मुंबई, 3 नवंबर। कैरेएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 27 में भारत का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से ₹0.7-0.8 लाख करोड़ अधिक रह सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा-से-जीडीपी अनुपात 4.3-4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। एजेंसी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार अपने ₹1 लाख करोड़ के इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड का उपयोग राजकोषीय घाटा लक्ष्य हासिल करने के लिए कर सकती है।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, कस्टम ड्यूटी और जीएसटी संग्रहण से सकल कर संग्रहण को समर्थन मिलेगा, जिससे वित्त वर्ष 27 में सकल कर संग्रहण बजट अनुमान से अधिक रह सकता है। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी और इनकम टैक्स संग्रह में संभावित कमी के चलते सकल कर राजस्व में ₹1 लाख करोड़ की कमी रह सकती है।
डिविडेंड और विनिवेश से आय
कैरेएज रेटिंग्स का कहना है कि डिविडेंड ट्रांसफर और विनिवेश से प्राप्ति बढ़ने से केंद्र की कुल आय में कमी ₹0.5 लाख करोड़ तक सीमित रह सकती है। वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में केंद्र ने विनिवेश से ₹0.56 लाख करोड़ जुटाए, जो पूरे वर्ष के बजट अनुमान ₹0.8 लाख करोड़ का 70 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर है। घोषित आईडीबीआई बैंक हिस्सेदारी बिक्री से लगभग ₹26,000 करोड़ मिलने की संभावना है, जिससे कुल विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से प्राप्ति ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जो बजट अनुमान से अधिक है।
डिविडेंड से आय भी कुल प्राप्तियों को मजबूत करेगी। केंद्र ने वित्त वर्ष 27 में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ₹3.2 लाख करोड़ डिविडेंड का बजट रखा था, जिसमें अकेले आरबीआई का सरप्लस ट्रांसफर ₹2.9 लाख करोड़ है। वित्त वर्ष 25 से आरबीआई का सरप्लस ट्रांसफर हर साल ₹2 लाख करोड़ से अधिक रहा है, जिससे केंद्र को अतिरिक्त राजकोषीय स्थान मिला है। कुल मिलाकर, डिविडेंड और प्रॉफिट से आय बजट अनुमान से थोड़ी अधिक रहने की संभावना है।
पूंजीगत व्यय और सब्सिडी का रुझान
वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में केंद्र का पूंजीगत व्यय 12.7 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें रेलवे मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग को छोड़कर पूंजीगत व्यय सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़ा। राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत अधिक वितरण के कारण पूंजीगत ट्रांसफर कुल पूंजीगत व्यय का 13.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष 9.8 प्रतिशत था। हालांकि, पूरे वर्ष का पूंजीगत व्यय बजट अनुमान से थोड़ा कम रह सकता है।
व्यय के मोर्चे पर, सब्सिडी बोझ बजट अनुमान से ₹1.2 लाख करोड़ अधिक रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में प्रमुख सब्सिडी पर खर्च सालाना 10.1 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें खाद्य सब्सिडी व्यय में 16 प्रतिशत और उर्वरक सब्सिडी में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि बजट में गिरावट का अनुमान था। पूरे वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी बजट से लगभग ₹1 लाख करोड़ अधिक रह सकती है, जबकि खाद्य सब्सिडी भी बजट से थोड़ी अधिक रहेगी। उर्वरक सब्सिडी में वृद्धि का कारण अप्रैल-मई 2026 में पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद यूरिया की कीमतों में तेजी रही, हालांकि वैश्विक कीमतें अब सामान्य हो गई हैं।
राजकोषीय परिदृश्य और घाटा प्रबंधन
कैरेएज रेटिंग्स का अनुमान है कि सकल कर राजस्व बजट अनुमान से लगभग ₹1 लाख करोड़ कम रह सकता है, मुख्यतः इनकम टैक्स और एक्साइज ड्यूटी संग्रह में कमजोरी के कारण। डिविडेंड ट्रांसफर और विनिवेश से प्राप्ति बढ़ने से कुल आय में कमी ₹0.5 लाख करोड़ तक सीमित रह सकती है। कुल व्यय बजट अनुमान से ₹0.3 लाख करोड़ अधिक रह सकता है, जिसका मुख्य कारण सब्सिडी में वृद्धि है, हालांकि राजस्व व्यय में सुधार और पूंजीगत व्यय में मामूली कमी से इसकी आंशिक भरपाई होगी।
इन सभी कारकों को मिलाकर, राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से ₹0.7-0.8 लाख करोड़ अधिक रह सकता है और घाटा-से-जीडीपी अनुपात 4.3-4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। कैरेएज रेटिंग्स ने कहा कि केंद्र सरकार ₹1 लाख करोड़ के इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड का उपयोग घाटा लक्ष्य पूरा करने में कर सकती है और चालू वर्ष में उधारी पर अतिरिक्त दबाव की संभावना नहीं है।
— कारोबार समाचार ब्यूरो
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