‘डियरयू’ ऐप को कैंसर जागरूकता केंद्र से जोड़ेगा एम्स भोपाल, कम इंटरनेट वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन भी किया जा सकेगा उपयोग
भोपाल। महिलाओं को स्तन स्वास्थ्य, मासिक धर्म और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी अब एक मुफ्त डिजिटल ऐप के जरिए उपलब्ध कराने की पहल की गई है। एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने स्विट्ज़रलैंड के द डीयर फाउंडेशन के साथ मिलकर ‘डियरयू’ महिला स्वास्थ्य ऐप को अपने कैंसर जागरूकता एवं रोगी सशक्तिकरण यानी केप केंद्र से जोड़ने का निर्णय लिया है।
इस पहल की खास बात यह है कि ऐप बहुभाषी है और इसमें ऑफलाइन उपयोग तथा टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इससे सीमित इंटरनेट सुविधा वाले क्षेत्रों और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं तक भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं को ऐप से क्या फायदा होगा?
‘डियरयू’ एक निःशुल्क डिजिटल स्वास्थ्य ऐप है। इसमें महिलाओं के लिए स्तन स्वास्थ्य, स्तन स्व-जागरूकता, मासिक धर्म स्वास्थ्य, पीरियड ट्रैकिंग और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।
ऐप पर दी गई स्वास्थ्य सामग्री विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित है। इसका उद्देश्य महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को बेहतर ढंग से समझने और किसी असामान्य संकेत की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित करना है।
टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा के कारण ऐप उन महिलाओं के लिए भी उपयोगी हो सकता है जिन्हें लिखी हुई स्वास्थ्य सामग्री समझने में कठिनाई होती है। वहीं ऑफलाइन सुविधा सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता बढ़ाती है।
एम्स आने वाली महिलाओं और परिजनों को दी जाएगी जानकारी
एम्स भोपाल का सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग अब ‘डियरयू’ ऐप को केप केंद्र की रोगी शिक्षा गतिविधियों में शामिल करेगा।
केंद्र में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और अन्य आगंतुकों को ऐप के बारे में बताया जाएगा और इसके उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अस्पताल की चारदीवारी से बाहर लोगों के मोबाइल फोन तक पहुंचाना है।
इस पहल से विशेष रूप से स्तन कैंसर सहित महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान, जांच और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है।
स्तन कैंसर की समय पर पहचान पर जोर
भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों और कई मरीजों में देर से बीमारी का पता चलने की चुनौती को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार शुरुआती पहचान पर जोर देते रहे हैं।
एम्स भोपाल की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐप के जरिए महिलाओं को स्तन स्वास्थ्य और शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर वे समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर सकें।
क्या है एम्स भोपाल का केप केंद्र?
कैंसर जागरूकता एवं रोगी सशक्तिकरण यानी केप केंद्र एम्स भोपाल की एक पहल है, जहां मरीजों और उनके परिजनों को कैंसर से जुड़ी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
केंद्र पर कैंसर की रोकथाम, जांच, निदान, उपचार, उपचार के दुष्प्रभाव, पुनर्वास, पोषण और जीवनशैली जैसे विषयों की जानकारी वीडियो, पोस्टर, ग्राफिक्स और परामर्श के माध्यम से दी जाती है।
इसका एक उद्देश्य कैंसर को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों और डर को कम करना भी है। केंद्र को एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है।
‘केवल इलाज नहीं, सही जानकारी देना भी जरूरी’
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर सशक्त बनाना भी है।
उन्होंने कहा कि द डीयर फाउंडेशन, स्विट्ज़रलैंड के साथ सहयोग और केप केंद्र में ‘डियरयू’ ऐप का समावेश रोगी-केंद्रित तथा तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। इससे महिलाओं को बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
बिना डर और झिझक के डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत
एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने कहा कि स्तन कैंसर के मामले में समय पर जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, ‘डियरयू’ ऐप सरल, बहुभाषी और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराता है। केप केंद्र के माध्यम से इसे अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि महिलाएं बिना डर या झिझक के जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श ले सकें।
गांवों और सीमित इंटरनेट वाले क्षेत्रों में भी हो सकता है उपयोगी
‘डियरयू’ ऐप को स्विट्ज़रलैंड के द डीयर फाउंडेशन ने विकसित किया है। इसमें स्तन स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वास्थ्य और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी विशेषज्ञ-प्रमाणित जानकारी कई भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है।
ऐप की टेक्स्ट-टू-स्पीच और ऑफलाइन सुविधा इसे उन क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी बना सकती है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है या महिलाओं के बीच डिजिटल और स्वास्थ्य साक्षरता कम है।
कारोबार समाचार का नजरिया
भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी उन महिलाओं तक कैसे पहुंचे जो भाषा, इंटरनेट या कम साक्षरता जैसी बाधाओं का सामना करती हैं।
एम्स भोपाल और द डीयर फाउंडेशन की यह पहल इसी अंतर को कम करने का प्रयास है। यदि बहुभाषी, ऑफलाइन और आवाज आधारित स्वास्थ्य जानकारी वास्तव में जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचती है, तो यह केवल डिजिटल सुविधा नहीं बल्कि बीमारी की समय पर पहचान और बेहतर स्वास्थ्य निर्णय लेने का माध्यम बन सकती है।
हालांकि किसी भी स्वास्थ्य ऐप की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी महिलाएं इसे नियमित रूप से उपयोग करती हैं और डिजिटल जानकारी को जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच एवं उपचार से जोड़ पाती हैं।



