स्वास्थ्य
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FSSAI की बड़ी कार्रवाई: Kinder Joy से Saffola तक — 14 फूड ब्रांड्स को नोटिस, भ्रामक दावों पर शिकंजा
आप जो खाना खरीद रहे हैं, क्या उस पर लिखी बातें सच हैं? भारत के खाद्य नियामक FSSAI…
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चिकित्सा अनुसंधान में एम्स भोपाल की बड़ी छलांग, देश में दूसरे सबसे तेज़ प्रगति करने वाले संस्थान का दर्जा
भोपाल। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल…
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बार-बार डायपर नहीं बदलना पड़ सकता है भारी, एम्स भोपाल के शोध में सामने आई अहम बातें
भोपाल। छोटे बच्चों को डायपर पहनाना आज लगभग हर परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लेकिन…
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एम्स भोपाल में 119 बच्चों को कराया गया स्वर्ण प्राशन
एम्स भोपाल स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम में पुष्य नक्षत्र पर 119 बच्चों को शुद्ध स्वर्ण भस्म चटाई गई। आयुष…
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स्वीडन में ESCMID के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के विशेषज्ञ की भागीदारीमातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यूरोपियन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज़ (ESCMID) द्वारा 10–12 जून 2026 को लुंड, स्वीडन में “Two…
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हेल्दी एजिंग, पोषण, आधुनिक डायग्नोस्टिक्स और ‘जीरो सिंगल-यूज़ वेस्ट’ के संदेश के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस संपन्न
सागर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर डॉ. सुमित कुमार रावत एवं नीमा (NIMA) सागर के संयुक्त तत्वावधान…
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भोपाल दुग्ध संघ में हुआ योग सत्र आयोजित
भोपाल, 21 जून। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भोपाल दुग्ध संघ परिसर में विशेष योग सत्र का…
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विश्व रक्तदाता दिवस पर बीएमएचआरसी में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित
भोपाल, 13 जून। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर 13 जून को आईसीएमआर–भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र…
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सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार ही महत्वपूर्ण- डॉ ललित कुमार
आईसीएमआर-बीएमएचआरसी में आज अस्पताल संक्रमण नियंत्रण टीम द्वारा सर्पदंश पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. ललित…
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अपोलो कैंसर सेंटर्स ने शुरू किया #OraLife
– मुँह के कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग कार्यक्रम• ईशा फाउंडेशन के साथ साझेदारी, तम्बाकू छोड़ने के लिए सम्पूर्ण सहायता• तम्बाकू के असली नुकसान को उजागर करने के लिए #CutTheCost कैंपेन की शुरुआत इंदौर, 30 मई 2025:तम्बाकू का सेवन अब केवल व्यक्तिगत आदत नहीं रह गया है, यह एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन चुका है। भारत में दुनिया के करीब एक-तिहाई मुँह के कैंसर के मामले सामने आते हैं, हर साल 77,000 नए मरीजों की पहचान होती है और 52,000 मौतें होती हैं। इसकी जीवन दर केवल 50% है, जो विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। 2022–23 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, पान, तम्बाकू और नशे के सामान पर खर्च बढ़ रहा है, जिससे यह स्थिति और गंभीर हो गई है। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर, अपोलो कैंसर सेंटर्स (ACC) ने #OraLife लॉन्च किया है—एक सक्रिय स्क्रीनिंग पहल जो मुँह के कैंसर की प्रारंभिक पहचान पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजागरूकता फैलाना, नियमित जांच कराना और विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों—जैसे तम्बाकू और शराब का सेवन करने वाले, HPV-16 संक्रमण वाले या मुँह में पहले से घाव वाले लोगों—के लिए समय रहते हस्तक्षेप करना है। इस पहल के तहत, ACC ने ईशा फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है ताकि तम्बाकू की लत छोड़ने की इच्छुक व्यक्तियों को शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी मिल सके। डॉ. सात्विक खड्ढर, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, इंदौर ने कहा:“तम्बाकू उपभोक्ताओं में मुँह के कैंसर का खतरा 6 से 7 गुना ज्यादा होता है। यह एक ऐसा कैंसर है जिसे एक साधारण मुँह की जांच से जल्दी पहचाना जा सकता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है समय रहते मामलों की पहचान करना—इसके पहले कि बहुत देर हो जाए।“ भारत में मुँह का कैंसर पुरुषों में सबसे आम कैंसर है और महिलाओं में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा मामले सामने आते हैं जबकि केरल में सबसे कम। महाराष्ट्र, अहमदाबाद (शहरी क्षेत्र) और मेघालय में भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं, जिनका मुख्य कारण तम्बाकू सेवन है। चेन्नई की रिपोर्ट में ज़बान के पिछले हिस्से और मुँह के निचले भाग में कैंसर के मामले बढ़ने की बात कही गई है। पूरे देश में गाल की अंदरूनी परत सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है। महिलाओं में भी बिना धुएँ वाले तम्बाकू के उपयोग में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे पुरुषों और महिलाओं के बीच का अंतर कम हो रहा है। खासकर गरीब और पिछड़े इलाकों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं, वहां बिना धुएं वाले तम्बाकू, पान और शराब के संयुक्त सेवन का खतरा ज्यादा है। अब यह बीमारी 31 से 50 साल के बीच के लोगों को ज़्यादा प्रभावित कर रही है और कुपोषण भी जोखिम को बढ़ा रहा है। मध्य भारत में भी मुंह और गले के कैंसर के सबसे ज़्यादा केस दर्ज होते हैं जिसमें ज़्यादातर एडवांस्ड स्टेज में इलाज़ कराने आ पाते हैं । इंदौर और आसपास के इलाकों में मुँह के कैंसर के केस तेज़ी से बढ़ रहे हैं और समय रहते इनकी पहचान बहुत ज़रूरी है । डॉ. होज़ेफ़ा लोकंडवाला, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, इंदौर ने कहा:“हमारा उद्देश्य है कि हम रोकथाम आधारित स्वास्थ्य संस्कृति को बढ़ावा दें। अगर मुँह के कैंसर को जल्दी पकड़ लिया जाए, तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। हम 30 साल से ऊपर के हर व्यक्ति, खासतौर पर तम्बाकू सेवन करने वालों से अपील करते हैं कि वे स्क्रीनिंग करवाएं।“ #OraLife कार्यक्रम के अंतर्गत अनुभवी मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और सिर-गर्दन के सर्जन द्वारा मुँह की पूरी दृश्य और स्पर्श जांच की जाती है। यह लंबे समय तक न भरने वाले घाव, सफेद या लाल चकत्ते, गांठें या अल्सर जैसे लक्षणों की पहचान करता है, जिन्हें आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। मानसिक और भावनात्मक सहयोग के लिए, अपोलो ने ईशा फाउंडेशन के साथ मिलकर आध्यात्मिक स्वास्थ्य को तम्बाकू से मुक्ति प्रयासों में शामिल किया है। इसके तहत, इच्छुक व्यक्ति सद्गुरु द्वारा निर्देशित एक 7 मिनट का ध्यान कर सकते हैं, जो सरल और प्रभावशाली है। “मिरैकल ऑफ माइंड“ नाम का यह मुफ्त ध्यान ऐप अब तक 20 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसमें गाइडेड मेडिटेशन, ट्रैकिंग, पर्सनल मैसेज और मोटिवेशनल रिवॉर्ड्स शामिल हैं।…
