नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। आईटीसी मंगलदीप (ITC Mangaldeep) ने ‘हर भक्त श्रीराम तक’ नामक एक डिजिटल पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य अयोध्या राम मंदिर में नेत्रहीन श्रद्धालुओं के लिए दर्शन अनुभव को अधिक सुगम बनाना है। इस अभियान के तहत देशभर के लोग प्रतीकात्मक रूप से भाग ले सकते हैं, और हर योगदान मंदिर में ब्रेल-सक्षम नेविगेशन पथ के निर्माण में सहायक होगा।
इस पहल में कंटूर डिटेक्शन टेक्नोलॉजी सहित अन्य तकनीकों का उपयोग किया गया है और यह मंगलदीप के सिक्स्थ सेंस प्रोग्राम से प्रेरित है, जिसका लक्ष्य नेत्रहीन लोगों को दृष्टि से परे दुनिया का अनुभव कराना है। प्रतिभागियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थानीय भाषा में “राम” लिखने के लिए आमंत्रित किया गया है, और हर प्रविष्टि मंदिर में टैक्टाइल व ब्रेल-सक्षम पथ के विकास में योगदान देगी।
डिजिटल भागीदारी और जमीनी असर
हर डिजिटल भागीदारी के साथ सरयू घाट पर एक दीया भी प्रज्वलित किया जाएगा, जिससे व्यक्तिगत आस्था का सामूहिक उत्सव में रूपांतरण होगा। टैक्टाइल पथ का पहला चरण नेत्रहीन श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में अधिक स्वतंत्रता और आसानी से मार्गदर्शन देने का लक्ष्य रखता है, जिससे दीपोत्सव और आगे भी उनका दर्शन अनुभव बेहतर हो सके।
समावेशिता पर नेतृत्व की टिप्पणी
रोहित डोगरा, डिविजनल सीईओ, माचिस और अगरबत्ती डिवीजन, आईटीसी ने कहा कि यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि भक्ति सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। “हमारी सिक्स्थ सेंस पहल नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए अनुभवों को अधिक समावेशी बनाने की सोच पर आधारित रही है, और इसी विश्वास ने हमें ‘हर भक्त श्रीराम तक’ अभियान की कल्पना के लिए प्रेरित किया,” डोगरा ने कहा।
पूर्ववर्ती पहल और निरंतर सहयोग
यह अभियान मंगलदीप के अयोध्या दीपोत्सव के साथ चल रहे सहयोग पर आधारित है, जिसमें खुशबू पथ और डिजिटल दीपोत्सव जैसी पहलें शामिल हैं। पूर्व में 1.3 लाख से अधिक डिजिटल दीयों को वास्तविक दीयों में बदला गया था। ‘हर भक्त श्रीराम तक’ के माध्यम से, मंगलदीप तकनीक और सामूहिक भागीदारी के जरिए अयोध्या राम मंदिर में अधिक समावेशी भक्ति वातावरण बनाने की अपनी विरासत को आगे बढ़ाना चाहता है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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