मुंबई, 28 अक्टूबर। नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) की Q3 2026 कैपिटल मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले नौ महीनों में भारतीय रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश 31 प्रतिशत घटकर 1.66 अरब डॉलर रह गया, जबकि सौदों की संख्या 24 से बढ़कर 31 हो गई। इस बदलाव का मुख्य कारण घरेलू निवेशकों की भागीदारी में तेज वृद्धि रही, जो कुल निवेश का 85 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह 25 प्रतिशत थी। विदेशी निवेश में गिरावट देखी गई।
प्रत्येक सौदे का औसत आकार 47 प्रतिशत घटकर 5.3 करोड़ डॉलर रह गया, जिससे स्पष्ट है कि बड़े सौदों की कमी रही। 2026 के पहले नौ महीनों में पीई निवेश छह वर्षों के न्यूनतम स्तर पर रहा और निवेश तीनों तिमाहियों में समान रूप से वितरित हुआ, न कि एक ही तिमाही में केंद्रित।
घरेलू पूंजी का दबदबा
2026 के पहले नौ महीनों में घरेलू निवेशकों ने 1.42 अरब डॉलर का निवेश किया, जिसमें आवासीय क्षेत्र में 94 प्रतिशत, ऑफिस क्षेत्र में 81 प्रतिशत और वेयरहाउसिंग में एकमात्र सौदा शामिल है। विदेशी निवेशकों ने 0.24 अरब डॉलर का निवेश किया, जिसमें 92 प्रतिशत इक्विटी के रूप में लगाया गया। भारतीय पीई निवेश की हिस्सेदारी 9M 2025 के 25 प्रतिशत से बढ़कर 9M 2026 में 85 प्रतिशत हो गई, जबकि घरेलू निवेश 603 मिलियन डॉलर से बढ़कर 1.42 अरब डॉलर पहुंच गया। वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) और प्लेटफॉर्म-आधारित निवेश के विस्तार से घरेलू पूंजी के लिए नए रास्ते खुले हैं।
नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बजाजल ने कहा, “रियल एस्टेट निवेश की बदलती संरचना जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही प्रमुख संख्याएं। अब घरेलू पूंजी 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है और निवेशक प्रत्येक सौदे के आकार, संरचना और जोखिम को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं।”
ऑफिस और आवासीय निवेश का रुझान
ऑफिस सेगमेंट ने 1.18 अरब डॉलर आकर्षित किए, जो कुल पीई निवेश का 71 प्रतिशत है, हालांकि इसमें साल-दर-साल 19 प्रतिशत की गिरावट रही। तैयार ऑफिस परिसंपत्तियों ने ऑफिस निवेश का 78 प्रतिशत हिस्सा लिया, जो पिछले साल इसी अवधि में 49 प्रतिशत था। ऑफिस पूंजी का 88 प्रतिशत इक्विटी के रूप में लगाया गया। निवेशकों ने तैयार परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दी, जिससे आय के स्थिर स्रोत और कम विकास जोखिम पर ध्यान केंद्रित हुआ।
आवासीय निवेश 0.32 अरब डॉलर रहा, जिसमें साल-दर-साल 33 प्रतिशत की गिरावट आई। इस क्षेत्र में 97 प्रतिशत निवेश ऋण के रूप में और 83 प्रतिशत निर्माणाधीन परियोजनाओं में गया। Q3 2026 में आवासीय निवेश लगभग 0.19 अरब डॉलर रहा, जो नौ महीनों के कुल का लगभग 60 प्रतिशत है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) को आवासीय निवेश का 63 प्रतिशत मिला।
वेयरहाउसिंग और रिटेल सेक्टर की स्थिति
वेयरहाउसिंग क्षेत्र में 0.16 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो पूरी तरह Q3 2026 में एक ही तैयार परिसंपत्ति के सौदे के रूप में हुआ। रिटेल सेक्टर में 2026 के पहले नौ महीनों में कोई पीई निवेश नहीं हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 0.374 अरब डॉलर का निवेश हुआ था।
शहरवार निवेश और भविष्य की दिशा
शहरों में एनसीआर ने 0.568 अरब डॉलर (34 प्रतिशत) के निवेश के साथ नेतृत्व किया, इसके बाद पुणे में 0.356 अरब डॉलर (21 प्रतिशत), चेन्नई में 0.319 अरब डॉलर (19 प्रतिशत), मुंबई में 0.276 अरब डॉलर (17 प्रतिशत) और बेंगलुरु में 0.137 अरब डॉलर (8 प्रतिशत) निवेश हुआ। हैदराबाद और कोलकाता में इस अवधि में नगण्य या कोई पीई निवेश नहीं हुआ।
विदेशी बाजारों में उच्च रिटर्न की अपेक्षा और रुपये में गिरावट के कारण विदेशी निवेश प्रभावित हुआ, जबकि घरेलू निवेशकों ने मुद्रा जोखिम से मुक्त होकर वैकल्पिक घरेलू निवेश के मुकाबले अवसरों का आकलन किया। रियल एस्टेट क्रेडिट फंड आमतौर पर डेवलपर लेंडिंग पर प्रति वर्ष 15 से 18 प्रतिशत रिटर्न का लक्ष्य रखते हैं, जो 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड से लगभग 900 बेसिस प्वाइंट अधिक है। नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार, वैश्विक रिटर्न मानकों के ऊंचे बने रहने और विदेशी निवेशकों के चयनात्मक रुख के चलते, निजी इक्विटी निवेश परिसंपत्ति गुणवत्ता, जोखिम आवंटन और मुद्रा-समायोजित रिटर्न के प्रति संवेदनशील रहेगा।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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