मुंबई, 28 अक्टूबर। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (एनबीबीएल) ने नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) की सहायक कंपनी एनएबीएआरडी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एनएबीएफआईएनएस) को भारत कनेक्ट के लोन रिपेमेंट श्रेणी में शामिल किया है।
इस एकीकरण को केनरा बैंक ने बिलर ऑपरेटिंग यूनिट (BOU) के रूप में सुगम बनाया है। इसके तहत 19 राज्यों के एक लाख से अधिक एनएबीएफआईएनएस ग्राहकों को अब 1,000 से अधिक बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स तथा देशभर के आठ लाख से अधिक एजेंट आउटलेट्स के माध्यम से अपने ऋण की ईएमआई और बकाया किस्तें चुकाने की सुविधा मिलेगी। इससे माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ताओं के लिए चुकौती के विकल्प बढ़े हैं, जो पहले सीमित डिजिटल टचपॉइंट्स तक सीमित थे।
डिजिटल और असिस्टेड चुकौती का विस्तार
भारत कनेक्ट के इंटरऑपरेबल नेटवर्क के जरिए अब एनएबीएफआईएनएस के ग्राहक नियमित और छूटी हुई ईएमआई का भुगतान डिजिटल और असिस्टेड दोनों चैनलों से कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य चुकौती प्रक्रिया को आसान बनाना, विलंब को कम करना और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के ग्राहकों के लिए सुविधा बढ़ाना है।
यह ऑनबोर्डिंग डिजिटल और असिस्टेड ऋण चुकौती विकल्पों के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो भारत कनेक्ट की वित्तीय समावेशन में सुरक्षित और इंटरऑपरेबल पेमेंट सेवाओं की भूमिका को मजबूत करती है।
एकीकरण पर हितधारकों की राय
डॉ. वाई हरगोपाल, प्रबंध निदेशक, एनएबीएफआईएनएस ने कहा, “एनपीसीआई भारत कनेक्ट के साथ यह साझेदारी वंचित समुदायों को निर्बाध, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटल पेमेंट समाधान देने की दिशा में एक कदम है।” सुनील कुमार चुग, कार्यकारी निदेशक, केनरा बैंक ने इसे माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में डिजिटल ऋण चुकौती सक्षम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और बैंक की डिजिटल नवाचार व वित्तीय समावेशन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. नूपुर चतुर्वेदी, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, एनबीबीएल ने कहा कि यह विकास ऋण चुकौती को और सुलभ बनाएगा और कंपनी के वित्तीय पहुंच और डिजिटल अपनाने के विस्तार के फोकस को समर्थन देगा।
ऋण चुकौती श्रेणी में वृद्धि
भारत कनेक्ट के लोन रिपेमेंट श्रेणी में अब 400 से अधिक बिलर शामिल हो चुके हैं, जिनमें बैंक, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थान (एमएफआई) हैं। वित्त वर्ष 2026-2027 की पहली छमाही में इस श्रेणी में 18.8 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹1.23 लाख करोड़ रहा। इसमें ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 18 प्रतिशत और वैल्यू में 31 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
संगठनों के बारे में
एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (एनबीबीएल), एनपीसीआई की सहायक कंपनी है, जो बिल भुगतान और कलेक्शन के लिए एकीकृत, इंटरऑपरेबल इकोसिस्टम उपलब्ध कराती है। एनएबीएफआईएनएस, नाबार्ड की सहायक कंपनी है, जो पूरे भारत में माइक्रोफाइनेंस ग्राहकों को सेवा देती है। इस एकीकरण में केनरा बैंक ने बिलर ऑपरेटिंग यूनिट की भूमिका निभाई।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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