कारोबार समाचार

व्‍यापार जगत की खबरें

सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार ही महत्वपूर्ण- डॉ ललित कुमार

Snake Bite

आईसीएमआर-बीएमएचआरसी में आज अस्पताल संक्रमण नियंत्रण टीम द्वारा सर्पदंश पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. ललित कुमार, विभागाध्यक्ष पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के द्वारा सर्पदंश के उपरांत प्राथमिक उपचार एवं देखभाल पर व्याख्यान दिया गया। डॉ ललित ने जानकारी दी कि सर्पदंश के मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इससे बचाव के लिए मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार और नजदीकी अस्पताल में पहुँचना आवश्यक है।

व्याख्यानमाला में डॉ ललित ने बताया कि बारिश के मौसम में सर्पदंश के मामले ज्यादा देखने में आते हैं। उन्होने बताया कि साँपों की कुल प्रजातियाँ 300 प्रकार की होती हैं, जिनमें से 50 प्रजातियों के सांप ही जहरीले होते हैं, उनमें से भी 4 प्रकार के विषैले सर्पदंश के मामले होते है। 4 प्रकार की प्रजातियों में कोबरा, कॉमन क्रैत, रसेल और सॉ-स्केल्ड वाइपर सांपों से ही ज़्यादातर सर्पदंश होता है। इन जहरीले सर्पों के काटने से न्यूरोटॉक्सिक, हीमोटॉक्सिक एवं मायोटोक्सिक प्रभाव देखने को मिलता है। सर्पदंश के लगभग 80% मामलों में प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु सर्प के जहर से नहीं होती बल्कि सर्पदंश के भय से ही हो जाती है।

डॉ ललित ने कहा कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए। इसका तुरंत चिकित्सीय इलाज जरूरी है। आगे उन्होने बताया कि सर्पदंश के उपरांत पीड़ित को शांत रखें और उसे घबराने न दें और तुरंत ही नजदीकी अस्पताल ले जाकर उपचार दिलाने को प्राथमिकता दें।

डॉ ललित ने कहा कि सर्पदंश के उपरांत बचाव का एकमात्र इलाज अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom – ASV) इंजेक्शन लगवाना है। यह इंजेक्शन हर आयु वर्ग के पीड़ित के लिए कारगर है। उन्होने एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन लगने के बाद होने वाले रिएक्शन से बचाव एवं मरीज के पुनर्वास के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी।

व्याख्यानमाला सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि सभी लोगों में इलाज के प्रति जागरूकता के साथ ही हर प्रकार के जोखिम के प्रति जागरूकता होनी जरूरी है, उसी के अंतर्गत बीएमएचआरसी में सर्पदंश पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया है। उन्होने बताया कि हमारे देश के गाँव के खेतिहर किसान और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के ज़्यादातर लोगों की मृत्यु साँप के काटने से ही हो जाती है, क्योंकि वहाँ इसके इलाज के प्रति जागरूकता नहीं होती और न ही इसके लिए त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। आगे उन्होने बताया कि भारत सरकार सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) में, विषैले सांपों के जहर को बेअसर करने वाला एंटी-स्नेक वेनम (ASV) टीका बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत सांप के काटने से पीड़ित व्यक्ति के परिवार को आर्थिक मुआवजा देने का भी प्रावधान है।