Saturday, 27 June 2026
ताज़ा खबर
चिकित्सा अनुसंधान में एम्स भोपाल की बड़ी छलांग, देश में दूसरे सबसे तेज़ प्रगति करने वाले संस्थान का दर्जाचिंता और घबराहट से निपटने के 11 कारगर उपाय — विशेषज्ञों की सलाहबार-बार डायपर नहीं बदलना पड़ सकता है भारी, एम्स भोपाल के शोध में सामने आई अहम बातेंआखिर क्यों लोग खरीद रहे हैं ‘Wish Willow’ नाम की एक साधारण लकड़ी?कान बंद किए बिना सुनिए संगीत: क्या Open-Ear Earbuds ऑडियो की दुनिया का अगला बड़ा ट्रेंड हैं?स्पीड और सितार का अनूठा संगम — श्कोडा कोडियाक RS और ऋषभ रिखीराम शर्मा का ‘सरेंडर’चिकित्सा अनुसंधान में एम्स भोपाल की बड़ी छलांग, देश में दूसरे सबसे तेज़ प्रगति करने वाले संस्थान का दर्जाचिंता और घबराहट से निपटने के 11 कारगर उपाय — विशेषज्ञों की सलाहबार-बार डायपर नहीं बदलना पड़ सकता है भारी, एम्स भोपाल के शोध में सामने आई अहम बातेंआखिर क्यों लोग खरीद रहे हैं ‘Wish Willow’ नाम की एक साधारण लकड़ी?कान बंद किए बिना सुनिए संगीत: क्या Open-Ear Earbuds ऑडियो की दुनिया का अगला बड़ा ट्रेंड हैं?स्पीड और सितार का अनूठा संगम — श्कोडा कोडियाक RS और ऋषभ रिखीराम शर्मा का ‘सरेंडर’
होमपेज/लाइफस्टाइल/चिंता और घबराहट से निपटने के 11 कारगर उपाय — विशेषज्ञों की सलाह
लाइफस्टाइल

चिंता और घबराहट से निपटने के 11 कारगर उपाय — विशेषज्ञों की सलाह

K
KBS
27 June 2026 · 1 मिनट रीड
चिंता और घबराहट से निपटने के 11 कारगर उपाय — विशेषज्ञों की सलाह

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में चिंता (Anxiety) एक आम समस्या बन गई है। काम का दबाव, रिश्तों की उलझनें या भविष्य की अनिश्चितता — ये सब मिलकर हमारे मन को बेचैन कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, लेकिन जब यह लगातार बना रहे तो यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।

अच्छी बात यह है कि कुछ सरल और प्रभावी तकनीकों से चिंता को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


तत्काल राहत के लिए 5 तकनीकें

1. अपने विचारों पर सवाल उठाएं
जब मन में नकारात्मक विचार आएं, तो खुद से पूछें — “क्या यह सच है या सिर्फ मेरी धारणा है?” नकारात्मक सोच को चुनौती देने से चिंता की तीव्रता कम होती है। इसे कॉग्निटिव रिस्ट्रक्चरिंग कहते हैं।

2. गहरी सांस लें
4 काउंट तक सांस लें, फिर 4 काउंट तक सांस छोड़ें — इसे 5 मिनट तक दोहराएं। इससे हृदय की धड़कन धीमी होती है और मन शांत होता है। ‘4-7-8 तकनीक’ भी तत्काल राहत के लिए बेहद कारगर मानी जाती है।

3. अरोमाथेरेपी अपनाएं
लैवेंडर, चमोमाइल और चंदन जैसी प्राकृतिक सुगंधें मन को तेज़ी से शांत करने में सहायक होती हैं। इन्हें एसेंशियल ऑयल, अगरबत्ती या मोमबत्ती के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

4. शारीरिक गतिविधि करें
चिंता के समय शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं। ब्रिस्क वॉक, योग या ताई-ची से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। यहां तक कि 30-60 सेकंड के स्क्वाट्स या जंपिंग जैक्स भी मूड को तुरंत बेहतर बना सकते हैं।

5. ग्राउंडिंग तकनीक आज़माएं
‘333 नियम’ एक प्रसिद्ध ग्राउंडिंग तकनीक है — 3 चीजें जो आप देख सकते हैं, 3 आवाज़ें जो सुन सकते हैं, और 3 चीजें जिन्हें छू सकते हैं — इन पर ध्यान केंद्रित करें। यह तकनीक मन को वर्तमान में लाने में मदद करती है।


दीर्घकालिक प्रबंधन के 6 उपाय

6. अपने ट्रिगर पहचानें
काम की डेडलाइन, रिश्तों का तनाव, कैफीन का अधिक सेवन या पुरानी दर्दनाक यादें — ये सब चिंता के सामान्य कारण हो सकते हैं। अपने व्यक्तिगत ट्रिगर जानना प्रबंधन की पहली सीढ़ी है।

7. दवाओं के बारे में डॉक्टर से बात करें
अगर आप कोई दवा ले रहे हैं, तो उसके साइड इफेक्ट में चिंता भी हो सकती है। गंभीर मामलों में मनोचिकित्सक SSRI या SNRI जैसी दवाएं सुझा सकते हैं — लेकिन यह हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें।

8. रोज़ ध्यान (मेडिटेशन) करें
शोध बताते हैं कि नियमित माइंडफुलनेस मेडिटेशन से मस्तिष्क को चिंतित विचारों से निपटने की क्षमता विकसित होती है। वॉकिंग मेडिटेशन या गाइडेड इमेजरी भी अच्छे विकल्प हैं।

9. डायरी लिखें
2018 के एक अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से भावनाओं को लिखने से चिंता, अवसाद और मानसिक परेशानी में उल्लेखनीय कमी आती है। अपने विचार और कारगर उपाय डायरी में नोट करें।

10. सामाजिक जीवन बढ़ाएं
विश्वसनीय मित्रों और परिवार के साथ समय बिताने से अकेलापन कम होता है और मन हल्का होता है। शोध यह भी दर्शाते हैं कि मज़बूत सामाजिक संबंध लंबे समय में तनाव के प्रति हमें अधिक सहनशील बनाते हैं।

11. नियमित व्यायाम जारी रखें
व्यायाम का प्रभाव सिर्फ तात्कालिक नहीं होता। नियमित शारीरिक गतिविधि से नींद बेहतर होती है, भूख संतुलित रहती है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। अनेक अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि व्यायाम चिंता प्रबंधन में दीर्घकालिक सकारात्मक भूमिका निभाता है।


निष्कर्ष

चिंता जीवन को कठिन बना सकती है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। उपरोक्त तकनीकें आपको न केवल तत्काल राहत दे सकती हैं, बल्कि दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य भी सुधार सकती हैं। अगर चिंता गंभीर रूप ले रही हो और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ज़रूर लें।

— कारोबार समाचार ब्यूरो


← बार-बार डायपर नहीं बदलना पड़ सकता है भारी, एम्स भोपाल के शोध में सामने आई अहम बातें चिकित्सा अनुसंधान में एम्स भोपाल की बड़ी छलांग, देश में दूसरे सबसे तेज़ प्रगति करने वाले संस्थान का दर्जा →

रोज़ाना कारोबार की खबरें सीधे इनबॉक्स में

बाज़ार, कॉर्पोरेट और नीति से जुड़ी अहम खबरों का सार — हर सुबह।