नई दिल्ली। अगर आपके वाहन का इंश्योरेंस समाप्त हो चुका है और आपने अब तक उसे रिन्यू नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक ऐसे पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करने को कहा है, जिसके तहत भविष्य में बिना वैध मोटर इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जा सके। हालांकि, फिलहाल देश में ऐसा कोई नियम लागू नहीं हुआ है और वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का यह सुझाव देश में बड़ी संख्या में बिना बीमा के चल रहे वाहनों को देखते हुए आया है। अदालत का मानना है कि यदि वाहन मालिक समय पर बीमा का नवीनीकरण कराते रहें, तो सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में होने वाली परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं।
आखिर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को निर्देश दिया है कि वे ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था की व्यवहार्यता का अध्ययन करते हुए एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें।
यदि भविष्य में ऐसा मॉडल लागू होता है तो पेट्रोल पंप पर वाहन में ईंधन भराने से पहले उसके बीमा की वैधता की जांच की जा सकती है।
क्या अभी बिना इंश्योरेंस पेट्रोल नहीं मिलेगा?
नहीं।
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे हर वाहन मालिक को समझना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केवल पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। अभी तक केंद्र सरकार ने ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया है और न ही देश के किसी पेट्रोल पंप पर इंश्योरेंस जांच कर ईंधन देने की व्यवस्था शुरू हुई है।
इसलिए वर्तमान में वाहन मालिक पहले की तरह ही पेट्रोल और डीजल खरीद सकते हैं। यदि भविष्य में सरकार इस संबंध में कोई निर्णय लेती है तो उसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
अदालत ने चिंता क्यों जताई?
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 करोड़ वाहनों में से करीब 16.5 करोड़ वाहन ऐसे हैं जिनके पास वैध बीमा नहीं है। यानी लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं।
अदालत ने इसे सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय माना।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि भी बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का भी निर्देश दिया है।
अब—
- नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस 4 वर्ष का होगा।
- नई दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि 6 वर्ष होगी।
इससे पहले यह अवधि क्रमशः 3 वर्ष और 5 वर्ष थी।
अदालत का मानना है कि शुरुआती वर्षों में लंबी अवधि का बीमा होने से अधिक वाहन बीमा सुरक्षा के दायरे में रहेंगे।
‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था कैसे काम कर सकती है?
यदि भविष्य में यह व्यवस्था लागू होती है तो पेट्रोल पंपों को वाहन के बीमा रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकता है। वाहन का नंबर दर्ज करते ही सिस्टम यह जांच करेगा कि उसका इंश्योरेंस वैध है या नहीं।
यदि बीमा समाप्त हो चुका होगा तो वाहन मालिक को पहले बीमा रिन्यू कराने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि यह पूरी प्रक्रिया अभी केवल प्रस्तावित स्तर पर है और इसकी तकनीकी एवं कानूनी व्यवहार्यता पर अध्ययन किया जाना बाकी है।
कैमरों और डिजिटल सिस्टम का भी होगा उपयोग
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों को बीमा डेटाबेस और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान हो सकेगी।
इसके अलावा पुलिसकर्मियों को ऐसे मोबाइल एप या डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है, जिनसे वे मौके पर ही वाहन के बीमा की जांच कर सकें।
बीमा व्यवस्था को आसान बनाने पर भी जोर
अदालत ने बीमा कंपनियों से ग्राहकों को सरल भाषा में जानकारी देने और विभिन्न प्रकार के बीमा कवर स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने को भी कहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था में मुख्य रूप से चार प्रकार के कवर शामिल किए जा सकते हैं—
- अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस
- यात्रियों या पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए वैकल्पिक कानूनी दायित्व कवर
- वाहन मालिक, चालक और यात्रियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना कवर
- वाहन को हुए नुकसान का वैकल्पिक बीमा
इसका उद्देश्य ग्राहकों को उनकी जरूरत के अनुसार बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।
वाहन मालिकों को अभी क्या करना चाहिए?
भले ही ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ नियम अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन प्रत्येक वाहन मालिक के लिए समय पर बीमा का नवीनीकरण कराना जरूरी है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के बिना सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन मालिकों को अपने बीमा की समाप्ति तिथि पर नजर रखनी चाहिए और समय रहते उसका नवीनीकरण करा लेना चाहिए। इससे दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक और कानूनी दोनों प्रकार की परेशानियों से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का उद्देश्य वाहन मालिकों को परेशान करना नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करना है। फिलहाल ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था केवल विचार और पायलट परियोजना के स्तर पर है। ऐसे में वाहन मालिकों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय सरकार की आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, समय पर मोटर इंश्योरेंस का नवीनीकरण कराना हर वाहन मालिक की जिम्मेदारी है और यही सुरक्षित एवं जिम्मेदार ड्राइविंग की पहली शर्त भी है.




