बेंगलुरु, 9 अक्टूबर। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (IIM Bangalore) ने फाइनेंशियल टाइम्स के 2026 के बिजनेस स्कूल आकलन में अपने टीचिंग केस प्रभाव के लिए वैश्विक स्तर पर 11वां और भारत में पहला स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग शैक्षणिक कार्यों के व्यवसाय और नीति निर्माण पर प्रभाव का मूल्यांकन करती है। आईआईएम बैंगलोर को उसके केस मटेरियल के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक उपयोग के लिए मान्यता मिली है।
फाइनेंशियल टाइम्स का 2026 आकलन प्रैक्टिशनर पब्लिकेशन, नीति प्रभाव, बाहरी अनुदान फंडिंग और टीचिंग केस को कवर करता है। टीचिंग केस श्रेणी में आईआईएम बैंगलोर ने वैश्विक स्तर पर 11वां स्थान प्राप्त किया। संस्थान के केस 2024 और 2025 के दौरान करीब 50 देशों के 680 उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा उपयोग किए गए, जिससे शैक्षणिक संस्थानों, फैकल्टी, छात्रों, कंपनियों और प्रोफेशनल्स तक इसकी पहुंच बनी।
वैश्विक पहुंच और केस की स्वीकार्यता
टीचिंग केस मापदंड कक्षा शिक्षण के लिए केस स्टडी के निर्माण और उपयोग का आकलन करता है। 2026 के लिए फाइनेंशियल टाइम्स ने पांच अंतरराष्ट्रीय वितरकों—केस सेंटर एट सीईआईबीएस, हार्वर्ड बिजनेस इम्पैक्ट, आईईएसई पब्लिशिंग, आइवी पब्लिशिंग और द केस सेंटर—से डेटा एकत्र किया। यह प्रक्रिया द केस सेंटर के इम्पैक्ट इंडेक्स पर आधारित थी।
आईआईएम बैंगलोर ने 2024 और 2025 में हार्वर्ड बिजनेस इम्पैक्ट के माध्यम से 26 केस प्रकाशित किए। केस की बिक्री 2024 में 1,40,457 से बढ़कर 2025 में 1,84,879 हो गई, यानी लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मांग अलग-अलग व्यावसायिक समस्याओं से जुड़े केसों में वितरित रही, न कि केवल एक विषय पर केंद्रित।
प्रमुख केस और लेखक
सबसे अधिक बिकने वाले केसों में ‘रेडबस: आर्ट एंड साइंस ऑफ प्रोडक्ट मैनेजमेंट’, जिसे प्रो. शंखदीप बनर्जी (चेयरपर्सन, इंफॉर्मेशन सिस्टम्स) ने सह-लेखक किया; ‘टेस्टिंग मार्केटिंग हाइपोथीसिस एट WSES’ प्रो. दिनेश कुमार (डिसीजन साइंसेज फैकल्टी) द्वारा; और ‘कस्टमर एनालिटिक्स एट बिगबास्केट – प्रोडक्ट रिकमेंडेशंस’, जिसे भी प्रो. दिनेश कुमार ने सह-लेखक किया, शामिल हैं। अन्य लोकप्रिय केसों में ‘अपोलो हॉस्पिटल्स: द जर्नी ऑफ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ (प्रो. आर श्रीनिवासन, चेयरपर्सन, सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स द्वारा सह-लेखित) और ‘शोध – मार्केट रिसर्च फॉर इकोनॉमी हाउसिंग (A)’ (प्रो. अविनाश जी मुल्की, सेवानिवृत्त मार्केटिंग फैकल्टी द्वारा) शामिल हैं।
अन्य मांग वाले केसों में हेल्थकेयर में डिमांड फोरकास्टिंग, कर्मचारी जुड़ाव, एचआर एनालिटिक्स और जेनरेटिव एआई जैसे विषय शामिल थे। 2024 की प्रस्तुतियों में बिजनेस मॉडल इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन, सस्टेनेबिलिटी और ऑर्गनाइजेशनल चेंज जैसे बाजार मुद्दों को भी कवर किया गया। उल्लेखनीय केसों में ‘बिजनेस मॉडल इनोवेशन एट LOG9’ (प्रो. श्रीलता जोन्नालगड्डा), ‘ऑक्शनबाजार.कॉम: लुब्रिकेटिंग द एनपीए डिस्पोजल प्रोसेस’ (प्रो. आर श्रीनिवासन), ‘फील्डअसिस्ट: एनबलिंग सेल्स परफॉर्मेंस एंड इंसेंटिव डिजाइन फॉर स्ट्रेटेजिक अलाइनमेंट ऑफ फ्रंटलाइन सेल्सफोर्स इन एफएमसीजी’ (प्रो. देबोलिना दत्ता) और ‘इकोसिस्टम डेवलपमेंट फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स: द केस ऑफ जुगलबंदी’ (प्रो. शंखदीप बनर्जी) शामिल हैं।
मूल्यांकन पद्धति और प्रभाव
एफटी रैंकिंग्स के केस इम्पैक्ट घटक में वे स्कूल शामिल हैं जिन्होंने पिछले दो वर्षों में कम से कम एक केस वितरण के लिए प्रस्तुत किया हो और पिछले सात वर्षों में केस प्रकाशित किए हों। विश्लेषण 1 जुलाई से 30 जून तक की गतिविधि को कवर करता है, जिसमें यूनिक केस और लेखक, संस्थानों में अपनाने, भौगोलिक पहुंच और कुल छात्र उपयोग शामिल है। इन सभी मापदंडों को z-स्कोर से सामान्यीकृत कर ओवरऑल इम्पैक्ट स्कोर में जोड़ा जाता है, और परिणामों को मार्केट शेयर के अनुसार स्केल और वेट किया जाता है।
संस्थान का दृष्टिकोण
आईआईएम बैंगलोर के निदेशक-प्रभारी प्रो. यू दिनेश कुमार ने कहा कि संस्थान के केसों की वैश्विक स्वीकार्यता यह दर्शाती है कि कठोर, समसामयिक और वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों पर आधारित शिक्षण सामग्री की मांग है। “शोध का मूल्य तब और बढ़ जाता है जब वह व्यवसायों की समस्याओं से जुड़ता है और निर्णय लेने में मार्गदर्शन करता है। आईआईएम बैंगलोर में हम केसों को शोध, प्रबंधकीय अनुभव और वास्तविक व्यावसायिक समस्याओं को कक्षा में लाने का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं,” उन्होंने कहा।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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