नई दिल्ली। अब तक आइसक्रीम को स्वाद, मिठास और indulgence से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन दुनिया की डेयरी और फूड इंडस्ट्री में एक नया सवाल तेजी से उभर रहा है—क्या आइसक्रीम को भी बेहतर पोषण वाले खाद्य उत्पाद में बदला जा सकता है?
फूड टेक्नोलॉजी और नए ingredient formulations में हो रहे प्रयोगों से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले वर्षों में आइसक्रीम बाजार केवल स्वाद और फ्लेवर तक सीमित नहीं रहेगा। हाई-प्रोटीन, प्रीबायोटिक फाइबर, कम कैलोरी और नियंत्रित शुगर वाले frozen desserts इस श्रेणी की नई दिशा बन सकते हैं।
20% से ज्यादा डेली वैल्यू प्रोटीन वाला फॉर्मूला?
अमेरिकी डेयरी उद्योग प्रकाशन Dairy Foods में 24 जून 2026 को प्रकाशित एक विश्लेषण में विशेषज्ञों ने इस संभावना पर चर्चा की है कि आइसक्रीम को अधिक पोषण-केंद्रित उत्पाद के रूप में विकसित किया जा सकता है।
विश्लेषण में ऐसे formulations की संभावना बताई गई है जिनमें एक serving से प्रोटीन की दैनिक जरूरत का 20% से अधिक हिस्सा और prebiotic dietary fibre की दैनिक जरूरत का 20% से अधिक हिस्सा मिल सके। साथ ही 100 calories से कम वाले विकल्प विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध सामान्य आइसक्रीम अचानक स्वास्थ्यवर्धक हो गई है। विशेषज्ञों का जोर नई formulation technology और वैज्ञानिक परीक्षणों पर है।
GLP-1 दौर में बदल रही फूड इंडस्ट्री
दुनिया भर में वजन प्रबंधन और metabolic health को लेकर बढ़ती जागरूकता ने food companies के लिए एक नया बाजार तैयार किया है। विशेष रूप से GLP-1 आधारित दवाओं की बढ़ती चर्चा के बाद ऐसे खाद्य उत्पादों पर ध्यान बढ़ा है जो ज्यादा protein, fibre और portion control की पेशकश करते हैं।
इसी कारण food industry में “GLP-1 friendly” या इससे जुड़े nutrition positioning वाले packaged foods की चर्चा बढ़ रही है। Ice cream और frozen desserts भी इस बदलाव से अछूते नहीं हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। किसी आइसक्रीम को सीधे बीमारी रोकने, वजन घटाने या metabolic disorder नियंत्रित करने वाला उत्पाद मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। ऐसे दावों के लिए नियंत्रित clinical या feeding studies और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
भारत में क्यों महत्वपूर्ण है यह ट्रेंड?
भारत में भी उपभोक्ताओं की पसंद बदलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2026 की Healthy Snacking Report के अनुसार 86% भारतीय उत्तरदाताओं ने protein-rich snacks को प्राथमिकता दी, जबकि 61% ने natural sweeteners को पसंद किया।
यह बदलाव भारतीय dairy और frozen dessert कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। देश में शहरी उपभोक्ताओं के बीच protein intake, कम sugar, gut health और functional foods को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
ऐसे में भविष्य में भारतीय बाजार में इन श्रेणियों पर अधिक प्रयोग देखने को मिल सकते हैं:
- हाई-प्रोटीन आइसक्रीम
- कम शुगर वाले frozen desserts
- prebiotic fibre युक्त उत्पाद
- छोटे portion size वाले premium desserts
- calorie-conscious formulations
- dairy protein आधारित functional desserts
बड़ा हो सकता है प्रोटीन आइसक्रीम बाजार
बाजार अनुसंधान अनुमानों से भी इस श्रेणी में कारोबारी संभावनाओं के संकेत मिलते हैं। Fortune Business Insights के एक 2026 अनुमान के अनुसार वैश्विक protein ice cream market का आकार 2026 में करीब 2.02 अरब डॉलर रह सकता है और 2034 तक लगभग 3.37 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं तो यह संकेत है कि आइसक्रीम उद्योग में “better-for-you” positioning केवल marketing experiment नहीं, बल्कि एक अलग product category के रूप में उभर सकती है।
भारतीय डेयरी कंपनियों के लिए नया अवसर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है और यहां dairy processing का विशाल आधार मौजूद है। ऐसे में high-protein frozen desserts भारतीय कंपनियों के लिए value-added dairy products की नई श्रेणी बन सकते हैं।
विशेष रूप से whey protein, milk protein, fibre और low-sugar formulations का इस्तेमाल कर कंपनियां premium urban consumers, fitness-conscious buyers और portion-controlled dessert चाहने वाले ग्राहकों को लक्ष्य बना सकती हैं।
हालांकि चुनौती भी कम नहीं है। कम sugar और ज्यादा protein के साथ आइसक्रीम का वही स्वाद, creamy texture और mouthfeel बनाए रखना तकनीकी रूप से आसान नहीं होता। यही कारण है कि food technology इस बाजार की सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
स्वाद बनाम सेहत की बहस अब बाजार का अवसर
आइसक्रीम को पूरी तरह “healthy food” घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि दुनिया की food industry इस लोकप्रिय dessert को नए nutrition formats में ढालने की कोशिश कर रही है।
यदि high-protein, prebiotic fibre और lower-calorie formulations स्वाद से समझौता किए बिना सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में आइसक्रीम बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय कंपनियों के लिए भी यह केवल एक विदेशी trend नहीं, बल्कि value-added dairy products की संभावित नई कारोबारी दिशा हो सकती है।
स्रोत आधार: Dairy Foods में प्रकाशित उद्योग विश्लेषण, 2026 Healthy Snacking Report से जुड़े सार्वजनिक निष्कर्ष और 2026 के protein ice cream market estimates।



