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इलनेस टू वेलनेस फाउंडेशन ने डायबिटीज रोकथाम पर सम्मेलन आयोजित किया

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नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। इलनेस टू वेलनेस फाउंडेशन (Illness to Wellness Foundation) ने नई दिल्ली में “डायबिटीज केयर में बदलाव: रोकथाम, समय पर कार्रवाई और स्वस्थ भविष्य” विषय पर सम्मेलन आयोजित किया। इसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भारत में बढ़ती डायबिटीज की समस्या से निपटने के लिए समय पर पहचान, इलाज और रोकथाम संबंधी रणनीतियों पर चर्चा की।

सम्मेलन में डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए सुलभ और किफायती इलाज, प्रमाण-आधारित जीवनशैली में बदलाव, तकनीकी नवाचार और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने समय पर निदान और बेहतर प्रबंधन के लिए मजबूत नीतियों, सामुदायिक भागीदारी और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण की मांग की।

रोकथाम और समय पर कार्रवाई पर विशेषज्ञों की राय

डॉ. सुभाष वांगनू, वरिष्ठ सलाहकार एवं प्रमुख, अपोलो सेंटर फॉर ओबेसिटी, डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली ने कहा कि डायबिटीज केयर में बदलाव के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पुनर्रचना जरूरी है ताकि हस्तक्षेप सीधे लोगों तक उनकी जीवनशैली के अनुरूप पहुंचे। उन्होंने कहा कि रोकथाम, समय पर निदान और दीर्घकालिक प्रबंधन केवल विशेषज्ञ क्लीनिक तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य प्रणाली, सामुदायिक कार्यक्रमों और प्राथमिक देखभाल सेवाओं तक पहुंचना चाहिए।

पद्मश्री प्रो. (डॉ.) शशांक आर. जोशी, सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, लीलावती अस्पताल, सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल और जोशी क्लिनिक, मुंबई ने कहा कि रोकथाम और समय पर पहचान को मानक प्रथा बनाना चाहिए, खासकर बच्चों में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देकर। उन्होंने किफायती और सुलभ इलाज, विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी और सभी हितधारकों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता बताई तथा डायबिटीज को राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौती बताया।

जीवनशैली, पोषण और सामुदायिक सहयोग पर फोकस

डॉ. भारती कुलकर्णी, निदेशक, आईसीएमआर – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने बताया कि भारतीयों में डायबिटीज का खतरा बदलती खानपान और गतिविधि की आदतों के कारण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शारीरिक गतिविधि में कमी, मोटापा बढ़ाने वाले आहार, पर्याप्त नींद की कमी और तनाव प्रबंधन की कमी डायबिटीज के मामलों में वृद्धि का कारण हैं।

अनिल राजपूत, चेयरपर्सन, एडवाइजरी काउंसिल, इलनेस टू वेलनेस फाउंडेशन ने कहा कि रोकथाम व्यावहारिक होनी चाहिए, समय पर कार्रवाई आसान हो और सतत देखभाल अधिक मानवीय हो। उन्होंने जागरूकता से समय पर निदान और इलाज तक लोगों को पहुंचाने, लागत, दूरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसी बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता बताई।

तकनीक, समन्वित देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली पर सत्र

सम्मेलन में दो सत्र आयोजित हुए। पहला सत्र “डायबिटीज और मल्टी-ऑर्गन हेल्थ: टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंटीग्रेटेड केयर” विषय पर था, जिसका संचालन डॉ. राजेश केसरी, सदस्य, नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी, आरएसएसडीआई ने किया। इसमें डॉ. सौरव बसु, वैज्ञानिक-ई, आईसीएमआर–नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन डिजिटल हेल्थ; डॉ. संजीव सक्सेना, चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी विभाग, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली; डॉ. अशुतोष शुक्ला, वरिष्ठ निदेशक, इंटरनल मेडिसिन एवं मेडिकल एडवाइजर, मैक्स अस्पताल, गुरुग्राम एवं मेडिकल डायरेक्टर, प्रणा सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन; तथा डॉ. अंचल गुप्ता, संस्थापक, नेत्रम आई फाउंडेशन शामिल रहे। सत्र में डायबिटीज की जटिलताओं जैसे हृदय, किडनी, आंख, लिवर और नसों पर असर, तकनीक आधारित देखभाल, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बहु-आयामी इलाज और सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर चर्चा हुई।

दूसरा सत्र “डायबिटीज रोकथाम और प्रबंधन में बदलाव: हेल्दी लिविंग, स्मार्ट न्यूट्रिशन और समय पर कार्रवाई” विषय पर था, जिसका संचालन डॉ. शबाना परवीन, क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स विभाग, आर्टेमिस अस्पताल, गुरुग्राम ने किया। वक्ताओं में डॉ. भारती कुलकर्णी; आचार्य मनीष जी, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विशेषज्ञ; डॉ. बृज मोहन मक्कड़, डायबिटोलॉजिस्ट एवं बेरियाट्रिक फिजिशियन, अध्यक्ष, एआईएएआरओ और चेयर, इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की ओबेसिटी टास्क फोर्स; डॉ. शिखा शर्मा, साइंटिफिक मेंटर, रैनफोर्ट वेलनेस; और पूर्णिमा जोशी, वेलनेस एक्सपर्ट एवं योग कोच शामिल रहे। सत्र में समय पर पहचान, संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, सतत जीवनशैली परिवर्तन, मोटापा, मेटाबॉलिक हेल्थ, समग्र देखभाल, भावनात्मक स्वास्थ्य और सामुदायिक पहलों पर चर्चा हुई, जिसमें महिलाओं, बच्चों, गर्भावधि डायबिटीज और बचपन के मोटापे पर विशेष ध्यान दिया गया।

समन्वित और सामुदायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता

प्रो. निर्मल कुमार गांगुली, पूर्व महानिदेशक, आईसीएमआर एवं सदस्य, गवर्निंग काउंसिल, इलनेस टू वेलनेस फाउंडेशन ने निष्कर्ष में कहा कि डायबिटीज से निपटने के लिए समय पर पहचान, रोकथाम और सतत सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक में प्रगति से जोखिम और जटिलताओं की पहचान पहले हो पा रही है, लेकिन प्रभावी डायबिटीज प्रबंधन के लिए जीवनशैली में बदलाव और सामुदायिक हस्तक्षेप जरूरी हैं।

— कारोबार समाचार ब्यूरो


अस्वीकरण: यह समाचार संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है और इसे एआई टूल्स की सहायता से संपादित किया गया है। कारोबार समाचार विज्ञप्ति में किए गए दावों, आंकड़ों या बयानों की पुष्टि, समर्थन या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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