हैदराबाद, 23 अक्टूबर। हैदराबाद में आयोजित एक पैनल चर्चा में रियल एस्टेट और स्वच्छता विशेषज्ञों ने घर खरीदारों और आवासीय समुदायों से अपशिष्ट जल प्रबंधन को विला और अपार्टमेंट चुनते समय लग्जरी सुविधाओं जितनी ही प्राथमिकता देने की अपील की है। यह कार्यक्रम ‘Sanitation: A Super Vaccine’ शीर्षक से रोटरी क्लब ऑफ वन हैदराबाद (Rotary Club of One Hyderabad – RC1H) द्वारा पिछले सप्ताह द लीला, बंजारा हिल्स में आयोजित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि हैदराबाद के रियल एस्टेट सेक्टर में प्रीमियम लाइफस्टाइल फीचर्स की प्रतिस्पर्धा के बीच, टिकाऊ आवास, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के लिए प्रभावी अपशिष्ट जल उपचार अनिवार्य है।
निर्माताओं और खरीदारों से सक्रियता की अपील
गिरीश मल्लपानी, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, एमपीएम ग्रुप ने संभावित खरीदारों से अपील की कि वे बिल्डरों से केवल दिखावटी सुविधाओं के बजाय उनके अपशिष्ट जल उपचार योजनाओं के बारे में भी पूछें। उन्होंने कहा कि निजी पूल, रेन शावर और जटिल जल संरचनाओं जैसी सुविधाएं जल खपत बढ़ाती हैं, जिससे जिम्मेदार अपशिष्ट जल प्रबंधन आवश्यक हो जाता है ताकि ताजे पानी के संसाधनों और शहरी सीवेज सिस्टम पर दबाव न बढ़े।
मल्लपानी ने जोर देकर कहा कि केवल ट्रीटमेंट प्लांट लगाना पर्याप्त नहीं है, वह उचित आकार का, कार्यशील और नियमित रूप से मेंटेन किया जाना चाहिए। उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) से अपील की कि वे मानकों के अनुसार सीवेज का उपचार discharge या पुन: उपयोग से पहले सुनिश्चित करें और संपत्ति चयन तथा दीर्घकालिक सामुदायिक रखरखाव में अपशिष्ट जल प्रबंधन को प्रमुख मानदंड बनाएं।
विकेंद्रीकृत समाधान की सिफारिश
विवेक पांडे, WASH प्रोफेशनल और गेट्स फाउंडेशन के सलाहकार ने विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों की वकालत की, जो पानी को वहीं प्रोसेस करती हैं जहां वह उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रणालियां, जो अपशिष्ट को लंबी दूरी तक ले जाती हैं, ताजे पानी की मांग और सीवर नेटवर्क पर दबाव बढ़ाती हैं।
पांडे ने लुंबिनी पार्क, हैदराबाद में रिफ्लो मॉडल टॉयलेट का उदाहरण देते हुए ऑन-साइट ट्रीटमेंट और जल पुन: उपयोग की सिफारिश की और शहरी विकास के लिए ऐसे ही उपायों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे समाधान पारंपरिक सीवरेज पर निर्भरता कम कर सकते हैं और जल पुन: उपयोग को टिकाऊ शहरी विकास का हिस्सा बना सकते हैं।
संपूर्ण सेक्टर में सहयोग की जरूरत
चर्चा में यह बात सामने आई कि बिल्डरों को परियोजना की जरूरतों के अनुसार अपशिष्ट जल अवसंरचना की योजना बनानी चाहिए और RWA को संचालन व रखरखाव को अपनी मुख्य जिम्मेदारी मानना चाहिए। घर खरीदारों को सलाह दी गई कि वे केवल लाइफस्टाइल सुविधाओं के बजाय अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र की क्षमता, रखरखाव और पुन: उपयोग योजनाओं के बारे में भी पूछें।
पैनल ने डेवलपर्स, निवासियों, RWA, टेक्नोलॉजी प्रदाताओं और सार्वजनिक प्राधिकरणों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत पर बल दिया ताकि जिम्मेदार जल उपयोग और टिकाऊ आवासीय समुदायों को बढ़ावा मिल सके।
पैनल प्रतिभागी और आयोजक
सत्र का संचालन प्रो. वी. श्रीनिवास चार्य, पूर्व निदेशक, प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) और टी-वर्क्स, दासरा तथा गेट्स फाउंडेशन के सलाहकार, तथा अभिषेक नाथ, संस्थापक, लूकैफे और रिफ्लो ने किया। अन्य पैनलिस्टों में डॉ. टी. के. श्रीदेवी, आईएएस, सचिव, नगर प्रशासन विभाग और आयुक्त एवं निदेशक, नगर प्रशासन, तेलंगाना सरकार; डॉ. जेलालेम बिरहानु ताफेसे, चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस, यूनिसेफ इंडिया; रोहित चंद्रगिरी, FCDO, ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन; और कर्नल एम. चंदन कुमार, प्रमुख, इंजीनियरिंग, टी-वर्क्स शामिल थे। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उदय पिलानी, रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3150 ने भी सभा को संबोधित किया।
यह आयोजन RC1H के पहले दो वर्षों के लिए जल, स्वच्छता और हाइजीन (WASH) पर केंद्रित रहा।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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