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क्या आपकी कार या बाइक का टायर कम हवा पर चल रहा है? हर साल हजारों रुपये का अतिरिक्त पेट्रोल जला सकते हैं आप

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एक नजर में (Quick Read)

  • कम टायर प्रेशर से वाहन का माइलेज घट जाता है।
  • एक अध्ययन के अनुसार, भारत में हर साल करीब ₹4,500 करोड़ का अतिरिक्त पेट्रोल सिर्फ कम हवा वाले टायरों के कारण खर्च हो जाता है।
  • कम हवा से केवल ईंधन ही नहीं, टायर की उम्र भी कम होती है।
  • ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित होती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
  • विशेषज्ञ महीने में कम से कम दो बार टायर प्रेशर जांचने की सलाह देते हैं।

एक छोटी-सी लापरवाही, बड़ा खर्च

अगर आपकी कार या बाइक का टायर निर्धारित दबाव (Tyre Pressure) से कम हवा पर चल रहा है, तो हो सकता है कि आप हर महीने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल खर्च कर रहे हों।

ऑटोमोबाइल टायर उद्योग से जुड़े एक अध्ययन के अनुसार, कम टायर प्रेशर के कारण भारत में हर साल लगभग 42 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल अतिरिक्त खर्च हो जाता है, जिसकी कीमत ₹4,500 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है।

यानी केवल कुछ मिनट में टायर की हवा जांचने की आदत आपकी जेब पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम कर सकती है।


कम हवा से माइलेज क्यों घट जाता है?

जब टायर में हवा कम होती है, तो सड़क के साथ उसका संपर्क क्षेत्र (Contact Patch) बढ़ जाता है। इससे वाहन को आगे बढ़ाने के लिए इंजन को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और ईंधन की खपत बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टायर प्रेशर में हर 1 PSI की कमी ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) को लगभग 0.2 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकती है।


अध्ययन में क्या सामने आया?

देशभर में एक लाख से अधिक वाहनों के टायरों की जांच के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में वाहन निर्माता द्वारा निर्धारित मानक से कम हवा पर चल रहे थे।

अध्ययन के अनुसार—

  • लगभग 32 प्रतिशत टायरों में अनुशंसित स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक कम हवा थी।
  • करीब 21 प्रतिशत टायरों में हवा 10 से 20 प्रतिशत तक कम पाई गई।

यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में वाहन चालक नियमित रूप से टायर प्रेशर की जांच नहीं कराते।


सिर्फ पेट्रोल नहीं, जेब पर कई तरह से पड़ता है असर

कम टायर प्रेशर का नुकसान केवल माइलेज तक सीमित नहीं रहता।

इसके कारण—

  • टायर जल्दी घिसते हैं।
  • टायर बदलने का खर्च बढ़ सकता है।
  • वाहन की ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • हाईवे पर टायर अधिक गर्म होकर क्षतिग्रस्त होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • वाहन की हैंडलिंग कमजोर हो सकती है।
  • प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ सकता है।

कितनी बार जांचें टायर प्रेशर?

वाहन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—

✔ महीने में कम से कम दो बार टायर प्रेशर जांचें।

✔ लंबी यात्रा पर निकलने से पहले टायर जरूर चेक कराएं।

✔ हमेशा वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए प्रेशर पर ही टायर रखें।

✔ टायर प्रेशर की जांच ठंडे (Cold Tyres) टायरों पर करना अधिक सही माना जाता है।

✔ स्पेयर व्हील की हवा भी समय-समय पर जांचते रहें।


क्या हर वाहन पर लागू होती है यह बात?

यह समस्या केवल कारों तक सीमित नहीं है।

कम टायर प्रेशर का असर बाइक, स्कूटर, एसयूवी और अन्य पैसेंजर वाहनों पर भी पड़ता है। अध्ययन में डीजल, सीएनजी और एलपीजी से चलने वाले वाहनों के ईंधन नुकसान का पूरा आकलन शामिल नहीं था। इसलिए वास्तविक आर्थिक नुकसान इससे भी अधिक हो सकता है।


आपके लिए इसका क्या मतलब है?

यदि आपकी कार हर महीने 80 से 100 लीटर पेट्रोल खर्च करती है, तो लगातार कम टायर प्रेशर के कारण सालभर में अनावश्यक ईंधन खर्च जुड़ सकता है। इसके साथ ही टायर जल्दी खराब होने और रखरखाव का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ सकता है।

ऐसे में केवल कुछ मिनट का नियमित निरीक्षण आपके वाहन की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ ईंधन की बचत और रखरखाव का खर्च कम करने में भी मदद कर सकता है.


जानिए

सही टायर प्रेशर कहां लिखा होता है?

अधिकांश कारों में निर्माता द्वारा सुझाया गया टायर प्रेशर ड्राइवर साइड के दरवाजे के अंदर, फ्यूल कैप के पास या वाहन की यूज़र मैनुअल में लिखा होता है। दोपहिया वाहनों में यह जानकारी आमतौर पर मालिक की पुस्तिका में उपलब्ध रहती है।

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