17 डिजाइन ठुकराए, 18वां जूता पसंद आया; ₹110 करोड़ की Puma डील छोड़ अपने ब्रांड को आगे बढ़ा रहे कोहली, लेकिन असली सवाल कीमत और क्वालिटी का
नई दिल्ली। आप बाजार में नया स्पोर्ट्स शू खरीदने जाते हैं। सामने Nike, Adidas, Puma जैसे बड़े विदेशी ब्रांड हैं। दूसरी ओर एक नया जूता रखा है, जिस पर विराट कोहली के One8 ब्रांड का नाम है।
अब सवाल सीधा है—क्या आप विराट कोहली के नाम पर वह जूता खरीदेंगे?
और उससे भी बड़ा सवाल—अगर जूता अच्छा निकला तो क्या आप दोबारा भी उसी ब्रांड पर पैसा खर्च करेंगे?
यही सवाल अब विराट कोहली के नए कारोबारी दांव के सामने है।
21 जून को नई दिल्ली में एक बड़े लॉन्च कार्यक्रम में कोहली ने बताया कि उन्होंने अपने ब्रांड के लिए तैयार किए गए 17 अलग-अलग जूतों के डिजाइन ठुकरा दिए थे। आखिरकार 18वां प्रोटोटाइप उन्हें पसंद आया।
सुनने में यह छोटी बात लग सकती है, लेकिन इसके पीछे करोड़ों रुपये का कारोबार और भारतीय स्पोर्ट्सवियर बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की महत्वाकांक्षा छिपी है।
₹110 करोड़ की पक्की डील छोड़ अपने ब्रांड पर दांव
विराट कोहली लंबे समय तक जर्मन स्पोर्ट्स कंपनी Puma से जुड़े रहे। उनका एंडोर्समेंट समझौता करीब ₹110 करोड़ का बताया गया।
लेकिन अब कोहली ने केवल किसी दूसरी कंपनी का प्रचार करने के बजाय अपने ब्रांड पर बड़ा दांव लगाया है।
उनका लाइफस्टाइल ब्रांड One8 अब नए रूप में बाजार में उतारा गया है। इसे Agilitas Sports आगे बढ़ा रही है, जिसके कोहली सह-संस्थापक हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने इसमें करीब ₹40 करोड़ का निवेश किया है।
यानी इस बार मामला केवल विज्ञापन में जूता पहनकर फोटो खिंचवाने का नहीं है। कोहली खुद उस कारोबार का हिस्सा हैं, जिसकी सफलता या असफलता सीधे उनकी कारोबारी छवि से जुड़ी होगी।
लेकिन ग्राहक क्यों खरीदेगा One8?
यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
भारत का मध्यम वर्ग अब पहले जैसा खरीदार नहीं रहा। ऑनलाइन शॉपिंग ने उसे कीमतों की तुलना करना सिखा दिया है। ग्राहक मोबाइल पर कुछ मिनट में देख सकता है कि अलग-अलग ब्रांडों के जूते कितने में मिल रहे हैं और उनके रिव्यू क्या कहते हैं।
ऐसे में केवल विराट कोहली का नाम पर्याप्त नहीं होगा।
अगर One8 का जूता किसी स्थापित ब्रांड से महंगा हुआ, तो ग्राहक पूछेगा—
मुझे अतिरिक्त पैसे क्यों देने चाहिए?
क्या जूता ज्यादा आरामदायक है?
क्या ज्यादा टिकाऊ है?
क्या इसकी डिजाइन बेहतर है?
क्या इसकी वारंटी अच्छी है?
क्या यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सही है?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या मैं सिर्फ विराट कोहली के नाम की कीमत चुका रहा हूं?
सेलिब्रिटी के नाम पर शुरू हुए कई ब्रांड नहीं टिक पाए
भारत में बड़े सितारों के नाम से शुरू हुए हर ब्रांड को सफलता नहीं मिली।
कई सेलिब्रिटी ब्रांड शुरुआती चर्चा के बाद धीमे पड़ गए। कुछ में बड़े कारोबारी समूहों ने हिस्सेदारी खरीदी, जबकि कुछ बाजार में अपेक्षित पहचान नहीं बना सके।
आलिया भट्ट के बच्चों के कपड़ों के ब्रांड Ed-a-Mamma में रिलायंस रिटेल ने बहुमत हिस्सेदारी खरीदी। दीपिका पादुकोण के ब्यूटी ब्रांड 82°E को लेकर भी अधिग्रहण वार्ताओं की खबरें सामने आईं।
अनुष्का शर्मा का Nush, करण जौहर की Tyaani ज्वेलरी लाइन और शाहिद कपूर से जुड़ा SKULT भी यह दिखाते हैं कि बड़े नाम के बावजूद बाजार में लंबे समय तक टिकना आसान नहीं है।
कारण सीधा है—ग्राहक पहली बार स्टार के नाम पर खरीद सकता है, लेकिन दूसरी बार वह क्वालिटी और कीमत देखकर लौटता है।
विराट का अपना पुराना ब्रांड भी दबाव में
कोहली के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके दूसरे फैशन-लाइफस्टाइल ब्रांड Wrogn के वित्तीय आंकड़े उत्साहजनक तस्वीर नहीं दिखाते।
उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में Wrogn की कुल आय करीब 12.5 प्रतिशत घटकर ₹232.34 करोड़ रह गई।
कंपनी का परिचालन राजस्व भी करीब 9 प्रतिशत घटकर ₹223 करोड़ रह गया।
सबसे बड़ी चिंता घाटे की है। कंपनी का शुद्ध घाटा करीब 32 प्रतिशत बढ़कर ₹75.5 करोड़ पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह लगभग ₹56.7 करोड़ था।
इसका मतलब साफ है—विराट कोहली जैसा बड़ा नाम भी कारोबार में सफलता की गारंटी नहीं है।
फिर One8 अलग क्यों हो सकता है?
यहां कहानी दिलचस्प होती है।
One8 के पीछे इस बार केवल विराट कोहली नहीं हैं। उनके साथ अभिषेक गांगुली हैं, जो पहले Puma India और Southeast Asia के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं।
उनकी कंपनी Agilitas Sports ने जूते बनाने वाली कंपनी Mochiko Shoes का अधिग्रहण किया है। इससे उसे खुद मैन्युफैक्चरिंग की ताकत मिलती है।
कंपनी के पास इटली के ब्रांड Lotto के भारत में लाइसेंसिंग अधिकार भी हैं।
इसका मतलब यह है कि One8 केवल किसी तीसरी कंपनी से जूते बनवाकर उन पर विराट कोहली का नाम लगाने वाला प्रयोग नहीं रहना चाहता। इसके पीछे निर्माण, डिजाइन, सप्लाई और बाजार तक पहुंच की पूरी व्यवस्था खड़ी करने की कोशिश हो रही है।
AI से जल्दी बनेंगे नए जूते
कंपनी जूतों के डिजाइन में AI, 3D मॉडलिंग और फास्ट प्रोटोटाइपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।
लक्ष्य यह है कि भविष्य में किसी नए जूते को डिजाइन से बाजार तक पहुंचाने का समय लगभग तीन महीने किया जा सके।
यह भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि फैशन और स्पोर्ट्सवियर में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदलती है।
कंपनी ने नोएडा में लैब और वियतनाम में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर पर भी काम किया है।
असली परीक्षा पहली नहीं, दूसरी खरीद होगी
Agilitas Sports के सह-संस्थापक अभिषेक गांगुली ने सफलता की एक दिलचस्प कसौटी रखी है।
उनके मुताबिक असली सफलता तब होगी जब ग्राहक एक साल में ब्रांड को चार बार खरीदे।
यही बात One8 की पूरी कारोबारी कहानी का सार है।
विराट कोहली के करोड़ों प्रशंसक हैं। इसलिए पहली बार जूता बिक जाना मुश्किल नहीं हो सकता।
लेकिन क्या वही ग्राहक दूसरी बार लौटेगा?
क्या वह अपने बेटे के लिए भी One8 खरीदेगा?
क्या कॉलेज जाने वाला युवा Nike-Puma के बजाय One8 चुनेगा?
क्या नौकरीपेशा व्यक्ति रोज पहनने के लिए इसे खरीदेगा?
क्या मध्यम वर्ग को इसकी कीमत सही लगेगी?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि One8 बड़ा भारतीय ब्रांड बनेगा या एक और सेलिब्रिटी प्रयोग बनकर रह जाएगा।
कारोबार समाचार की नजर से: सबसे बड़ा सवाल ‘कितने का जूता?’
One8 की कहानी में विराट कोहली का नाम सबसे चमकदार हिस्सा है, लेकिन भारतीय बाजार में असली फैसला कीमत करेगी।
यदि ब्रांड ऐसे जूते पेश करता है जो मध्यम वर्ग की पहुंच में हों, गुणवत्ता अच्छी हो और डिजाइन आधुनिक हो, तो उसके पास बड़ा अवसर है।
लेकिन यदि कीमत केवल सेलिब्रिटी नाम के कारण बहुत ऊंची रखी जाती है, तो ग्राहक के पास विकल्पों की कमी नहीं है।
आज भारतीय खरीदार ब्रांड से प्रभावित जरूर होता है, लेकिन मोबाइल खोलकर कीमत और रिव्यू भी देखता है।
इसलिए One8 की सफलता का फैसला किसी भव्य लॉन्च कार्यक्रम, सोशल मीडिया पोस्ट या विराट कोहली की लोकप्रियता से नहीं होगा।
फैसला उस दिन होगा जब ग्राहक जूता पहनने के छह महीने बाद कहेगा—पैसा वसूल था, अगली बार भी यही खरीदूंगा।



