Bhopal। भारतीय खान-पान में पनीर का खास स्थान है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। घर से लेकर रेस्टोरेंट तक पनीर की कई तरह की डिश खूब पसंद की जाती हैं। लेकिन क्या हर बार प्लेट में परोसा जाने वाला पनीर वास्तव में दूध से बना पनीर ही होता है?
हाल के दिनों में ‘एनालॉग पनीर’ को लेकर चर्चा बढ़ी है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे दावे सामने आए हैं कि कुछ जगहों पर पारंपरिक डेयरी पनीर की जगह ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जिनमें दूध के कुछ या अधिकांश घटकों की जगह गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
यही वजह है कि उपभोक्ताओं के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि असली डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है।
सबसे पहले समझिए, एनालॉग पनीर क्या है?
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एफएसएसएआई के नियमों में ‘एनालॉग’ ऐसे उत्पादों को कहा जाता है, जिनमें डेयरी उत्पाद के किसी हिस्से को पूरी तरह या आंशिक रूप से गैर-डेयरी सामग्री से बदला गया हो।
ऐसे उत्पाद देखने, स्वाद और बनावट में डेयरी उत्पाद जैसे हो सकते हैं, लेकिन उनकी सामग्री पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग होती है।
यानी हर ऐसा उत्पाद जिसे देखने में पनीर जैसा समझ लिया जाए, जरूरी नहीं कि वह पारंपरिक दूध से बना पनीर ही हो।
एनालॉग पनीर में क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?
पारंपरिक पनीर दूध को फाड़कर बनाया जाता है। इसके लिए दूध में नींबू का रस, सिरका या अन्य खाद्य अम्ल का इस्तेमाल किया जाता है।
इसके विपरीत एनालॉग पनीर में उत्पाद की बनावट और स्वाद तैयार करने के लिए अलग-अलग गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें वनस्पति तेल, स्टार्च, मिल्क सॉलिड्स और खाद्य एडिटिव्स शामिल हो सकते हैं।
यही अंतर इसे पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग करता है।
सस्ता होने की वजह से बढ़ सकती है मांग
एनालॉग उत्पादों को लेकर चर्चा का एक प्रमुख कारण उनकी संभावित कम लागत है। डेयरी पनीर की तुलना में गैर-डेयरी सामग्री से तैयार उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।
रेस्टोरेंट और फूड सर्विस कारोबार में लागत एक महत्वपूर्ण कारक होती है। ऐसे में उपभोक्ता के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उसे जिस उत्पाद को पनीर के रूप में परोसा जा रहा है, वह वास्तव में किस सामग्री से बना है।
खास तौर पर बाहर खाना खाते समय उपभोक्ता के पास पैकेजिंग या सामग्री की सूची देखने का विकल्प भी अक्सर नहीं होता।
क्या एनालॉग पनीर सेहत के लिए नुकसानदायक है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। एनालॉग उत्पाद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह जहरीला या असुरक्षित है। उसका स्वास्थ्य प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल हुई है, उनकी मात्रा क्या है और उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
हालांकि, यदि किसी उत्पाद में अधिक मात्रा में अस्वास्थ्यकर वसा, विशेष रूप से ट्रांस फैट, या अन्य अवांछित सामग्री मौजूद हो तो उसका नियमित और अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसलिए केवल ‘पनीर’ नाम देखकर उत्पाद को स्वस्थ मान लेना उचित नहीं है। लेबल और सामग्री की जानकारी पढ़ना ज्यादा जरूरी है।
असली पनीर की पहचान कैसे करें?
बाजार से पैक्ड पनीर खरीदते समय सबसे पहले उसकी पैकेजिंग और सामग्री सूची देखें। उत्पाद पर दिए गए नाम और उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री को ध्यान से पढ़ें।
यदि किसी उत्पाद में गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, तो लेबल पर दी गई जानकारी से इसका पता लगाया जा सकता है।
1. पैकेट पर लेबल जरूर पढ़ें
पैकेज्ड फूड खरीदते समय केवल ब्रांड नाम या कीमत देखकर फैसला न करें। सामग्री सूची, पोषण संबंधी जानकारी और उत्पाद की श्रेणी को जरूर देखें।
2. बनावट और खुशबू पर ध्यान दें
पारंपरिक पनीर की बनावट और खुशबू उसके दूध से बने होने का संकेत दे सकती है। हालांकि केवल स्वाद, रंग, खुशबू या बनावट के आधार पर किसी उत्पाद को निश्चित रूप से असली या नकली घोषित नहीं किया जा सकता।
3. बहुत सस्ते उत्पाद से सावधान रहें
यदि कोई उत्पाद बाजार में उपलब्ध समान श्रेणी के पनीर की तुलना में असामान्य रूप से सस्ता है, तो उसकी सामग्री और लेबल की जांच करना समझदारी है।
4. घर पर किए जाने वाले वायरल टेस्ट पर पूरी तरह निर्भर न रहें
सोशल मीडिया पर पनीर में स्टार्च, डिटर्जेंट, यूरिया या अन्य मिलावट की पहचान के लिए आयोडीन, दाल पाउडर या अन्य घरेलू परीक्षणों के कई तरीके बताए जाते हैं।
लेकिन ऐसे घरेलू परीक्षणों के परिणाम हमेशा विश्वसनीय नहीं होते। किसी खाद्य उत्पाद में मिलावट की पक्की पुष्टि के लिए मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की जांच ज्यादा भरोसेमंद है।
रेस्टोरेंट में पनीर खाते समय क्या करें?
रेस्टोरेंट में पनीर की डिश ऑर्डर करते समय ग्राहक के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि इस्तेमाल किया गया पनीर किस प्रकार का है।
ऐसे में ग्राहक रेस्टोरेंट से पूछ सकता है कि पनीर डेयरी मिल्क से बना है या किसी एनालॉग उत्पाद का इस्तेमाल किया गया है।
खासकर बच्चों, बुजुर्गों या ऐसे लोगों के लिए जो अपने खान-पान को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहते हैं, भोजन की सामग्री के बारे में जानकारी लेना बेहतर विकल्प है।
सिर्फ ‘पनीर’ लिखे होने से पूरी कहानी नहीं पता चलती
आज उपभोक्ता पहले की तुलना में खाद्य उत्पादों को लेकर अधिक जागरूक हो रहा है। पैकेज्ड फूड हो या रेस्टोरेंट का खाना, केवल नाम देखकर किसी उत्पाद को पूरी तरह स्वस्थ या अस्वस्थ मान लेना सही नहीं है।
पनीर खरीदते समय लेबल पढ़ें, सामग्री समझें और जरूरत पड़ने पर निर्माता या रेस्टोरेंट से सवाल पूछें।
आखिरकार, खाने की प्लेट में क्या जा रहा है, यह जानना हर उपभोक्ता का अधिकार भी है और अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदारी भी।
क्या आप जानते हैं?
डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर एक ही चीज नहीं हैं। दोनों दिखने में समान हो सकते हैं, लेकिन उनकी सामग्री और निर्माण प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारी के समय सिर्फ कीमत और पैकेजिंग नहीं, बल्कि उत्पाद की सामग्री और लेबल पर भी ध्यान दें।




