भोपाल। छोटे बच्चों को डायपर पहनाना आज लगभग हर परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लेकिन क्या केवल डायपर पहनाना ही काफी है? यदि डायपर समय पर न बदला जाए, हाथों की सफाई का ध्यान न रखा जाए या इस्तेमाल किए गए डायपर का सही तरीके से निपटान न किया जाए, तो बच्चे को रैश, त्वचा में जलन, फंगल संक्रमण और यहां तक कि गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा भी हो सकता है।
यह जानकारी एम्स भोपाल में किए गए एक शोध में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, डायपर के सही इस्तेमाल को लेकर शहरी माताओं की जानकारी ग्रामीण माताओं की तुलना में बेहतर है। हालांकि, हाथों की स्वच्छता और इस्तेमाल किए गए डायपर के सुरक्षित निपटान जैसे मामलों में दोनों ही समूहों में जागरूकता की कमी पाई गई।
यह अध्ययन एम्स भोपाल के नर्सिंग कॉलेज की एमएससी नर्सिंग (पीडियाट्रिक नर्सिंग) बैच-2024 की छात्रा मीना ने अपने शोध के तहत किया। शोध का मार्गदर्शन डॉ. ममता वर्मा, प्रोफेसर एवं प्राचार्य (प्रभारी), नर्सिंग कॉलेज, तथा सह-मार्गदर्शन कुमारास्वामी ए. पी., असिस्टेंट प्रोफेसर, नर्सिंग कॉलेज ने किया।
276 माताओं पर किया गया अध्ययन
यह अध्ययन भोपाल के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की 276 माताओं पर किया गया, जिनके 0 से 36 महीने तक की आयु के बच्चे नियमित रूप से डायपर पहनते थे। इनमें 138 माताएं शहरी और 138 ग्रामीण क्षेत्रों से थीं।
शोध के दौरान माताओं से डायपर के चयन, उसे कितनी बार बदलना चाहिए, स्वच्छता, रैश से बचाव और इस्तेमाल किए गए डायपर के निपटान से जुड़े सवाल पूछे गए।
क्या सामने आया?
अध्ययन में पाया गया कि शहरी माताओं का औसत ज्ञान स्कोर ग्रामीण माताओं की तुलना में अधिक था। लगभग 40.6 प्रतिशत शहरी माताओं को डायपर के सही उपयोग की अच्छी जानकारी थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 14.5 प्रतिशत रहा।
शहरी माताओं को सही डायपर चुनने और उसे समय पर बदलने की जानकारी अपेक्षाकृत बेहतर मिली। हालांकि, हाथ धोने और इस्तेमाल किए गए डायपर को सुरक्षित तरीके से फेंकने के विषय में दोनों ही समूहों में जागरूकता अपेक्षा से कम पाई गई।
क्यों जरूरी है सही जानकारी?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक गीला डायपर पहनाए रखने से बच्चे की त्वचा पर रैश, लालिमा और जलन हो सकती है। कई मामलों में यही समस्या आगे चलकर फंगल संक्रमण या गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण का कारण बन सकती है।
ऐसे में केवल डायपर पहनाना पर्याप्त नहीं है। समय पर डायपर बदलना, हर बार बच्चे की त्वचा को साफ और सूखा रखना, डायपर बदलने से पहले और बाद में हाथ धोना तथा इस्तेमाल किए गए डायपर का सुरक्षित निपटान करना भी उतना ही आवश्यक है।
हर माता-पिता के लिए उपयोगी संदेश
शोध का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि चाहे परिवार शहर में रहता हो या गांव में, शिशु देखभाल से जुड़ी बुनियादी स्वच्छता के बारे में सभी अभिभावकों को सही जानकारी मिलनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही आकार का डायपर चुनना, उसे समय-समय पर बदलना और स्वच्छता के नियमों का पालन करना बच्चों को कई तरह के संक्रमण से बचा सकता है। साथ ही, इस्तेमाल किए गए डायपर का सुरक्षित निपटान घर और आसपास के वातावरण को भी स्वच्छ बनाए रखने में मदद करता है।
एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डायपर के सही उपयोग, स्वच्छता और सुरक्षित निपटान को लेकर सरल एवं व्यापक स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम चलाए जाने की आवश्यकता है, ताकि शिशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहे और संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके।




