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भारत में गाड़ियों की रिकॉर्ड खरीदारी, जून में 25.57 लाख वाहन बिके; हर 10 नई कारों में 4 से ज्यादा वैकल्पिक ईंधन वाली

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ऑटो रिटेल में 21.83% की छलांग; इलेक्ट्रिक दोपहिया की हिस्सेदारी पहली बार 10% के पार, लेकिन कार डीलरों के पास बढ़ता स्टॉक चिंता का संकेत

नई दिल्ली, 6 जुलाई। महंगाई, ईंधन खर्च और मानसून की अनिश्चितता के बीच भारतीयों की वाहन खरीदने की रफ्तार जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। जून 2026 में देशभर में 25,57,234 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 21.83 प्रतिशत अधिक है। यह भारतीय ऑटो रिटेल इतिहास का अब तक का सबसे मजबूत जून रहा।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के जून रिटेल डेटा के मुताबिक दोपहिया, तिपहिया, कमर्शियल वाहन और पैसेंजर वाहन—सभी प्रमुख श्रेणियों ने जून का नया रिकॉर्ड बनाया। मई 2026 के मुकाबले भी कुल रजिस्ट्रेशन में 1.03 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। रिपोर्ट के अनुसार डेटा 4 जुलाई 2026 तक 1,467 में से 1,464 आरटीओ से जुटाया गया है।

कार बाजार ने लगाई सबसे तेज छलांग

जून में 4,10,853 पैसेंजर वाहन रजिस्टर हुए, जो जून 2025 के 3,19,412 वाहनों की तुलना में 28.63 प्रतिशत अधिक हैं। मई के मुकाबले भी कार बिक्री 2.05 प्रतिशत बढ़ी।

यह वृद्धि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। सालाना आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में पैसेंजर वाहन रिटेल 35.09 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शहरी बाजार में वृद्धि 24.67 प्रतिशत रही। इससे संकेत मिलता है कि छोटे शहरों और ग्रामीण भारत में कार खरीदने की आकांक्षा तेजी से मजबूत हो रही है।

पेट्रोल-डीजल से आगे बढ़ रहे कार खरीदार

जून की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर ईंधन विकल्पों में बदलाव की रही। पहली बार पैसेंजर वाहन बाजार में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी 40.35 प्रतिशत तक पहुंच गई।

इसमें CNG की हिस्सेदारी 24.33 प्रतिशत, हाइब्रिड की 8.27 प्रतिशत और EV की 7.75 प्रतिशत रही। इसके उलट पेट्रोल/एथेनॉल वाहनों की हिस्सेदारी घटकर 43.63 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 47.68 प्रतिशत थी। डीजल की हिस्सेदारी भी 18.74 प्रतिशत से घटकर 16.02 प्रतिशत रह गई।

यानी भारतीय कार बाजार में खरीदार अब तेजी से ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो पारंपरिक पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम कर सकें। रिपोर्ट के पेज 5 पर दिए गए fuel-wise market-share table में यह बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है।

इलेक्ट्रिक स्कूटर-बाइक ने पहली बार पार किया 10% का आंकड़ा

दोपहिया बाजार में भी बड़ा बदलाव दर्ज हुआ। जून में 18,28,458 दोपहिया वाहन रजिस्टर हुए, जो पिछले साल से 21.22 प्रतिशत अधिक हैं। इससे भी अहम बात यह रही कि इलेक्ट्रिक दोपहिया की बाजार हिस्सेदारी पहली बार दोहरे अंक में पहुंचकर 10.60 प्रतिशत हो गई। जून 2025 में यह केवल 7.34 प्रतिशत थी।

हालांकि मई की तुलना में कुल दोपहिया रिटेल 0.89 प्रतिशत घटा। रिपोर्ट बताती है कि यह कमजोरी मुख्य रूप से ग्रामीण बाजार से आई, जहां मासिक आधार पर बिक्री 4.55 प्रतिशत घटी, जबकि शहरी दोपहिया बाजार 4.25 प्रतिशत बढ़ा। इसका संबंध दक्षिण-पश्चिम मानसून की देरी और असमान प्रगति से जोड़ा गया है।

हर तीन में लगभग दो तिपहिया वाहन इलेक्ट्रिक

तिपहिया बाजार में इलेक्ट्रिक बदलाव और भी गहरा है। जून में 1,20,889 तिपहिया वाहन रजिस्टर हुए, जो सालाना आधार पर 16.20 प्रतिशत अधिक हैं। इस श्रेणी में EV की हिस्सेदारी 64.08 प्रतिशत रही।

इसका अर्थ है कि भारत का तिपहिया बाजार—विशेषकर शहरी और अंतिम-मील परिवहन—तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।

ट्रैक्टर बिक्री में 25% उछाल, गांवों से मिला मजबूत संकेत

जून में 1,00,818 ट्रैक्टर रजिस्टर हुए। यह पिछले साल से 25.31 प्रतिशत और मई से 21.33 प्रतिशत अधिक है। FADA के मुताबिक यह इतिहास का दूसरा सबसे अच्छा जून रहा।

खरीफ सीजन की तैयारी और कृषि गतिविधियों ने ट्रैक्टर मांग को सहारा दिया। हालांकि मानसून की प्रगति आगे ग्रामीण वाहन मांग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी।

कमर्शियल वाहन भी रिकॉर्ड स्तर पर

कमर्शियल वाहन रिटेल जून में 90,972 यूनिट रहा, जो सालाना आधार पर 16.88 प्रतिशत अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धि 21.63 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 12.75 प्रतिशत। इससे माल ढुलाई और कारोबारी गतिविधियों का विस्तार महानगरों से बाहर भी होने का संकेत मिलता है।

लाइट कमर्शियल वाहनों की बिक्री 21.10 प्रतिशत, मीडियम कमर्शियल वाहनों की 16.81 प्रतिशत और भारी कमर्शियल वाहनों की 8.26 प्रतिशत बढ़ी।

एक कमजोर कड़ी: कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट

रिकॉर्ड ऑटो बाजार के बीच Wheeled Construction Equipment श्रेणी ने विपरीत तस्वीर दिखाई। जून में इसके 5,244 रजिस्ट्रेशन हुए, जो सालाना आधार पर 40.94 प्रतिशत कम हैं। यह रिपोर्ट में सबसे बड़ी गिरावट वाली प्रमुख श्रेणी रही।

कार डीलरों के पास बढ़ता स्टॉक बना चिंता

मजबूत बिक्री के बावजूद पैसेंजर वाहन डीलरों के पास इन्वेंट्री 32 से 34 दिन तक पहुंच गई है। यह FADA के सुझाए गए 21 दिन के स्तर से काफी अधिक है।

इसका मतलब है कि यदि मानसून के दौरान मांग कमजोर पड़ती है और कंपनियां डीलरों को ज्यादा वाहन भेजती रहती हैं, तो डीलरों की पूंजी बिना बिके स्टॉक में फंस सकती है। FADA ने वाहन निर्माताओं से डिस्पैच को वास्तविक रिटेल मांग के अनुरूप रखने की अपील की है।

जुलाई को लेकर उम्मीद, लेकिन मानसून सबसे बड़ा सवाल

डीलर सर्वे में 51.24 प्रतिशत प्रतिभागियों ने जुलाई में वृद्धि की उम्मीद जताई, 41.79 प्रतिशत ने बाजार स्थिर रहने और केवल 6.97 प्रतिशत ने गिरावट की आशंका व्यक्त की।

अगले तीन महीनों को लेकर भरोसा और मजबूत है। 66.17 प्रतिशत डीलरों को जुलाई-सितंबर अवधि में वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही 38.31 प्रतिशत डीलरों ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना अनुमान ऊपर संशोधित किया है।

फिर भी आगे की राह मानसून, ग्रामीण आय, वाहन कीमतों में बढ़ोतरी और फाइनेंसिंग की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। गणेश चतुर्थी और ओणम से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन से पहले बाजार की दिशा तय करने में बारिश सबसे बड़ा कारक बन सकती है।

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