बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बीच विशेषज्ञों की मिली-जुली राय
नई दिल्ली। शुक्रवार, 29 जून 2026 को सोने के भाव लगभग स्थिर रहे, जबकि चाँदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाज़ार में कमज़ोरी और मज़बूत अमेरिकी डॉलर का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ा। भारत में 24 कैरेट सोने का भाव 14,302 रुपये प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना 13,110 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं चाँदी का भाव 2,39,900 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब है।
सोना: सुरक्षित निवेश, लेकिन अभी दिशा अस्पष्ट
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमत इस साल जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू चुकी है। हालाँकि 29 जून को यह घटकर लगभग 4,037 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषक ग्रेग शेयरर के अनुसार, “सोना फिलहाल एक तकनीकी ‘नो-मैन्स लैंड’ में फँसा हुआ है — न तो ऊपर जा पा रहा है, न ही नीचे।” उनका मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनाए रखने की आशंका सोने की निवेश माँग पर दबाव बना सकती है। फिर भी जे.पी. मॉर्गन का दीर्घकालिक अनुमान 2026 की अंतिम तिमाही तक सोने को 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुँचाने का है।
चाँदी: औद्योगिक माँग से मिल रहा बड़ा सहारा
चाँदी की कुल वार्षिक खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर उद्योग से आता है। सौर ऊर्जा क्षेत्र में चाँदी की माँग 2014 में कुल औद्योगिक उपयोग के 11 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में लगभग 29 प्रतिशत हो गई है। डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती माँग इस वृद्धि को 2030 तक जारी रखने की उम्मीद है।
BullionVault के निवेशकों का बहुमत 2026 के अंत तक चाँदी को 80 डॉलर प्रति औंस से ऊपर देख रहा है — यानी चाँदी के प्रति निवेशकों की धारणा सबसे ज़्यादा सकारात्मक है।
निवेशकों के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चाँदी पोर्टफोलियो में अलग-अलग भूमिका निभाते हैं — सोना दीर्घकालिक स्थिरता और मुद्रास्फीति से बचाव के लिए उपयुक्त है, जबकि चाँदी औद्योगिक विकास की संभावनाओं के कारण अधिक रिटर्न दे सकती है, हालाँकि इसमें उतार-चढ़ाव भी अधिक रहता है।
भारत में सोना वर्षों से महँगाई के खिलाफ एक मज़बूत बचाव माना जाता रहा है और निवेशक इसे अपने पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनाते आए हैं। बाज़ार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एकमुश्त निवेश की बजाय SIP या किस्तों में खरीदारी अधिक सुरक्षित रहती है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो




