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राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर मेडिकल शिक्षकों का PM मोदी को पत्र: चिकित्सा शिक्षा में “गंभीर गिरावट” का आरोप

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श्योपुर मेडिकल कॉलेज का हवाला, NMC अधिकारियों पर CBI की FIR, नियामक बोर्ड में 14 पद रिक्त — स्वतंत्र ऑडिट और सख्त कार्रवाई की मांग

भोपाल, 27 जून 2026। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA), मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश और विशेष रूप से मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के स्तर में तेजी से आ रही गिरावट पर गंभीर चिंता जताई है। PMTA प्रदेश के समस्त शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सा शिक्षकों की पंजीकृत संस्था है।

एसोसिएशन ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया है कि देशभर में मेडिकल कॉलेज बिना न्यूनतम संसाधनों और आवश्यक फैकल्टी के “अनियोजित रूप से” खोले जा रहे हैं।

“ज़्यादा नहीं, अच्छे डॉक्टर चाहिए”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने बताया कि भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात वर्तमान में 1:811 है, जो WHO के अनुशंसित 1:1000 से बेहतर है। संस्था ने यह भी रेखांकित किया कि WHO की आधुनिक कार्ययोजना अब केवल डॉक्टर अनुपात के बजाय पूरे स्वास्थ्य कार्यबल — डॉक्टर, नर्स, दाई और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों — की उपलब्धता पर जोर देती है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा, “हमें अच्छे चिकित्सक बनाने की जरूरत है, ना कि सिर्फ ज़्यादा चिकित्सकों की।” उनके अनुसार बिना ठोस योजना के मेडिकल कॉलेजों का विस्तार प्रशिक्षण की गुणवत्ता से समझौता कर रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम जनस्वास्थ्य पर पड़ सकते हैं।

श्योपुर मेडिकल कॉलेज बना उदाहरण

पत्र में विशेष रूप से श्योपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा हाल ही में लिखे गए एक खुले पत्र का हवाला दिया गया है, जिसे एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा की “जमीनी सच्चाई” उजागर करने वाला बताया। विद्यार्थियों ने कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण के लिए संसाधनों के अभाव और क्लिनिकल प्रशिक्षण हेतु पर्याप्त मरीज न होने की शिकायत की थी।

चौंकाने वाला दावा यह है कि पिछले एक वर्ष में निर्धारित लगभग 180 प्रैक्टिकल कक्षाओं के मुकाबले मात्र 1 कक्षा आयोजित हुई। एसोसिएशन ने इसे विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान के लिए “अत्यंत चिंताजनक” स्तर बताया, जिसका सीधा असर भविष्य में मरीजों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

NMC पर भ्रष्टाचार के आरोप

एसोसिएशन ने कहा कि NMC की भूमिका फिलहाल “अत्यंत संदेहास्पद” है। पत्र में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा NMC के कई वरिष्ठ अधिकारियों और निरीक्षण दल के सदस्यों के खिलाफ दर्ज FIR का हवाला दिया गया है। आरोप है कि निरीक्षण से पहले गोपनीय तिथियाँ लीक की गईं, जिससे संस्थान निरीक्षण के दिन “Ghost Faculty” (फर्जी शिक्षक) और “कागजी मरीज” दिखाकर औपचारिकता पूरी कर सके।

पत्र में कहा गया है, “यदि यह सत्य है, तो यह केवल NMC की प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश के स्वास्थ्य और उसके भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।”

नियामक बोर्ड में 20 में से 14 पद खाली

एसोसिएशन ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के चार ऑटोनॉमस बोर्ड — यूजी बोर्ड, पीजी बोर्ड, MARB बोर्ड और एथिक्स बोर्ड — के कुल 20 पदों में से 14 पद रिक्त पड़े हैं। वर्तमान में कार्यरत मात्र 4 चिकित्सकों में से भी 3 पार्ट टाइम आधार पर काम कर रहे हैं और केवल 1 चिकित्सक नियमित सदस्य है।

एसोसिएशन ने इसे “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया, क्योंकि यही आयोग देश के 850 से अधिक मेडिकल कॉलेजों को मान्यता और स्वीकृति देने का जिम्मेदार है।

PMTA की प्रमुख मांगें

एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. स्वतंत्र उच्चस्तरीय ऑडिट — देश और मध्य प्रदेश के सभी नए मेडिकल कॉलेजों का फिजिकल, शैक्षणिक एवं बायोमेट्रिक ऑडिट फिर से कराया जाए।
  2. भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई — रिश्वत लेकर अयोग्य संस्थानों को मान्यता देने वाले अधिकारियों को बर्खास्त कर उन पर कानूनी कार्रवाई हो, और NMC के रिक्त पदों पर ईमानदार, दूरदर्शी चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए।
  3. संसाधन-आधारित स्वीकृति नीति — मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को निर्देशित किया जाए कि पर्याप्त भवन, प्रयोगशाला, अस्पताल सुविधाएँ और योग्य फैकल्टी के बिना किसी नए मेडिकल कॉलेज को अनुमति न दी जाए।

पत्र में लिखा गया है, “यह केवल चिकित्सा शिक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के स्वास्थ्य तंत्र और करोड़ों नागरिकों के जीवन से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का विषय है। यदि समय रहते कठोर, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं।”

एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप, निष्पक्ष जांच और आवश्यक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।

कारोबार समाचार ब्यूरो

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