इंडियनऑयल की नई पहल से क्या बदलने वाला है? क्या जल्द ही भोपाल समेत दूसरे शहरों में भी मिलेगी 4 घंटे में गैस? कारोबार समाचार की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली। अगर आप ऑनलाइन खाना मंगाते हैं, 10 मिनट में किराना घर पहुंच जाता है या मोबाइल पर एक क्लिक करते ही टैक्सी आपके दरवाजे पर आ जाती है, तो अब तैयार हो जाइए एक और बदलाव के लिए।
संभव है कि आने वाले समय में एलपीजी गैस सिलेंडर भी उसी तेजी से आपके घर पहुंचे, जैसे आज किराना या दवाइयां पहुंचती हैं।
देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियनऑयल ने हाल ही में 10 किलोग्राम के कम्पोजिट एलपीजी सिलेंडर ‘इंडेन एक्स्ट्रालाइट नाउ’ और 5 किलोग्राम ‘छोटू’ सिलेंडर के लिए 4 घंटे में एक्सप्रेस डिलीवरी शुरू की है। फिलहाल यह सेवा कुछ चुनिंदा शहरों में शुरू हुई है, लेकिन इसका असर पूरे एलपीजी बाजार पर पड़ सकता है।
यह सिर्फ एक नया सिलेंडर लॉन्च नहीं है। यह उस सोच में बदलाव का संकेत है, जिसमें गैस सिलेंडर को अब केवल ईंधन नहीं बल्कि एक तेज, सुविधाजनक और डिजिटल सेवा के रूप में देखा जा रहा है।
अब सवाल सिर्फ गैस का नहीं, समय का है
कुछ साल पहले तक गैस सिलेंडर बुक करने के बाद एक-दो दिन इंतजार करना सामान्य बात थी। कई बार त्योहारों या अधिक मांग के समय यह इंतजार और भी लंबा हो जाता था।
लेकिन अब लोगों की आदतें बदल चुकी हैं।
आज उपभोक्ता चाहते हैं—
- ऑनलाइन बुकिंग
- तुरंत पुष्टि
- लाइव ट्रैकिंग
- तय समय पर डिलीवरी
- कम से कम इंतजार
यही कारण है कि इंडियनऑयल ने एलपीजी वितरण को भी आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
आखिर 10 किलो वाला सिलेंडर ही क्यों?
कई लोगों के मन में यह सवाल है कि कंपनी ने सीधे 14.2 किलो वाले सामान्य घरेलू सिलेंडर के बजाय 10 किलो वाले कम्पोजिट सिलेंडर से शुरुआत क्यों की?
इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं।
सबसे पहला कारण है कम वजन।
स्टील के सिलेंडर की तुलना में कम्पोजिट सिलेंडर काफी हल्का होता है। इसे उठाना आसान है। खासकर—
- बुजुर्गों के लिए
- महिलाओं के लिए
- ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए
- छोटे परिवारों के लिए
इसके अलावा यह सिलेंडर जंग नहीं पकड़ता और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी अर्ध-पारदर्शी बॉडी से बिना किसी उपकरण के यह देखा जा सकता है कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है।
यानी अब अचानक खाना बनाते समय गैस खत्म होने की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
क्या 14.2 किलो वाला सिलेंडर बंद हो जाएगा?
नहीं।
कम से कम अभी ऐसी कोई संभावना नहीं है।
भारत में करोड़ों परिवार आज भी 14.2 किलो वाले पारंपरिक घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं। निकट भविष्य में यह व्यवस्था जारी रहेगी।
दरअसल, 10 किलो कम्पोजिट सिलेंडर एक वैकल्पिक उत्पाद है। इसका उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को विकल्प देना है जिन्हें हल्का, सुविधाजनक और आधुनिक सिलेंडर चाहिए।
क्या भोपाल में भी शुरू होगी यह सुविधा?
यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।
अभी तक इंडियनऑयल ने भोपाल में इस सेवा की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
फिलहाल इसकी शुरुआत पुणे, गुरुग्राम, इंदौर और कोयंबटूर से हुई है। इसके बाद कंपनी की योजना चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में विस्तार करने की है।
भोपाल जैसे बड़े शहर इस विस्तार सूची में शामिल हो सकते हैं, लेकिन जब तक आधिकारिक घोषणा न हो, इसे लेकर कोई दावा करना उचित नहीं होगा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती शहरों में यह प्रयोग सफल रहता है, तो मध्य प्रदेश के अन्य बड़े शहरों तक भी यह सेवा पहुंच सकती है।
क्या इससे गैस बाजार में नई प्रतिस्पर्धा शुरू होगी?
भारत में घरेलू एलपीजी बाजार पर तीन बड़ी सरकारी कंपनियों का दबदबा है—
- इंडियनऑयल (इंडेन)
- भारत पेट्रोलियम (भारत गैस)
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी गैस)
अब तक तीनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से वितरण नेटवर्क और उपलब्धता को लेकर रही है।
लेकिन यदि ग्राहक तेज डिलीवरी को पसंद करते हैं, तो संभव है कि आने वाले समय में दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही सेवाएं शुरू करें।
यानी पहली बार एलपीजी बाजार में “कौन पहले गैस पहुंचाएगा” भी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन सकता है।
क्या यह भविष्य की शुरुआत है?
आज शहरों में लोग समय बचाने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने को तैयार हैं।
क्विक कॉमर्स, फूड डिलीवरी, ऑनलाइन टैक्सी, इंस्टेंट ग्रोसरी—इन सबने लोगों की सोच बदल दी है।
अब सुविधा भी एक उत्पाद बन चुकी है।
इसी बदलाव को देखते हुए इंडियनऑयल ने एलपीजी सेवा को नए रूप में पेश करने की कोशिश की है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
(भाग-1 समाप्त। भाग-2 में पढ़िए—क्या यह सेवा महंगी होगी? क्या दूसरी कंपनियां भी ऐसा करेंगी? 10 किलो कम्पोजिट सिलेंडर लेना आपके लिए फायदे का सौदा है या नहीं? और कारोबार समाचार का विशेष विश्लेषण कि अगले पांच वर्षों में भारत का एलपीजी बाजार किस दिशा में जा सकता है।)




