भोपाल, 29 जून। आधुनिक सर्जिकल शिक्षा को नई ऊंचाई देने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान में सोमवार को अत्याधुनिक ‘सुश्रुत कॉमन एंडोट्रेनर फैसिलिटी’ का शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों, रेजिडेंट डॉक्टरों और सर्जनों को लेप्रोस्कोपिक, एंडोस्कोपिक तथा अन्य जटिल शल्य तकनीकों का सुरक्षित और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
फैसिलिटी का उद्घाटन एम्स भोपाल के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार महापात्र ने किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर, डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी, उप निदेशक (प्रशासन) संदेश कुमार जैन तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
नई सुविधा में मोटराइज्ड एंडोट्रेनर सिम्युलेटर, नॉटिंग एवं स्यूचरिंग किट तथा वैस्कुलर एनास्टोमोसिस किट जैसी अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इनकी सहायता से प्रशिक्षु लेप्रोस्कोपी, एंडोस्कोपी, टांके लगाने, रक्त वाहिकाओं को जोड़ने (वैस्कुलर एनास्टोमोसिस) तथा अन्य जटिल शल्य प्रक्रियाओं का बार-बार अभ्यास कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार इस सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण से डॉक्टर वास्तविक मरीज पर किसी प्रकार का जोखिम उठाए बिना अपनी तकनीकी दक्षता, हाथों की सटीकता, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास विकसित कर सकेंगे। इससे भविष्य में मरीजों को अधिक सुरक्षित, सटीक और गुणवत्तापूर्ण सर्जिकल उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सुश्रुत के नाम पर क्यों रखा गया यह प्रशिक्षण केंद्र
इस सुविधा का नाम आयुर्वेद के महान आचार्य महर्षि सुश्रुत के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें विश्वभर में ‘फादर ऑफ सर्जरी’ (शल्य चिकित्सा के जनक) के रूप में जाना जाता है। लगभग 2,500 वर्ष पूर्व रचित सुश्रुत संहिता में 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाओं और 120 से अधिक शल्य उपकरणों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें नाक के पुनर्निर्माण (राइनोप्लास्टी/प्लास्टिक सर्जरी), मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा, फ्रैक्चर प्रबंधन, घावों का उपचार, मूत्राशय की पथरी निकालने, प्रसूति एवं स्त्री रोग संबंधी शल्य प्रक्रियाओं सहित अनेक जटिल ऑपरेशनों का उल्लेख है। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा के विद्यार्थियों को पहले मॉडल, फल-सब्जियों और मृत शरीरों पर अभ्यास कराने की अवधारणा भी दी थी, जिसे आज की आधुनिक सर्जिकल सिमुलेशन ट्रेनिंग का प्रारंभिक स्वरूप माना जाता है।
एम्स भोपाल का मानना है कि ‘सुश्रुत कॉमन एंडोट्रेनर फैसिलिटी’ उसी वैज्ञानिक परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है। संस्थान का कहना है कि यह पहल कौशल-आधारित चिकित्सा शिक्षा को और मजबूत करेगी तथा भविष्य के सर्जनों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




