मानसून में थोड़ी-सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के आसान उपाय
भोपाल। मानसून अपने साथ जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। लगातार बारिश और जलभराव के कारण सड़कों, गलियों और घरों के आसपास जमा होने वाला गंदा पानी बैक्टीरिया, वायरस, परजीवियों और मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में सिर्फ डेंगू और मलेरिया ही नहीं, बल्कि लेप्टोस्पायरोसिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए और ई, दस्त, त्वचा रोग और फंगल संक्रमण जैसी कई बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए तो इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस, जिससे लोग अब भी हैं अनजान?
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित चूहों या अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलता है। यदि यह गंदा पानी शरीर पर मौजूद कट, खरोंच, आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो संक्रमण हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं, इसलिए कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी किडनी, लिवर और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
मानसून में इन 8 बीमारियों से रहें सावधान
1. लेप्टोस्पायरोसिस
गंदे पानी के संपर्क से फैलने वाला संक्रमण, जो गंभीर होने पर किडनी और लिवर को प्रभावित कर सकता है।
2. डेंगू
घर के आसपास जमा साफ पानी में पनपने वाले एडीज मच्छर के कारण फैलता है।
3. मलेरिया
बरसात में बढ़ने वाले मच्छरों के कारण इसका खतरा भी बढ़ जाता है।
4. टाइफाइड
दूषित भोजन और पानी के सेवन से होने वाला गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण।
5. हेपेटाइटिस ए और ई
गंदे पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण लिवर को प्रभावित करने वाले संक्रमण।
6. एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस
दूषित भोजन और पानी से दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।
7. त्वचा और फंगल संक्रमण
लंबे समय तक गंदे पानी में रहने से त्वचा संबंधी संक्रमण और फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं।
8. श्वसन संक्रमण
बरसात के मौसम में नमी और संक्रमण के कारण सांस संबंधी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं।
इन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा
- सफाईकर्मी
- नगर निगम एवं सीवर कर्मचारी
- राहत एवं बचाव कार्य में लगे लोग
- जलभराव वाले क्षेत्रों के निवासी
- खेतों में काम करने वाले किसान
- गंदे पानी में खेलने वाले बच्चे
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि बारिश या बाढ़ के पानी के संपर्क में आने के बाद इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- उल्टी या मतली
- आंखों का लाल होना
- कमजोरी
- पेशाब कम होना
- सांस लेने में तकलीफ
मानसून में ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
✔ जहां तक संभव हो, जलभराव वाले पानी में चलने से बचें।
✔ यदि जाना जरूरी हो तो रबर के जूते और दस्ताने पहनें।
✔ शरीर पर घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें।
✔ केवल उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिएं।
✔ हमेशा ताजा और गर्म भोजन का सेवन करें।
✔ घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
✔ हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने की आदत बनाए रखें।
✔ बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
जानिए…
क्या हर बुखार डेंगू होता है?
नहीं। मानसून में होने वाला हर बुखार डेंगू नहीं होता। लेप्टोस्पायरोसिस, टाइफाइड, वायरल फीवर, मलेरिया और अन्य संक्रमणों के लक्षण भी शुरुआती दौर में लगभग एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए जांच कराना और सही इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञ की सलाह
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश या बाढ़ के पानी के संपर्क में आने के बाद यदि दो से तीन सप्ताह के भीतर बुखार, शरीर दर्द या अन्य लक्षण विकसित हों तो इसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कारोबार समाचार की सलाह
बारिश का मौसम आनंद के साथ-साथ सतर्कता भी मांगता है। घर और आसपास साफ-सफाई रखें, जलभराव से बचें, मच्छरों को पनपने न दें और किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लें। समय पर इलाज ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।




