हैदराबाद, 30 अक्टूबर। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT Hyderabad) ने 28 अक्टूबर 2026 को ‘डिजिटल सिटिजन समिट – रीजनल डायलॉग्स: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर्स फॉर गवर्नेंस’ का आयोजन किया। इस समिट का उद्देश्य भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अधिक समावेशी, जवाबदेह और सुलभ बनाना था।
इस कार्यक्रम का आयोजन डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन (DEF), आईआईआईटी हैदराबाद के ह्यूमन साइंसेज रिसर्च सेंटर और कोड फॉर गुड टेक (C4GT) के सहयोग से किया गया। इसमें सरकार, नागरिक समाज, प्रौद्योगिकी, शोध और समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विविध आबादी के लिए डिजिटल सिस्टम को अधिक उत्तरदायी बनाने पर चर्चा की।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर जोर
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाएं (जैसे आधार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), और डिजिलॉकर) सार्वजनिक सेवाओं, वित्तीय प्रणाली और कल्याणकारी लाभों तक पहुंच में बड़ा परिवर्तन लेकर आई हैं। जैसे-जैसे डीपीआई और डिजिटल पब्लिक गुड्स (DPGs) शासन के केंद्र में आ रहे हैं, समिट में समान पहुंच, जवाबदेही, डेटा-आधारित सिस्टम और नागरिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
पहुंच और भागीदारी में चुनौतियां
प्रतिभागियों ने बताया कि डिजिटल सिस्टम ग्रामीण महिलाएं, प्रवासी श्रमिक, दिव्यांगजन, भाषाई अल्पसंख्यक और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए चुनौतियां पेश करते हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में विफलता, सीमित भाषा समर्थन, अस्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी और शिकायत निवारण तंत्र की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं डिजिटल गवर्नेंस में प्रभावी भागीदारी में बाधा बनती हैं।
पैनल चर्चा और कार्यशाला
समिट में तेलंगाना और अन्य क्षेत्रों में डीपीआई गवर्नेंस, जवाबदेही और शिकायत निवारण पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। पैनल में मोजालूप फाउंडेशन के टेक्निकल डायरेक्टर सैम कुम्मरी, आईआईआईटी हैदराबाद के ह्यूमन साइंसेज रिसर्च सेंटर की आकांक्षा नातानी, कोड फॉर गुड टेक की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अजीथा सिंधे, फैक्टली के संस्थापक राकेश डुब्बुबु और हैदराबाद अर्बन लैब्स के एसक्यू मसीद शामिल थे। कार्यक्रम में डीपीआई के सह-निर्माण और योगदान पर कार्यशाला भी हुई, जिसमें डीपीआई टूल्स, डीपीआई कोड की जानकारी और डिजाइन व विकास में भागीदारी के तरीके सिखाए गए।
समावेशी डिजिटल गवर्नेंस पर संवाद
डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन के संस्थापक-निदेशक ओसामा मंज़र ने कहा, “अगर डीपीआई एक सड़क की तरह है, तो उस पर हर किसी को चलने का अधिकार होना चाहिए, न कि केवल स्मार्टफोन या बैंडविड्थ वालों को।” समिट का उद्देश्य तकनीकी डेवलपर्स, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देना था, ताकि ऐसी अवसंरचना डिजाइन की जा सके जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए शासन तक सार्थक पहुंच सुनिश्चित करे।
आईआईआईटी हैदराबाद ने कहा कि यह क्षेत्रीय संवाद समाजिक चुनौतियों के समाधान और सार्वजनिक सेवा वितरण में तकनीक की भूमिका को मजबूत करने के लिए अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
अस्वीकरण: यह समाचार संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है और इसे एआई टूल्स की सहायता से संपादित किया गया है। कारोबार समाचार विज्ञप्ति में किए गए दावों, आंकड़ों या बयानों की पुष्टि, समर्थन या जिम्मेदारी नहीं लेता।




