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पुणे में बनी Skoda Kylaq पहुंची प्राग, 13 देशों में तय किया 19,351 किलोमीटर का सफर

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70 दिनों की यात्रा में बर्फीली ठंड से 43 डिग्री गर्मी तक का सामना, भारत में बनी कॉम्पैक्ट SUV की मजबूती और भरोसेमंद प्रदर्शन का बड़ा परीक्षण

मुंबई। भारत में बनी कारें अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं। भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता का एक दिलचस्प उदाहरण Skoda Kylaq ने पेश किया है। पुणे में बनी इस कॉम्पैक्ट SUV ने भारत से चेक गणराज्य की राजधानी प्राग तक 19,351 किलोमीटर की सड़क यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है।

यह सफर 70 दिनों तक चला। इस दौरान Kylaq ने दो महाद्वीपों और 13 देशों की अलग-अलग सड़कों, मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना किया। खास बात यह है कि यात्रा पुणे स्थित उस संयंत्र से शुरू हुई, जहां Kylaq का निर्माण होता है, और प्राग में समाप्त हुई। चेक गणराज्य Skoda Auto का मूल देश है।

भारत में बनी SUV के लिए बड़ा वास्तविक परीक्षण

आमतौर पर कार कंपनियां अपने वाहनों की क्षमता साबित करने के लिए टेस्ट ट्रैक और नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण करती हैं। लेकिन पुणे से प्राग तक का यह सफर वास्तविक सड़कों पर हुआ, जहां कार को मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पहाड़ी रास्तों और बेहद बदलते मौसम का सामना करना पड़ा।

यात्रा के दौरान Kylaq समुद्र तल से 154 मीटर नीचे के क्षेत्र से लेकर 5,364 मीटर की ऊंचाई तक पहुंची। तापमान भी माइनस 12 डिग्री सेल्सियस से लेकर 43 डिग्री सेल्सियस तक रहा। इस लिहाज से यह यात्रा कार की इंजीनियरिंग, मजबूती और लंबे सफर में विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा मानी जा सकती है।

पुणे से शुरू हुआ सफर, भारत के कई शहरों से गुजरी कार

Kylaq की यात्रा पुणे स्थित Skoda Auto Volkswagen India के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से शुरू हुई। इसके बाद कार मुंबई, वडोदरा, उदयपुर, जयपुर, आगरा और लखनऊ होते हुए गोरखपुर के पास नेपाल सीमा तक पहुंची।

भारत से बाहर निकलने के बाद सफर और चुनौतीपूर्ण होता गया। Kylaq नेपाल से होते हुए चीन के तिब्बती पठार पर पहुंची। इसके बाद कार किर्गिज़स्तान, उज़्बेकिस्तान और कज़ाख़स्तान से गुजरी और प्राचीन सिल्क रोड के हिस्सों पर आगे बढ़ी।

इसके बाद यात्रा जॉर्जिया और तुर्किये पहुंची, जहां एशिया और यूरोप का भौगोलिक संगम माना जाता है। वहां से Kylaq बुल्गारिया, रोमानिया, हंगरी और स्लोवाकिया होते हुए अंततः प्राग पहुंची।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्या मायने रखती है यह यात्रा?

इस अभियान का महत्व केवल एक कार के लंबे सफर तक सीमित नहीं है। Kylaq भारत में निर्मित मॉडल है और स्थानीय रूप से विकसित MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इस प्लेटफॉर्म को भारत और चेक गणराज्य की इंजीनियरिंग टीमों के सहयोग से तैयार किया गया है।

ऐसे में 19 हजार किलोमीटर से अधिक की अंतर-महाद्वीपीय यात्रा भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की बदलती तस्वीर भी दिखाती है। भारत अब केवल कम लागत में वाहन बनाने वाला बाजार नहीं रह गया है, बल्कि यहां ऐसे मॉडल विकसित और निर्मित किए जा रहे हैं जिन्हें अलग-अलग देशों, मौसम और सड़क परिस्थितियों में चलने की क्षमता के साथ पेश किया जा सकता है।

कंपनी ने कहा- भारतीय इंजीनियरिंग की क्षमता का प्रमाण

Skoda Auto India के ब्रांड निदेशक आशीष गुप्ता के अनुसार, पुणे से प्राग अभियान भारतीय इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग की वैश्विक क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि 19,351 किलोमीटर, 13 देशों और अलग-अलग सड़क एवं ड्राइविंग परिस्थितियों में भारत में बनी Kylaq ने वास्तविक परिस्थितियों में अपनी इंजीनियरिंग क्षमता दिखाई। उनके मुताबिक यह अभियान Skoda Auto के वैश्विक भविष्य में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

Kylaq में कौन सा इंजन?

Kylaq, Skoda Auto की भारत के लिए विशेष रूप से विकसित पहली सब-4 मीटर SUV है। भारतीय बाजार में यह उस सेगमेंट में आती है जहां पहले से कई लोकप्रिय कॉम्पैक्ट SUV मौजूद हैं।

कार में 1.0-लीटर TSI पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन 114 PS की पावर और 178 Nm का टॉर्क देता है। ग्राहकों के लिए इसमें 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक टॉर्क कन्वर्टर ट्रांसमिशन के विकल्प उपलब्ध हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पुणे से प्राग तक की पूरी 19,351 किलोमीटर की यात्रा Kylaq के ऑटोमैटिक वेरिएंट ने पूरी की।

रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज है नाम

Kylaq इससे पहले India Book of Records और Asia Book of Records में भी जगह बना चुकी है। कंपनी के अनुसार, Kylaq ने Kushaq, Slavia, Octavia RS और Kodiaq के साथ मिलकर एक सर्किट पर मल्टी-कार रिले में 12 मिनट 30.97 सेकंड का संयुक्त समय दर्ज किया था।

कारोबार समाचार का नजरिया

पुणे से प्राग तक Kylaq की यात्रा को केवल एक ऑटोमोबाइल कंपनी के प्रचार अभियान के रूप में देखना अधूरा होगा। इसका बड़ा पहलू भारत में विकसित और निर्मित वाहनों की बढ़ती तकनीकी क्षमता है। भारतीय ऑटो बाजार में ग्राहक अब केवल कम कीमत नहीं, बल्कि सुरक्षा, मजबूती, लंबे समय की विश्वसनीयता और बेहतर इंजीनियरिंग भी देख रहा है।

ऐसे समय में भारत में बनी एक कॉम्पैक्ट SUV का 13 देशों से गुजरते हुए लगभग 19,500 किलोमीटर का सफर पूरा करना देश की ऑटो मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि आम भारतीय खरीदार के लिए असली कसौटी अब भी कीमत, माइलेज, सर्विस नेटवर्क और रखरखाव लागत ही रहेगी।

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