कांगड़ा स्कूल की प्रेरित चित्रकला कृतियां शामिल हैं, जो पहाड़ी परंपरा का हिस्सा हैं। इसके अलावा पिछवाई, मैसूर और तंजावुर शैली की कृतियां भी प्रदर्शित हैं, जो अपनी विशिष्ट कलात्मकता और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती हैं।
कलाकार का दृष्टिकोण
ललिता कपिलावै, जो बचपन से ही संगीत और चित्रकला से जुड़ी रही हैं, ने कहा कि यह प्रदर्शनी उनके कलाकार के रूप में व्यक्तिगत सफर और विभिन्न चित्रकला परंपराओं के प्रभाव को दर्शाती है। “पारंपरिक कला रूप केवल हमारे अतीत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज भी इनका अभ्यास होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से मैं चाहती थी कि लोग इन परंपराओं को महसूस करें और इन चित्रों को बनाने में लगने वाली मेहनत और समर्पण को समझें,” उन्होंने कहा।
प्रदर्शनी की जानकारी
यह प्रदर्शनी 25 और 26 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक स्टेट आर्ट गैलरी, हैदराबाद में आम जनता के लिए खुली रहेगी। प्रवेश निःशुल्क है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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