हैदराबाद, 17 अक्टूबर। रोटरी क्लब ऑफ वन हैदराबाद (Rotary Club of One Hyderabad) ने अपनी चार्टर प्रेजेंटेशन सेरेमनी की पूर्व संध्या पर “स्वच्छता: एक सुपर वैक्सीन” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की, जिसमें विशेषज्ञों ने स्वच्छता को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने के लिए निवेश, तकनीकी नवाचार और व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।
यह कार्यक्रम हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित द लीला में आयोजित हुआ, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विकास क्षेत्र के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए। चर्चा में तेजी से शहरीकरण वाले समुदायों में बेहतर स्वच्छता प्रणालियों और सामूहिक जिम्मेदारी से स्वास्थ्य परिणामों में बदलाव लाने के उपायों पर विचार किया गया।
व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर
पैनल चर्चा का संचालन प्रो. वी. श्रीनिवास चार्य, पूर्व निदेशक, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया और टी-वर्क्स, दसरा व गेट्स फाउंडेशन के सलाहकार, तथा लू कैफे और रीफ्लो के संस्थापक अभिषेक नाथ ने किया। प्रो. चार्य ने कहा कि जापान जैसे देशों में स्वच्छता को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से भी पहले प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने भारत में विकास की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार कर स्वच्छता को स्वस्थ समाज की नींव के रूप में देखने की आवश्यकता बताई।
डॉ. टी. के. श्रीदेवी, आईएएस, सचिव, नगर प्रशासन विभाग और आयुक्त एवं निदेशक, नगर प्रशासन (CDMA), तेलंगाना सरकार ने स्वच्छता की जिम्मेदारी को लेकर अस्पष्टता की ओर इशारा किया, जिससे यह विषय अक्सर पीछे छूट जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के स्वच्छता पर दिए गए जोर को याद करते हुए “फ्लश एंड फॉरगेट” सोच से बाहर निकलकर निवेश बढ़ाने और सतत व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता बताई।
स्वच्छता को ‘सुपर वैक्सीन’ बताया
डॉ. जेलालेम बिरहानु ताफेसे, चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस, यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) ने स्वच्छता को “सुपर वैक्सीन” बताते हुए कहा कि प्रभावी स्वच्छता और हाथ धोने से बीमारियों की रोकथाम और समुदायों की सुरक्षा संभव है। उन्होंने पोलियो के खिलाफ उत्तर प्रदेश और बिहार में यूनिसेफ के साथ रोटरी के सहयोग का उल्लेख करते हुए बताया कि रोटरी ने 7,000 से अधिक स्वयंसेवकों को जोड़ा, जिससे सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
विवेक पांडे, वॉश प्रोफेशनल और गेट्स फाउंडेशन के सलाहकार ने स्वच्छता तकनीक में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कई शहर आज भी 160 साल पुरानी प्रणालियों पर निर्भर हैं। उन्होंने विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार और पुन: उपयोग की वकालत की, और हैदराबाद के लुंबिनी पार्क स्थित रीफ्लो मॉडल टॉयलेट का उदाहरण दिया, जहां अपशिष्ट जल का स्थल पर ही उपचार कर पुन: उपयोग किया जाता है, जिससे पारंपरिक सीवेज सिस्टम पर निर्भरता कम होती है।
आवासीय क्षेत्रों में टिकाऊ स्वच्छता
गिरीश मल्लपानी, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, एमपीएम ग्रुप (MPM Group) ने आवासीय समुदायों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और अपशिष्ट जल प्रबंधन की महत्ता बताई। उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से इन प्रणालियों के रखरखाव और पर्याप्तता सुनिश्चित करने का आग्रह किया तथा लग्जरी घर खरीदते समय होमबायर्स को अपशिष्ट जल उपचार योजनाओं के बारे में जानकारी लेने की सलाह दी।
कर्नल एम. चंदन कुमार, हेड ऑफ इंजीनियरिंग, टी-वर्क्स (T-Works) ने किफायती और बड़े स्तर पर अपनाई जा सकने वाली स्वच्छता तकनीकों की आवश्यकता पर बल दिया और नवाचार तथा व्यापक अपनाने के बीच की दूरी पाटने की बात कही।
विकास लक्ष्यों पर स्वच्छता का व्यापक प्रभाव
रोहित चंद्रगिरी, ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन (FCDO) ने बताया कि स्वच्छता का सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव संयुक्त राष्ट्र के 169 सतत विकास लक्ष्यों में से 130 पर पड़ता है, जिससे यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
जिला गवर्नर उदय पिलानी, रोटरी जिला 3150 ने सामुदायिक सेवा के प्रति रोटरी की प्रतिबद्धता दोहराई और स्वच्छता के लिए सरकार, उद्योग, नागरिक समाज और समुदायों के बीच सहयोग का आह्वान किया।
पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि स्वच्छता में स्थायी बदलाव के लिए अवसंरचना, तकनीक, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण, व्यवहार परिवर्तन और संस्थागत सहयोग का समग्र दृष्टिकोण जरूरी है, जिसमें सभी हितधारकों की समन्वित भागीदारी हो।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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