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एचएसबीसी सर्वे: संपन्न भारतीय एक साथ कई जीवन चरणों का प्रबंधन कर रहे

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मुंबई, 28 अक्टूबर। एचएसबीसी (HSBC) और इप्सोस एशिया लिमिटेड (Ipsos Asia Limited) द्वारा कराए गए एक नए सर्वे के अनुसार, संपन्न और उच्च-निवल संपत्ति वाले भारतीय एक साथ कई जीवन चरणों का प्रबंधन कर रहे हैं। इनमें करियर में बदलाव, बड़े खरीदारी, अगली पीढ़ी को समर्थन और रिटायरमेंट की योजना शामिल हैं।

इस रिसर्च में 10 बाजारों के 9,993 संपन्न और उच्च-निवल संपत्ति वाले निवेशकों से बात की गई, जिनमें भारत के 1,115 उत्तरदाता शामिल थे। भारतीय निवेशकों में 63 प्रतिशत ने करियर में बदलाव, 51 प्रतिशत ने बड़े जीवन खरीदारी, 46 प्रतिशत ने अगली पीढ़ी को समर्थन देने और 41 प्रतिशत ने रिटायरमेंट प्लानिंग पर ध्यान देने की बात कही।

वित्तीय रणनीतियों में लचीलापन जरूरी

लंबी और जटिल होती जिंदगी के चलते 96 प्रतिशत भारतीय निवेशकों ने अपनी वित्तीय योजनाओं पर पुनर्विचार किया है और 60 प्रतिशत गैर-रेखीय भविष्य की तैयारी कर रहे हैं। अधिकांश उत्तरदाता (89 प्रतिशत) ऐसे वेल्थ सॉल्यूशंस चाहते हैं जो कई जरूरतों को पूरा कर सकें, जबकि 84 प्रतिशत विशेषज्ञ समर्थन की मांग करते हैं। लचीली वित्तीय रणनीति (39 प्रतिशत), दीर्घकालिक विकास से समझौता किए बिना तरलता की उपलब्धता (36 प्रतिशत) और गैर-रेखीय योजना को समझने वाले सलाहकार (36 प्रतिशत) शीर्ष प्राथमिकताएं हैं।

संदीप बत्रा, हेड – इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग, एचएसबीसी इंडिया ने कहा कि परिवारों को ऐसी लचीली योजनाओं की जरूरत है जो बदलती परिस्थितियों के साथ विकसित हों और अगली पीढ़ी को संपत्ति प्रबंधन के लिए तैयार करें।

रिटायरमेंट और विरासत योजना के रुझान

सर्वे के अनुसार, संपन्न भारतीयों ने रिटायरमेंट के लिए औसतन US$0.42 मिलियन की जरूरत बताई, जो 2025 से 6 प्रतिशत अधिक है, लेकिन औसतन केवल 48 प्रतिशत ही बचत की है। रिटायरमेंट को अब एक क्रमिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, 78 प्रतिशत उत्तरदाता लचीले या चरणबद्ध तरीके से काम छोड़ने की उम्मीद करते हैं। 34 प्रतिशत पोर्टफोलियो या एंकोर करियर को पसंद करते हैं, जबकि 22 प्रतिशत पारंपरिक रिटायरमेंट को प्राथमिकता देते हैं।

विरासत योजना भी बदल रही है। 41 प्रतिशत निवेशक विरासत छोड़ने की उम्मीद करते हैं और 34 प्रतिशत को विरासत मिलने की संभावना है, आमतौर पर 51 वर्ष की उम्र में। पीढ़ियों के अनुसार प्राथमिकताएं अलग हैं—69 प्रतिशत लाभदाता घर या सुरक्षा देने पर केंद्रित हैं, जबकि जेन जेड (65 प्रतिशत) और मिलेनियल्स (62 प्रतिशत) विरासत का उपयोग यात्रा, करियर ब्रेक या पैशन प्रोजेक्ट्स के लिए करना चाहते हैं।

शिक्षा और मानव पूंजी पर जोर

भारतीय परिवार अगली पीढ़ी की स्वतंत्रता और लचीलापन बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सर्वे में 81 प्रतिशत निवेशकों ने बच्चों या पोते-पोतियों के व्यक्तिगत विकास का समर्थन किया, 71 प्रतिशत ने औपचारिक शिक्षा और कौशल के लिए फंडिंग की, और 65 प्रतिशत ने करियर या उद्यमिता विकास में समर्थन दिया। विरासत के मामले में, 87 प्रतिशत शिक्षा, वित्तीय साक्षरता और अन्य मानव पूंजी को प्राथमिकता देते हैं, जबकि 64 प्रतिशत बुनियादी संपत्तियों (जैसे घर की डाउन पेमेंट) पर ध्यान देते हैं। लगभग 49 प्रतिशत का मुख्य लक्ष्य उत्तराधिकारियों को पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता के लिए तैयार करना है।

एचएसबीसी एक वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय सेवा संगठन है, जिसकी भारत सहित विश्व के प्रमुख बाजारों में उपस्थिति है।

— कारोबार समाचार ब्यूरो


अस्वीकरण: यह समाचार संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है और इसे एआई टूल्स की सहायता से संपादित किया गया है। कारोबार समाचार विज्ञप्ति में किए गए दावों, आंकड़ों या बयानों की पुष्टि, समर्थन या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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