नई दिल्ली। परिवार या दोस्तों से नकद, मकान, प्लॉट, शेयर या आभूषण गिफ्ट में मिलना किसी खुशखबरी से कम नहीं होता। लेकिन हर गिफ्ट पूरी तरह टैक्स फ्री हो, ऐसा जरूरी नहीं है। आयकर कानून में गिफ्ट को लेकर स्पष्ट नियम हैं, जिनकी जानकारी नहीं होने पर बाद में टैक्स और जुर्माने की स्थिति बन सकती है।
किन रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट पूरी तरह टैक्स फ्री?
आयकर नियमों के अनुसार यदि गिफ्ट निम्न रिश्तेदारों से प्राप्त होता है तो उसकी राशि या मूल्य कितना भी हो, उस पर टैक्स नहीं लगता।
- पति या पत्नी
- भाई-बहन
- पति या पत्नी के भाई-बहन
- माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी
- बेटे-बेटी, पोते-पोती, नाती-नातिन
- उपरोक्त रिश्तेदारों के जीवनसाथी
इन अवसरों पर मिला गिफ्ट भी टैक्स फ्री
कुछ विशेष परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति से मिला गिफ्ट टैक्स मुक्त माना जाता है। इनमें शामिल हैं—
- विवाह के अवसर पर मिला गिफ्ट
- वसीयत (Will) या उत्तराधिकार (Inheritance) के जरिए मिली संपत्ति
- दाता की मृत्यु की आशंका (Contemplation of Death) में दिया गया गिफ्ट
- हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के विभाजन के दौरान प्राप्त संपत्ति
- मान्यता प्राप्त ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान या धर्मार्थ अस्पताल से प्राप्त गिफ्ट
नकद गिफ्ट लेते समय रखें यह सावधानी
माता-पिता या अन्य निर्दिष्ट रिश्तेदारों से मिला नकद गिफ्ट टैक्स फ्री हो सकता है, लेकिन आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत एक व्यक्ति से एक दिन, एक लेनदेन या एक ही अवसर पर ₹2 लाख से अधिक नकद प्राप्त करना प्रतिबंधित है।
इस नियम का उल्लंघन करने पर आयकर विभाग की जांच और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने यह प्रावधान काले धन और टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए बनाया है।
दोस्तों से मिला गिफ्ट कब बनेगा टैक्सेबल?
यदि गिफ्ट किसी ऐसे व्यक्ति से मिला है जो आयकर कानून के अनुसार ‘रिश्तेदार’ की श्रेणी में नहीं आता, जैसे मित्र, पड़ोसी या अन्य परिचित, तो स्थिति अलग होगी।
यदि ऐसे सभी गिफ्ट का कुल मूल्य एक वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक हो जाता है, तो पूरी राशि ‘अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources)’ के रूप में टैक्स के दायरे में आ जाती है।
टैक्स फ्री गिफ्ट भी बाद में बन सकता है टैक्सेबल
कई लोग यह मान लेते हैं कि एक बार गिफ्ट टैक्स फ्री मिल गया तो भविष्य में भी उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन ऐसा नहीं है।
यदि गिफ्ट में मिली संपत्ति, जैसे मकान, प्लॉट, शेयर या आभूषण, बाद में बेचे जाते हैं तो बिक्री से होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में टैक्स की गणना के लिए मूल मालिक की खरीद कीमत (Cost of Acquisition) और उसके पास संपत्ति कितने समय तक रही, दोनों को आधार माना जाता है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए पति ने वर्ष 2005 में एक मकान खरीदा और बाद में पत्नी को गिफ्ट कर दिया। यदि पत्नी भविष्य में वह मकान बेचती है तो कैपिटल गेन की गणना पति की खरीद कीमत और उसकी होल्डिंग अवधि के आधार पर होगी।
- 24 महीने या उससे कम अवधि होने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) लागू होगा और लाभ पर संबंधित आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
- 24 महीने से अधिक अवधि होने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा, जिस पर वर्तमान नियमों के अनुसार 12.5% की दर से (बिना इंडेक्सेशन) टैक्स देय होगा।
क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि गिफ्ट लेने या देने से पहले यह समझना जरूरी है कि गिफ्ट किससे मिल रहा है, उसका मूल्य कितना है और भविष्य में उस संपत्ति का उपयोग कैसे किया जाएगा। सही जानकारी होने से अनावश्यक टैक्स और कानूनी परेशानियों से बचा जा सकता है।




