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लंबी यात्रा और स्क्रीन टाइम से पीठ व गर्दन दर्द के मामले बढ़े: केयर हॉस्पिटल्स

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हैदराबाद, 15 अक्टूबर। केयर हॉस्पिटल्स (CARE Hospitals) के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबी यात्रा, खराब सड़कों और बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण हैदराबाद में कामकाजी पेशेवरों, कैब ड्राइवरों, डिलीवरी वर्कर्स और दोपहिया वाहन चालकों में पीठ और गर्दन दर्द के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह चेतावनी वर्ल्ड स्पाइन डे (16 अक्टूबर) से पहले दी गई है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि लगातार होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें और शुरुआती लक्षणों पर ही ध्यान दें।

केयर हॉस्पिटल्स के अनुसार, लो बैक पेन भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो हर उम्र और पेशे के लोगों को प्रभावित कर रही है। रीढ़ की समस्याएं आमतौर पर उम्र बढ़ने से जुड़ी मानी जाती हैं, लेकिन अब युवा भी लंबे समय तक बैठने, शारीरिक निष्क्रियता और खराब मुद्रा के कारण बार-बार पीठ दर्द का सामना कर रहे हैं।

यात्रा और सड़क की स्थिति का असर

डॉक्टरों ने बताया कि गड्ढों और स्पीड ब्रेकर्स वाली सड़कों पर बार-बार झटके और कंपन से पीठ दर्द बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें डिस्क संबंधी समस्या है। दोपहिया वाहन चालकों को ऊबड़-खाबड़ सड़कों का अधिक सामना करना पड़ता है, जबकि कार और कैब ड्राइवरों को लंबे समय तक बैठने से मांसपेशियों में अकड़न हो सकती है, खासकर जब कमर के लिए पर्याप्त सपोर्ट न हो।

डॉ. रंधीर कुमार, क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट – न्यूरोसर्जन, न्यूरोइंटरवेंशनिस्ट और एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जन, केयर हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स, हैदराबाद ने कहा कि पीठ पर दबाव ऑफिस पहुंचने से पहले ही शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक में लंबे समय तक रहना, खराब सड़कें और लगातार बैठना, खासकर दोपहिया वाहन चालकों और ड्राइवरों के लिए, पीठ और गर्दन दर्द को बढ़ा सकता है। डॉ. कुमार ने सलाह दी कि अगर दर्द बार-बार हो रहा है और काम या रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

स्क्रीन टाइम और मुद्रा की समस्या

आईटी पेशेवर जो रोजाना आठ से दस घंटे लैपटॉप पर काम करते हैं, अक्सर खराब मुद्रा और सीमित मूवमेंट के कारण गर्दन व पीठ दर्द के शिकार हो सकते हैं। बच्चों में भी मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, खासकर गर्दन झुकाकर लंबे समय तक देखने से, गर्दन में खिंचाव, कंधे में दर्द और मुद्रा संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। गलत सोने की मुद्रा, अनुपयुक्त तकिया और गद्दे का सपोर्ट न मिलना भी सुबह अकड़न और असहजता का कारण बन सकता है।

डॉ. प्रवीण गोपराजू, सीनियर कंसल्टेंट मिनिमली इनवेसिव और डिफॉर्मिटी स्पाइन सर्जन, केयर हॉस्पिटल्स, हाइटेक सिटी ने बताया कि ज्यादातर पीठ और गर्दन दर्द को दवा, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि कामकाजी लोग सही मुद्रा में बैठें, कमर को पर्याप्त सपोर्ट दें और नियमित रूप से मूवमेंट ब्रेक लें। वहीं, माता-पिता बच्चों को स्क्रीन टाइम कम करने और आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।

रोकथाम और शुरुआती इलाज के सुझाव

डॉक्टरों ने यात्रियों को सलाह दी कि वे आरामदायक ड्राइविंग पोजिशन रखें, बैठते समय बैक पॉकेट में भारी वस्तुएं न रखें और लंबी यात्रा के दौरान मूवमेंट ब्रेक लें। आईटी कर्मचारियों को लैपटॉप स्क्रीन उचित ऊंचाई पर रखने और लगातार बिना ब्रेक के काम न करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर पीठ दर्द के साथ पैरों में कमजोरी, कमर के आसपास सुन्नता या अचानक पेशाब या मल पर नियंत्रण खोने जैसी समस्याएं हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दुर्घटना के बाद तेज दर्द, बुखार या बिना वजह वजन कम होने पर भी तुरंत जांच करानी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लो बैक पेन दुनियाभर में विकलांगता का सबसे बड़ा कारण है। केयर हॉस्पिटल्स ने यात्रियों, कामकाजी पेशेवरों और माता-पिता से अपील की है कि वे शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानें, स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं और समय रहते डॉक्टर से सलाह लें, खासकर वर्ल्ड स्पाइन डे के मौके पर।

— कारोबार समाचार ब्यूरो


अस्वीकरण: यह समाचार संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है और इसे एआई टूल्स की सहायता से संपादित किया गया है। कारोबार समाचार विज्ञप्ति में किए गए दावों, आंकड़ों या बयानों की पुष्टि, समर्थन या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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