नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, ने बैंकिंग में क्वांटम वित्तीय नवाचार और उभरती तकनीकों को अपनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते का उद्देश्य बैंक ऑफ इंडिया की बैंकिंग विशेषज्ञता और सी-डैक की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा में क्षमताओं का लाभ उठाकर वित्तीय नवाचार के लिए एक क्वांटम इकोसिस्टम विकसित करना है। साझेदारी का फोकस बैंकिंग सुरक्षा और लचीलापन मजबूत करने के साथ-साथ संयुक्त शोध, पायलट प्रोजेक्ट्स और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट पहलों के माध्यम से नवाचार के नए उपयोग मामलों की खोज पर रहेगा।
क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा और एआई पर जोर
समझौते के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर, क्वांटम-जनित रैंडमनेस और उन्नत ऑप्टिमाइजेशन शामिल हैं। इस सहयोग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी अन्य उभरती तकनीकों को भी शामिल किया जाएगा। संयुक्त गतिविधियों में शोध, तकनीकी प्रदर्शन और भविष्य के लिए तैयार बैंकिंग को समर्थन देने वाले क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल होंगे।
प्रमुख प्रतिभागी और नेतृत्व के वक्तव्य
यह समझौता ज्ञापन सी-डैक मुंबई के कार्यकारी निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा और बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक आईटी एवं सीआईओ सत्येन्द्र सिंह ने औपचारिक रूप से आदान-प्रदान किया। इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक राजीव मिश्रा, संयुक्त सचिव (MeitY) सुदीप श्रीवास्तव, सी-डैक के महानिदेशक ई. माघेश और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राजीव मिश्रा, कार्यकारी निदेशक, बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि यह सहयोग बैंकिंग में विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और जटिल वित्तीय निर्णय-निर्माण में क्वांटम तकनीकों की संभावनाओं का पता लगाने और मूल्यांकन करने के उद्देश्य से किया गया है। एस. कृष्णन, सचिव, MeitY ने बढ़ती साइबर सुरक्षा चिंताओं के बीच क्वांटम-प्रतिरोधी वित्तीय इकोसिस्टम के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। ई. माघेश, महानिदेशक, सी-डैक ने इस साझेदारी को स्वदेशी क्वांटम और उभरती तकनीकी क्षमताओं को व्यावहारिक बैंकिंग समाधानों में बदलने की दिशा में एक कदम बताया।
संयुक्त शोध और क्षमता निर्माण
यह साझेदारी बैंकिंग के उपयोग मामलों की पहचान और प्राथमिकता तय करेगी, सुरक्षित सैंडबॉक्स वातावरण में प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट का प्रदर्शन करेगी, तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन करेगी, नई विधियों का बेंचमार्किंग करेगी और आगे के पायलट या अपनाने के लिए रोडमैप तैयार करेगी। इसके तहत इंटेलिजेंट डॉक्युमेंट प्रोसेसिंग, ग्राहक और कर्मचारी सहायता, धोखाधड़ी विश्लेषण, क्रेडिट और वित्तीय एनालिटिक्स, सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म, जिम्मेदार एआई, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स, डिजिटल पहचान और सुरक्षित डेटा साझाकरण जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा।
इसके अलावा, यह सहयोग क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और अन्य डिजिटल तकनीकों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा इकोसिस्टम के विकास पर भी केंद्रित रहेगा।
भविष्य की बैंकिंग नवाचार के लिए ढांचा
यह समझौता ज्ञापन बैंक ऑफ इंडिया और सी-डैक को संयुक्त रूप से अनुसंधान एवं विकास, पायलट कार्यान्वयन और तकनीकी प्रदर्शन को आगे बढ़ाने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है, जिससे एक सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत वित्तीय इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान मिलेगा।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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