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बैंक ने बिना अनुमति किसी को दे दी आपके खाते की जानकारी? जानिए आपके अधिकार, SBI को ₹25,000 चुकाने का आदेश

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sbi shared personal information of customer

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नई दिल्ली। अगर कोई बैंक आपकी अनुमति के बिना आपके निजी सेविंग अकाउंट की जानकारी आपके नियोक्ता, पूर्व नियोक्ता या किसी अन्य तीसरे पक्ष को दे देता है, तो यह बैंकिंग सेवा में गंभीर कमी मानी जा सकती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला उपभोक्ता आयोग के एक फैसले ने बैंक ग्राहकों की गोपनीयता से जुड़े इस महत्वपूर्ण सवाल पर स्पष्ट संदेश दिया है।

आयोग ने एक ग्राहक के निजी बचत खाते की जानकारी उसके पूर्व नियोक्ता के साथ साझा करने के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की दो शाखाओं को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने दोनों शाखाओं को संयुक्त रूप से ग्राहक को ₹20,000 मुआवजा और ₹5,000 कानूनी खर्च देने का आदेश दिया। इसके अलावा ₹20,000 की मुआवजा राशि पर शिकायत दाखिल करने की तारीख 26 जुलाई 2022 से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया।

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता पंकज कुमार शुक्ला पहले गोविंद शुगर मिल में काम करते थे। उनका एक निजी बचत खाता SBI की हरगांव शाखा, जिला सीतापुर में था।

इसी दौरान शुक्ला और उनके पूर्व नियोक्ता गोविंद शुगर मिल के बीच श्रम विवाद चल रहा था। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में लंबित था।

शिकायत के अनुसार, इस कानूनी विवाद के दौरान मिल की ओर से एक हलफनामा पेश किया गया, जिसमें शुक्ला के हरगांव शाखा वाले बैंक खाते का स्टेटमेंट शामिल था।

यहीं से विवाद शुरू हुआ।

शुक्ला का कहना था कि उन्होंने अपने निजी सेविंग अकाउंट की जानकारी पूर्व नियोक्ता के साथ साझा करने के लिए बैंक को कोई अनुमति नहीं दी थी।

बैंक ने माना—मिल के अनुरोध पर दिया गया था स्टेटमेंट

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि SBI की लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा ने 21 जुलाई 2022 के जवाब में स्वीकार किया कि गोविंद शुगर मिल के अनुरोध पर खाते का स्टेटमेंट साझा किया गया था।

बैंक की दलील थी कि शुक्ला पहले मिल के कर्मचारी थे और मिल का सैलरी अकाउंट भी SBI की मुख्य शाखा में था। इसी व्यवस्था के जरिए कर्मचारियों को वेतन दिया जाता था।

बैंक के अनुसार, मिल ने 9 नवंबर 2021 को वेतन रिकॉर्ड के मिलान के लिए अकाउंट स्टेटमेंट मांगा था। इसलिए बैंक ने जानकारी साझा करने को उचित बताया।

लेकिन उपभोक्ता आयोग इस दलील से सहमत नहीं हुआ।

सबसे अहम बात: Salary Account अलग था, Personal Savings Account अलग

आयोग के सामने यह तथ्य आया कि शिकायतकर्ता का एक अलग खाता SBI की लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा में भी था, जिसमें मिल से मिलने वाला वेतन आता था।

विवाद उस खाते को लेकर नहीं था।

विवाद SBI की हरगांव शाखा में मौजूद निजी सेविंग अकाउंट को लेकर था, जिसका शिकायतकर्ता के वेतन या नियोक्ता से कोई संबंध नहीं था।

आयोग ने इसी अंतर को महत्वपूर्ण माना।

आयोग ने क्या कहा?

आयोग की पीठ में अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव तथा सदस्य डॉ. आलोक कुमार शर्मा और जूही कुद्दूसी शामिल थे।

आयोग ने माना कि ग्राहक की सहमति के बिना उसके निजी बैंक खाते की जानकारी तीसरे पक्ष के साथ साझा करना बैंकिंग नियमों के अनुरूप नहीं था।

आयोग के अनुसार, हरगांव शाखा का खाता शिकायतकर्ता का निजी खाता था और उसका पूर्व नियोक्ता के धन या वेतन भुगतान से कोई संबंध नहीं था। ऐसे में उसकी जानकारी बिना अनुमति तीसरे पक्ष को देना गलत था।

इस आधार पर SBI की हरगांव शाखा और लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना गया।

SBI को कितना भुगतान करना होगा?

आयोग ने दोनों संबंधित शाखाओं को संयुक्त रूप से भुगतान करने का आदेश दिया:

  • ₹20,000 मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा
  • ₹5,000 कानूनी खर्च
  • ₹20,000 की मुआवजा राशि पर 26 जुलाई 2022 से वास्तविक भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज

आयोग ने यह भी कहा कि आदेश का पालन नहीं होने पर शिकायतकर्ता इसे लागू कराने के लिए कानूनी कदम उठा सकता है।

आपके लिए इस फैसले का क्या मतलब है?

यह मामला हर बैंक ग्राहक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका सबसे बड़ा संदेश यह है कि आपका निजी सेविंग अकाउंट केवल लेन-देन का माध्यम नहीं, बल्कि आपकी संवेदनशील वित्तीय जानकारी का रिकॉर्ड भी है।

आपके बैंक स्टेटमेंट से कई निजी बातें सामने आ सकती हैं, जैसे:

  • आपकी आय कितनी है
  • आप पैसा कहां खर्च करते हैं
  • किसे भुगतान करते हैं
  • आपके पास कितना बैलेंस रहता है
  • आपने किससे पैसा लिया या किसे भेजा
  • आपकी आर्थिक स्थिति कैसी है

इसलिए बैंक खाते की जानकारी का अनधिकृत खुलासा गंभीर मामला हो सकता है।

अगर बैंक आपकी जानकारी बिना अनुमति साझा करे तो क्या करें?

अगर आपको संदेह है कि बैंक ने आपकी निजी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति, कंपनी या संस्था को बिना अनुमति दिया है, तो ये कदम उठाए जा सकते हैं:

1. बैंक से लिखित जवाब मांगें

सिर्फ मौखिक शिकायत न करें। ईमेल या लिखित आवेदन देकर पूछें कि जानकारी किस आधार पर साझा की गई।

2. शिकायत संख्या जरूर लें

हर शिकायत का reference number सुरक्षित रखें।

3. Branch Manager को शिकायत दें

शाखा स्तर पर लिखित शिकायत की प्रति अपने पास रखें।

4. बैंक के Grievance Redressal Officer तक मामला ले जाएं

अगर शाखा से समाधान न मिले तो बैंक की औपचारिक शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें।

5. जरूरत पड़ने पर RBI की शिकायत व्यवस्था देखें

यदि बैंक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शिकायत का समाधान नहीं करता, तो पात्र मामलों में RBI की शिकायत निवारण व्यवस्था का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

6. उपभोक्ता आयोग का विकल्प समझें

सेवा में कमी और वास्तविक नुकसान या मानसिक परेशानी के मामलों में परिस्थितियों के अनुसार उपभोक्ता आयोग का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है।

काम की बात

आपका निजी बैंक अकाउंट स्टेटमेंट सामान्य कागज नहीं है। यह संवेदनशील वित्तीय जानकारी है। किसी नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता का आपसे संबंध होना अपने-आप उसे आपके हर निजी बैंक खाते की जानकारी पाने का अधिकार नहीं देता।

अगर कभी ऐसी स्थिति सामने आए तो मौखिक बहस के बजाय दस्तावेज, ईमेल, बैंक के जवाब और शिकायत संख्या सुरक्षित रखना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

नोट: यह खबर उपलब्ध मामले और उपभोक्ता आयोग के आदेश से संबंधित विवरण पर आधारित है। अलग-अलग परिस्थितियों में कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। किसी व्यक्तिगत विवाद में उचित विशेषज्ञ सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

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